Vinit Abha Upadhyay Ranchi: सत्ताधारी दल के विधायक सरफराज अहमद के इस्तीफे ने राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा दी है. इसके साथ ही अलग-अलग तरह की चर्चा और अटकलों का बाजार भी गर्म हो गया है. हर किसी के अपने अपने दावे है और उन दावों को मजबूत करने के लिए लोग दलीलें भी दे रहे हैं. इस बीच सरफराज अहमद के बाद गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे के एक ट्वीट ने एक अलग बहस छेड़ दी है. निशिकांत दुबे ने एक ट्वीट कर यह दावा किया है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पत्नी को अगला सीएम बनाया जा सकता है, लेकिन इसमें एक अड़चन है. निशिकांत दुबे ने जो ट्वीट किया है, उसमें उन्होंने लिखा है कि “मुम्बई हाईकोर्ट के काटोल विधानसभा के निर्णय के अनुसार, अब गांडेय में चुनाव नहीं हो सकता. काटोल विधानसभा जब महाराष्ट्र में खाली हुआ तब विधानसभा का कार्यकाल 1 साल 50 दिन बचा था. https://twitter.com/nishikant_dubey/status/1741713910871294310
https://twitter.com/nishikant_dubey/status/1741725971303006327
https://twitter.com/nishikant_dubey/status/1741733679884537955
झारखंड हाईकोर्ट के वरीय अधिवक्ता और पूर्व महाधिवक्ता आर एस मजूमदार कहते हैं कि रिप्रेजेंटेशन ऑफ पीपल एक्ट (RP Act) के सेक्शन 151 A (प्रोविजन) के मुताबिक, अगर विधानसभा का टर्म एक साल से कम समय के लिए बचा हुआ है तो वहां उपचुनाव नहीं कराया का सकता है. हालांकि सामान्य परिस्थिति में किसी भी सीट के खाली होने के छह महीने के अंदर उपचुनाव कराये जाने का प्रावधान है. भाजपा के शासनकाल में महाधिवक्ता रहे राज्य के वरीय अधिवक्ता अजीत कुमार बताते हैं कि किसी भी सीट के खाली होने के छह महीने में अंदर उपचुनाव कराये जाने का प्रावधान है. लेकिन एक वर्ष से कम समय बचे रहने के कारण उपचुनाव नहीं हो सकता है. लेकिन बिना सदस्यता के भी किसी व्यक्ति को मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है. जिससे एक नए विवाद की शुरुआत हो सकती है. क्योंकि रिप्रेजेंटेशन ऑफ पीपल एक्ट (RP Act) के सेक्शन 151 A (प्रोविजन) के मुताबिक, उपचुनाव नहीं हो सकता और अगर कोई गैर सदस्यता वाला व्यक्ति मुख्यमंत्री के पद पर काबिज़ होता है, तो उसे छह महीने के भीतर विधानसभा की सदस्यता लेनी होगी. जिस व्यक्ति को मुख्यमंत्री बनाया जाता है वह छह महीने में चुनाव जीत कर विधानसभा की सदस्यता ले लेता है तो कोई कानूनी अड़चन नहीं आएगी. [wpse_comments_template]
https://twitter.com/nishikant_dubey/status/1741725971303006327
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झारखंड हाईकोर्ट के वरीय अधिवक्ता और पूर्व महाधिवक्ता आर एस मजूमदार कहते हैं कि रिप्रेजेंटेशन ऑफ पीपल एक्ट (RP Act) के सेक्शन 151 A (प्रोविजन) के मुताबिक, अगर विधानसभा का टर्म एक साल से कम समय के लिए बचा हुआ है तो वहां उपचुनाव नहीं कराया का सकता है. हालांकि सामान्य परिस्थिति में किसी भी सीट के खाली होने के छह महीने के अंदर उपचुनाव कराये जाने का प्रावधान है. भाजपा के शासनकाल में महाधिवक्ता रहे राज्य के वरीय अधिवक्ता अजीत कुमार बताते हैं कि किसी भी सीट के खाली होने के छह महीने में अंदर उपचुनाव कराये जाने का प्रावधान है. लेकिन एक वर्ष से कम समय बचे रहने के कारण उपचुनाव नहीं हो सकता है. लेकिन बिना सदस्यता के भी किसी व्यक्ति को मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है. जिससे एक नए विवाद की शुरुआत हो सकती है. क्योंकि रिप्रेजेंटेशन ऑफ पीपल एक्ट (RP Act) के सेक्शन 151 A (प्रोविजन) के मुताबिक, उपचुनाव नहीं हो सकता और अगर कोई गैर सदस्यता वाला व्यक्ति मुख्यमंत्री के पद पर काबिज़ होता है, तो उसे छह महीने के भीतर विधानसभा की सदस्यता लेनी होगी. जिस व्यक्ति को मुख्यमंत्री बनाया जाता है वह छह महीने में चुनाव जीत कर विधानसभा की सदस्यता ले लेता है तो कोई कानूनी अड़चन नहीं आएगी. [wpse_comments_template]
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