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पत्नी पर साथ रहने का दबाव नहीं डाल सकता पति,  नौकरी छोड़ने से मना करना वाजिब कारण : हाईकोर्ट

पत्नी ने अदालत को बताया कि पति और ससुराल पक्ष द्वारा 10 लाख रुपए की मांग की गई थी ताकि स्कॉर्पियो वाहन खरीदा जा सके. साथ ही उस पर सरकारी नौकरी छोड़ने का दबाव बनाया जा रहा था. पत्नी वर्तमान में पाकुड़ में है. वह सरकारी प्लस टू स्कूल में सहायक शिक्षिका के पद पर कार्यरत हैं.
 

Ranchi : झारखंड हाईकोर्ट ने दांपत्य अधिकारों की बहाली (Restitution of Conjugal Rights) से जुड़ा एक अहम  फैसला सुनाया है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पत्नी को अपनी नौकरी छोड़कर पति के साथ रहने के लिए विवश नहीं किया जा सकता. कहा कि  नौकरी जारी रखना पति से अलग रहने का एक उचित व वैध कारण हो सकता है.

 

 न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति अरुण कुमार राय की खंडपीठ ने जितेंद्र आज़ाद बनाम मीना गुप्ता मामले में पारिवारिक न्यायालय, पाकुड़ के आदेश को बरकरार रखते हुए पति की अपील खारिज कर दी.

 
  

पति जितेंद्र आज़ाद ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 9 के तहत पत्नी मीना गुप्ता के खिलाफ दांपत्य अधिकारों की बहाली के लिए याचिका दायर की थी. उनका आरोप था कि पत्नी बिना किसी उचित कारण के उन्हें छोड़कर अलग रह रही है.

 


 पत्नी ने अदालत को बताया कि पति और ससुराल पक्ष द्वारा 10 लाख रुपए की मांग की गई थी ताकि स्कॉर्पियो वाहन खरीदा जा सके. साथ ही उस पर सरकारी नौकरी छोड़ने का दबाव बनाया जा रहा था. पत्नी वर्तमान में पाकुड़ में है. वह सरकारी प्लस टू स्कूल में सहायक शिक्षिका के पद पर कार्यरत हैं.

 


हाईकोर्ट ने कहा कि आधुनिक समाज में महिला को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर रहने का पूरा अधिकार है. पत्नी का नौकरी जारी रखना अनुचित आचरण नहीं माना जा सकता. दांपत्य अधिकारों की बहाली का अर्थ यह नहीं कि पत्नी को जबरन पति की शर्तों पर जीने के लिए बाध्य किया जाये.

 


विवाह एक साझेदारी है, जिसमें दोनों पक्षों को समझौता और संतुलन बनाना होता है.अदालत ने यह भी कहा कि पति यह साबित करने में असफल रहा कि पत्नी बिना किसी वाजिब कारण के अलग रह रही है. हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि आदेश में कोई कानूनी त्रुटि या मनमानी (perversity) नहीं है.

 

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