Laxmi Singh Husainabad (Palamu): हुसैनाबाद प्रखंड क्षेत्र के सुदूरवर्ती महुडंड पंचायत अंतर्गत लोहबंधा गांव के चरकउल टोला में एक भी सरकारी चापानल नहीं होने से उक्त टोला के लगभग दस घर के आदिम जनजाति परिवार में पेयजल की घोर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. मालूम हो कि चरकउल टोला के आदिम जनजाति परिवार पिछले डेढ़ दशक से जंगल व पहाड़ों के तलहटियों में झुगी झोपड़ी व कच्चे मकानों में रह कर अपना जीवन यापन करते हैं. उक्त टोला के आदिम जनजाति परिवार के लोगों ने जंगल के सुखी लकड़ी चुनकर मोहम्मदगंज व पांडू के बाजार में बेचकर दो वक्त के रोटी का जुगाड़ किया करते हैं. [caption id="attachment_647759" align="aligncenter" width="1280"]
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alt="" width="1280" height="576" /> चिलचिलाती धूप में पानी लाते ग्रामीण[/caption] इस टोले में रहने वाले लोग मजबूर होकर इस भीषण गर्मी में चिलचिलाती धूप का सामना कर लगभग 2 किलोमीटर दूरी तय कर जंगल व पगडंडियों के रास्ते अपनी प्यास बुझाने के लिए पीने का पानी लाते हैं. इससे पहले उक्त टोला के ग्रामीणों पास के ही खेत में एक सरकारी कुएं का पानी ले जाते थे, लेकिन उस कुआं का जल स्तर कम हो जाने के कारण पानी गंदा हो जा रहा है. इस कारण दो किलोमीटर दूरी तय कर लोहबंधा गांव से पीने का पानी ढोने पर ग्रामीण विवश हैं. चरकउल टोला के ग्रामीण मुनेश्वर परहिया,चतरगुन भुइयां, राजेश्वर भुइयां,करीमन भुइयां, अमरावती देवी, लिलमी देवी, सीता देवी, सैदुन बीबी,का कहना है कि सरकार के द्वारा यदि हमारे यहां चरकउल टोला में चापानल लग जाता तो हम लोगों को स्वच्छ जल प्राप्त होता, जिसे हम सब पीने के पानी के साथ-साथ पानी से सम्बंधित अन्य कामों को आसानी से कर सकते थे. मूल रूप से लोहबंधा गांव के चरकउल टोला में चापानल नहीं रहने से काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. क्षेत्र के भुक्तभोगी ग्रामीणों ने राज्य सरकार व स्थानीय जनप्रतिनिधियों से अभिलंब जल संकट को दूर करने की मांग की है. [wpse_comments_template]
alt="" width="1280" height="576" /> चिलचिलाती धूप में पानी लाते ग्रामीण[/caption] इस टोले में रहने वाले लोग मजबूर होकर इस भीषण गर्मी में चिलचिलाती धूप का सामना कर लगभग 2 किलोमीटर दूरी तय कर जंगल व पगडंडियों के रास्ते अपनी प्यास बुझाने के लिए पीने का पानी लाते हैं. इससे पहले उक्त टोला के ग्रामीणों पास के ही खेत में एक सरकारी कुएं का पानी ले जाते थे, लेकिन उस कुआं का जल स्तर कम हो जाने के कारण पानी गंदा हो जा रहा है. इस कारण दो किलोमीटर दूरी तय कर लोहबंधा गांव से पीने का पानी ढोने पर ग्रामीण विवश हैं. चरकउल टोला के ग्रामीण मुनेश्वर परहिया,चतरगुन भुइयां, राजेश्वर भुइयां,करीमन भुइयां, अमरावती देवी, लिलमी देवी, सीता देवी, सैदुन बीबी,का कहना है कि सरकार के द्वारा यदि हमारे यहां चरकउल टोला में चापानल लग जाता तो हम लोगों को स्वच्छ जल प्राप्त होता, जिसे हम सब पीने के पानी के साथ-साथ पानी से सम्बंधित अन्य कामों को आसानी से कर सकते थे. मूल रूप से लोहबंधा गांव के चरकउल टोला में चापानल नहीं रहने से काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. क्षेत्र के भुक्तभोगी ग्रामीणों ने राज्य सरकार व स्थानीय जनप्रतिनिधियों से अभिलंब जल संकट को दूर करने की मांग की है. [wpse_comments_template]
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