Ranchi: सेंटर फॉर स्टडी ऑफ साइंस, टेक्नोलॉजी एंड पॉलिसी (सीस्टेप - सीएसटीईपी) द्वारा ``जलवायु के परिप्रेक्ष्य से वायु प्रदूषण पर विचार`` विषय पर चार दिवसीय इंडिया क्लीन एयर समिट 2022 (आईसीएएस 2022) का शुक्रवार को तीसरे दिन कई मुद्दों पर चर्चा हुई. आईसीएएस 2022 का तीसरा दिन वायु प्रदूषण से निपटने वाली नीतियों और इन नीतियों को बेहतर बनाने के उपायों, विशेष रूप से बेहतर आंकड़ा संकलन पर केंद्रीत रहा. इस मौके पर आईआईटी कानपुर के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर एसएन त्रिपाठी ने कहा अकेले वायु गुणवत्ता सुनिश्चित करने के कार्यक्षेत्र में 10 लाख ग्रीन जॉब्स उपलब्ध होने के अनुमान हैं. उन्होंने आगे कहा शिक्षा, तकनीक और स्वास्थ्य क्षेत्रों में उपलब्ध इन नौकरियों के अवसर पैदा करना राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) के दूसरे चरण को आगे ले जाने में काफी मददगार साबित हो सकता है. इसे पढ़ें-रांची">https://lagatar.in/ranchi-municipal-corporation-will-soon-issue-bonds-for-the-development-of-the-city/">रांची
नगर निगम शहर के विकास के लिए जल्द ही जारी करेगा बांड प्रो. त्रिपाठी ने कहा कि सरकार की निगरानी प्रणाली में सहायता करने के लिए हाइब्रिड पद्धति की निगरानी का एक प्रस्ताव तैयार कर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) को उनकी मंजूरी के लिए भेजा गया है. तिवारी ने कहा वायु प्रदूषण के स्तर की बेहतर निगरानी और प्रबंधन के लिए निगरानी के कार्यक्षेत्र और डेटा पॉइंट्स की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि करने की तत्काल ज़रूरत है. वर्तमान में हमारे पास कोई व्यापक वायु गुणवत्ता प्रबंधन कार्यक्रम नहीं है, यहां तक कि हमारे शिक्षाविद भी वायु गुणवत्ता के विशिष्ट अध्ययन में पूरी तरह प्रशिक्षित नहीं हैं. वायु गुणवत्ता प्रबंधन ऐसे मानक के विकास के साथ-साथ स्वास्थ्य और आर्थिक विशेषज्ञों की भागीदारी को अनिवार्य बना देता है. इस कार्यक्रम, जो एक से अधिक विषयों से संबंधित है. इसके बारे में किसी एक विभाग द्वारा ज्ञान और जानकारी प्रदान नहीं की जा सकती है. मेरा मानना है कि अगले पांच वर्षों में ऐसे कम-से-कम 1000 पेशेवरों की आवश्यकता होगी जिनके पास इसका समुचित ज्ञान हो. इस कार्यक्रम में नौकरशाहों को भी शामिल किया जा सकता है. इसे भी पढ़ें-जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-a-five-day-special-mediation-camp-will-be-organized-in-the-civil-court-from-september-12-to-16/">जमशेदपुर
: सिविल कोर्ट में 12 से 16 सितम्बर तक पांच दिवसीय विशेष मध्यस्थता शिविर का होगा आयोजन इस मौके पर आशीष तिवारी (आईएफएस), सचिव, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन विभाग, उत्तर प्रदेश ने नीति निर्माण, ज्ञान, संसाधन और शासन में चुनौतियों पर प्रकाश डाला. उन्होंने आभासी और बहु-स्तरीय निगरानी की जरूरत पर भी जोर दिया. जिसे यूपी सरकार द्वारा वर्तमान में विकसित किया जा रहा है. हमें विभिन्न विभागों के कार्रवाई में तालमेल बिठाने की जरूरत है. विशिष्ट क्षेत्रों को लक्षित करके वायु प्रदूषण को कम करने के लिए नीतियों के अभिसरण की जरुरत है. यूपी में करीब 30000 उद्योग वायु प्रदूषण फैला रहे हैं. इसकी निगरानी संभव नहीं है. ऐसे में आभासी निगरानी (वर्चुअल मॉनिटरिंग) की जरूरत है. शहर स्तरीय निगरानी के लिए एक त्रि-स्तरीय निगरानी तंत्र का विकास किया जा रहा है. प्रदूषित क्षेत्रों को प्राथमिकता देने वाले लक्ष्य के साथ वायु प्रदूषण के प्रति संवेदनशील क्षेत्रीय योजनाएं समय की जरूरत है. विजय मोहन राज (आईएफएस), प्रधान सचिव, वन, पारिस्थितिकी और पर्यावरण मंत्रालय, कर्नाटक सरकार ने विकास प्रतिमानों को कार्बन-तटस्थ दृष्टिकोण से देखने और वायु प्रदूषण एवं जलवायु परिवर्तन से निपटने की दिशा में स्थानीय स्तर पर सामूहिक प्रयास करने वाले लोगों का एक नेटवर्क बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया. उन्होंने कहा, "हम देखते हैं कि अधिक-से-अधिक लोग``ऑक्सीजन संपन्न क्षेत्रों`` की यात्राएं कर रहे हैं. प्रकृति चमत्कारिक दवा बन गई है, लेकिन लंबे समय तक शायद ऐसा न रहे.” उन्होंने आगे बताया कि विभाग ने ऑक्सीजन संपन्न और कार्बन-तटस्थ क्षेत्रों को चिन्हित करने हेतु बेंगलुरु में पेड़ों के मानचित्रण के लिए एक प्रारंभिक पहल की है. इसे भी पढ़ें-शाम">https://lagatar.in/evening-news-diary-26-aug-2022-jharkhand-news-updates/">शाम
की न्यूज डायरी।।26 AUG।।UPA में बैठकों का दौर,निगाहें राजभवन पर।।बीजेपी के 16 MLA संपर्क में-सुप्रियो।।फिर ED रिमांड पर वकील राजीव।।बिहारःकांस्टेबल से सीधे DSP बनी बबली।।आजाद का कांग्रेस से इस्तीफा।।असमःअलकायदा के 34 संदिग्ध आतंकी अरेस्ट।।समेत कई खबरें और वीडियो।। डॉ प्रतिमा सिंह, अध्यक्ष, सेंटर फॉर एयर पॉल्यूशन स्टडीज (सीएपीएस) ने कहा कि वायु प्रदूषण की चुनौतियों से निपटने के लिए जलवायु परिवर्तन की व्यापक समझ की भी जरुरत आवश्यकता है और आईसीएएस 2022 इस पर गहन विचार-विमर्श कर रहा है कि वायु प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन संबंधी नीतियां एक साथ मिल कर कैसे समाधान तलाश कर सकती हैं. उन्होंने बताया कि जलवायु परिवर्तन के परिप्रेक्ष्य से वायु प्रदूषण पर विचार करने से हमें सुरक्षित और टिकाऊ वातावरण संबंधी उपाय खोजने में मदद मिल सकती है. अलग-अलग काम करते हुए अब हम कार्यान्वयन योग्य समाधान हासिल नहीं कर सकते हैं. विभिन्न समुदायों को एक साथ लाकर, हम ज्ञान की खाई को पाटना चाहते हैं और कारगर समाधान की खोज करना चाहते हैं. डॉ. जय असुंडी, कार्यकारी निदेशक, सीस्टेप ने कहा कि सीस्टेप आईसीएएस के आयोजन के जरिए इकोसिस्टम निर्माण और विकास के लिए मंच तैयार कर रहा है. इस इकोसिस्टम के तहत विभिन्न समुदाय - अकादमिक जगत, नागरिक समाज, उद्योग और सरकार - अनुसंधान के लिए बेहतर सूचना मुहैया करेंगे, श्रेष्ठतर समाधान विकसित करने में मदद करेंगे और इन्हें साथ मिलकर प्रभावी ढंग से लागू करेंगे. [wpse_comments_template]
ICAS एयर समिट 2022: अकेले वायु गुणवत्ता सुनिश्चित करने के कार्यक्षेत्र में 10 लाख ग्रीन जॉब्स की संभावना

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