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आईकॉन्स 24  : एकजुट होकर आत्मनिर्भर भारत बनाने का संकल्प लिया गया

Ranchi : मेकॉन लिमिटेड और सेल के द्वारा इस्पात मंत्रालय के तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय आईकॉन्स 24 सम्मेलन का आज  समापन हुआ. इस्पात पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन (आईकॉन्स24) के आखिरी दिन कई सत्र आयोजित हुए. जिसमे रोलिंग मिल्स प्रौद्योगिकी में रुझान और चुनौतियां सेकेंडरी इस्पात निर्माण प्रौद्योगिकी में रुझान और चुनौतियां और ओपन हाउस पैनल चर्चा की गयी.  

विदेशी मुद्रा बाहर जाने को कम करने में भी मदद मिलेगी

आईकॉन्स 24 में भारत में पूंजीगत वस्तुओं के विनिर्माण पर विशेष ध्यान देने के साथ एक उज्जवल इस्पात बाजार परिदृश्य को आकार देने का संकल्प लिया गया. यह एकजुट प्रयास देश को आत्मनिर्भर भारत बनाने की दिशा में तेजी से ले जा सकेगा. इसमें प्रतिस्पर्धी प्रौद्योगिकियों और पूंजीगत वस्तुओं के विनिर्माण के बड़े पैमाने पर और तेजी से स्वदेशीकरण पर जोर दिया गया, जिससे विदेशी प्रौद्योगिकी आपूर्तिकर्ताओं और निर्माताओं पर निर्भरता कम होगी और विदेशी मुद्रा को बाहर जाने को कम करने में भी मदद मिलेगी.

स्वदेशीकरण के सामने आने वाली चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया गया

प्रतिभागियों ने आयोजित विभिन्न सत्रों में इस्पात उद्योग के नवीनतम रुझानों, चुनौतियों और अवसरों पर गहन चर्चा की. सम्मेलन में पूंजीगत वस्तुओं के निर्माण में भारत की क्षमता और इसके बड़े पैमाने पर स्वदेशीकरण के लिए और इसके सामने आने वाली चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया गया. इस सम्मेलन ने महत्वपूर्ण संवाद और ज्ञान के आदान-प्रदान के लिए एक गतिशील मंच प्रदान किया और साथ ही हितधारकों को रणनीतिक सहयोग की दिशा में सोचने का अवसर भी प्रदान किया.

इस्पात मंत्रालय भारत सरकार कई अधिकारी शामिल हुए

इस अवसर पर नागेन्द्र नाथ सिन्हा-सचिव-इस्पात मंत्रालय भारत सरकार, अभिजीत नरेन्द्र संयुक्त सचिव इस्पात मंत्रालय, भारत सरकार, डॉ संजय रॉयसंयुक्त सचिव, इस्पात मंत्रालय, भारत सरकार, संजय कुमार वर्मा, अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक व अतिरिक्त प्रभार निदेशक (वाणिज्यिक), मेकॉन, मुकेश कुमार-निदेशक (वित्त), मेकॉन, अमित राज-निदेशक (तकनीकी), मेकॉन, प्रद्युम्न कुमार दीक्षित-निदेशक (परियोजनाएं), मेकॉन, श्रवण कुमार वर्मा-कार्यपालक निदेशक (सीईटी), सेल उपस्थित थे. सम्मेलन को संबोधित करते हुए सचिव नागेंद्र नाथ सिन्हा ने कहा कि बड़े पैमाने पर पूंजीगत वस्तुओं का स्वदेशी रूप से विनिर्माण देश में इस्पात की मांग को बढ़ावा देगा. इसके अलावा इससे बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन के रास्ते खुलेंगे, प्रौद्योगिकी अवशोषण के अवसर मिलेंगे और स्वदेशी डिजाइन और उन्नत विनिर्माण क्षमताओं का निर्माण होगा. यह सब देश को आत्मनिर्भर बनने में काफी हद तक मदद करेगा. [wpse_comments_template]  

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