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ओबीसी 55 और अगड़े सिर्फ 5 प्रतिशत

झारखंड में जातीय गणना हुई तो चौंकाने वाले होंगे नतीजे

Kaushal Anand Ranchi: बिहार के आंकड़े जारी होने के बाद झारखंड में भी जातिगत गणना की मांग जोर पकड़ रही है. झारखंड की 2023 की अनुमानित आबादी और जातिगत दावों की पड़ताल करने पर चौंकाने वाले आंकड़े सामने आ रहे हैं. बिहार की तरह झारखंड में भी अन्य पिछड़ा वर्ग की आबादी 55 फीसदी से ज्यादा हो सकती है. आदिवासियों की संख्या में भी 2011 की जनगणना की तुलना में वृद्धि की संभावना है. दलित आबादी भी 1 से 2 फीसदी बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं. दूसरी तरफ अगड़े वर्ग की आबादी 3 से 5 फीसदी के बीच सिमट सकती है. अगर अनुमान और दावाें का कुछ प्रतिशत इधर-उधर भी हुआ, तो झारखंड में पिछड़ी जाति अपर हैंड हो जाएगी. ऐसे में झारखंड की आदिवासी बहुल राज्य होने की छवि को झटका लग सकता है, क्योंकि झारखंड में पिछड़ी जाति की आबादी सबसे अधिक हो जाएगी. हालांकि 2011 की जनगणना की तुलना में आदिवासियों की संख्या में बढ़ोतरी होती दिख रही है. राज्य की प्रमुख क्षेत्रीय पार्टी झामुमो अब आहिस्ता-आहिस्ता आदिवासी राजनीति से ऊपर उठता नजर आ रहा है. लेकिन अब तक झामुमो की राजनीति के केंद्र और मूल में आदिवासी ही रहे हैं. अगर झारखंड में जातिगत गणना हुई और ओबीसी बहुसंख्यक हुआ, तो झामुमो की राजनीति को झटका लग सकता है. दूसरी तरफ अब आजसू पार्टी खुलकर जातिगत जनगणना के पक्ष में खड़ी होती नजर आ रही है. हालांकि भाजपा का साथ उसे नहीं मिल रहा है. यह आजसू पार्टी के लिए चिंता की बात है. दरअसल, भाजपा इस मुद्दे पर पसोपेश में है. बिहार में पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी जातिगत गणना का श्रेय अपनी पार्टी को देते हुए कह रहे हैं कि जातिगत गणना कराने का फैसला एनडीए की सरकार में लिया गया था. लेकिन ठीक एसके उलट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जातिगत गणना को बहुसंख्यक समुदाय और गरीबों को बांटने की साजिश करार दे रहे हैं. कुल मिलाकर, झामुुमो हक और अधिकार देने की वकालत तो कर रहा है, लेकिन जातिगत जनगणना पर खुलकर कुछ नहीं बोल रहा है.

झारखंड में अनुमानित गणित

2023 में झारखंड की अनुमानित आबादी : 4.06 करोड़ झारखंड में ओबीसी की अनुमानित आबादी कुड़मी : 60 लाख कुशवाहा : 30 लाख वैश्य : 45 लाख मुसलमान पिछड़ा वर्ग : 30 लाख केवट, मल्लाह, बिंद, छीवर आदि : 30 लाख कुम्हार, नाई, विश्वकर्मा, शर्मा, सोनार व अन्य : 40 लाख यादव : 15 लाख कुल ओबीसी : 55 % आदिवासी : 1 करोड़ (28 फीसदी) (2011 की जनगणना से 2% बढ़ोतरी का अनुमान) दलित : 11-12 %, नोट : 2011 की जनगणना की तुलना में 1-2% वृद्धि की उम्मीद सवर्ण : 3 से 5 %

क्या है आंकड़ों का आधार

राज्य पिछड़ा आयोग ने पूर्ववर्ती रघुवर सरकार को एक गोपनीय रिपोर्ट भेजी थी, जिसमें आयोग ने 55 प्रतिशत पिछड़ा वर्ग आबादी का जिक्र किया था. ओबीसी का आंकड़ा आयोग की गोपनीय रिपोर्ट व विभिन्न पिछड़ा वर्ग संगठनों से मिली जानकारी के आधार पर है. आदिवासियों का आंकड़ा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा प्रधानमंत्री को लिखे गए पत्र से लिया गया है, जिसमें राज्य में आदिवासियों की संख्या एक करोड़ होने की बात कही गयी है.

दिसंबर से राज्य में शुरू होगी जातीय जनगणना : चंपई

राज्य के आदिवासी कल्याण एवं परिवहन मंत्री चंपई सोरेन ने कहा कि बिहार की तरह झारखंड सरकार भी शीघ्र जातीय जनगणना कराने जा रही है. कैबिनेट की अगली बैठक में इस प्रस्ताव पर मुहर लगेगी. संभवतः दिसंबर से राज्य में जातीय जनगणना शुरू हो जाएगी. मंत्री चंपई सोरेन ने कहा कि बिहार किसी भी आंदोलन का अगुआ रहा है. वहां जातीय जनगणना से यह बात साबित हो चुकी है कि अब भी दबे- कुचले पिछड़े, आदिवासियों को उनकी आबादी के अनुसार आरक्षण देकर उनके जीवनस्तर में व्यापक सुधार लाने की आवश्यकता है, इसलिए झारखंड सरकार भी जातीय जनगणना मार्च 2024 के पूर्व करा लेना चाहती है. उन्होंने कहा कि देश में इंडिया गठबंधन की सरकार बनी, तो पूरे देश में जातीय जनगणना कराएगी और आबादी के अनुसार सभी वर्गों का आरक्षण तय करेगी. [wpse_comments_template]  

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