प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 मई को अपने एक भाषण के दौरान देश के लोगों से अपील की. उन्होंने देशभक्ति के लिए एक साल तक सोना नहीं खरीदने, कम पेट्रोल-डीजल खरीदने, खाने के तेल का कम इस्तेमाल करने और वर्क फ्रॉम होम काम करने को कहा.
पीएम की इस अपील की सोशल मीडिया में आलोचनाएं हो रही है. लोग सवाल उठा रहे हैं कि अचानक देश इस हाल में कैसे पहुंच गया? दस दिन पहले संपन्न हुए चुनाव तक तो सब ठीक था. क्या देश की इकोनॉमी का जो बैलून उड़ता हुआ दिखलाया जा रहा था, वह फुट गया है?
सवाल क्यों ना उठे. प्रधानमंत्री की अपील को लागू करने की जिम्मेदारी मीडिल क्लास पर है. मीडिल क्लास पेट्रोल-डीजल ना खरीदे और सरकारें 50 गाड़ियों के काफिले पर चले. उनके लिए ट्रैफिक रोक दिया जाए. लोगों की गाड़ियों की तेल की टंकी खड़ी-खड़ी खाली होती रही. लेकिन वो तेल-डीजल ना खरीदे. ये कैसे संभव है.
अपील है कि लोग शादी में कटौती करें. अमीरों को इस अपील से कोई फर्क नहीं पड़ता. क्यों मीडिल क्लास शादी में कटौती करे और सरकारें वोट के लिए लोगों के खाते में मुफ्त में पैसा डालते रहे. इसे रोकने के लिए सरकार कर रही है. कुछ नहीं. फिर यह अपील कैसे काम करेगा? लोग शादी तक में कटौती करे और सरकार पहले जैसे अंदाज में ही रहे, यह जायज नहीं.
एक अपील यह भी है कि लोग स्वदेशी इस्तेमाल करें. स्वदेशी में क्या-क्या इस्तेमाल करे यह तो बताया ही नहीं. भारत सरकार का दो लाख करोड़ रूपये सब्सिडी वाला पीआईएल स्कीम फ्लॉप हो चुका है. चीन का आयात बढ़ता ही जा रहा है और अब तो भारत सरकार चीनी निवेश को बढ़ावा देने के लिए प्रेस नोट- थ्री जारी करती जा रही है.
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