Ranchi : राज्य सरकार के महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग ने आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से चलाए जा रहे पूरक पोषण कार्यक्रम (SNP) को लेकर सख्त रुख अपनाया है. विभाग ने टेक होम राशन (THR) की गुणवत्ता को लेकर नया दिशा-निर्देश और मैन्यू जारी किया है. यह आदेश राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 (NFSA-2013) और केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के तहत जारी किया गया है.
गुणवत्ता या आपूर्ति में गड़बड़ी हुई तो होगी कार्रवाई
विभाग ने साफ किया है कि यदि THR की गुणवत्ता तय मानकों के अनुसार नहीं पाई जाती है या आपूर्ति में गड़बड़ी होती है, तो इसके लिए आपूर्ति एजेंसी के साथ-साथ संबंधित पदाधिकारी भी जिम्मेदार माने जाएंगे और उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. विभाग ने पोषण गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात कही है.
लाभुकों की उम्र व जरूरत के अनुसार मिलेगा अलग-अलग आहार
नए निर्देश के अनुसार, 6 माह से 12 माह तक के बच्चे, कुपोषित बच्चे, 1 से 6 साल तक के बच्चे, गर्भवती महिलाएं, धात्री माताएं और किशोरियों को उनकी आयु और पोषण आवश्यकता के अनुसार अलग-अलग प्रकार का पोषक आहार उपलब्ध कराया जाएगा. इसका उद्देश्य बच्चों और महिलाओं में कुपोषण को कम करना और संतुलित पोषण सुनिश्चित करना है.
लाभुक वर्ग के अनुसार जारी THR मैन्यू
- 6 माह से 12 माह के बच्चे : मिक्स्ड दलिया
- 6 माह से 12 माह के कुपोषित बच्चे : शिशु आहार
- 1 वर्ष से 3 वर्ष के बच्चे : पौष्टिक दलिया
- 1 वर्ष से 6 वर्ष के कुपोषित बच्चे : शक्ति आहार / पौष्टिक आहार
- 3 वर्ष से 6 वर्ष के बच्चे : नमकीन दलिया
- गर्भवती महिलाएं : नमकीन दलिया
- धात्री माताएं : नमकीन दलिया
- किशोरी बालिकाएं : नमकीन दलिया
केंद्र सरकार के मानकों के अनुसार होगी गुणवत्ता
विभाग ने स्पष्ट किया है कि THR की संरचना, पोषण मूल्य, विटामिन और मिनरल्स, गुणवत्ता, शेल्फ लाइफ, निर्माण प्रक्रिया और सेवन विधि भारत सरकार और राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी, उद्यमिता एवं प्रबंधन संस्थान (NIFTEM), हरियाणा के मानकों के अनुरूप होगी.
नियमित निगरानी और सख्त कार्रवाई के निर्देश
निर्देश में कहा गया है कि किसी भी स्थिति में घटिया या मानक से कम गुणवत्ता वाला राशन वितरित नहीं किया जाएगा. वितरण प्रक्रिया की नियमित निगरानी की जाएगी और किसी भी तरह की अनियमितता पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी.
कुपोषण के खिलाफ अभियान को मिलेगी मजबूती
विभाग का मानना है कि नए मैन्यू और कड़े गुणवत्ता नियंत्रण से राज्य में कुपोषण के खिलाफ चल रही मुहिम को और मजबूती मिलेगी. इससे आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से लाभुकों को बेहतर, सुरक्षित और पोषणयुक्त आहार उपलब्ध कराया जा सकेगा.
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