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दो सप्ताह में अनुसंधान का सार्थक परिणाम नहीं आया तो मामला CBI को सौंपा जा सकता है: हाई कोर्ट

  • - गुमला से वर्ष 2018 लापता बच्ची का मामला.
  • - DGP व एसपी गुमला हुए कोर्ट में हाजिर.

Ranchi: गुमला से वर्ष 2018 में लापता बच्ची के मामले में सुनवाई के दौरान झारखंड हाईकोर्ट ने सोमवार को राज्य सरकार को दो सप्ताह का समय देते हुए कहा कि इस दौरान अनुसंधान का सार्थक परिणाम नहीं आया तो मामला सीबीआई को सौंपा जा सकता है.

 

इस मामले में सोमवार झारखंड के डीजीपी ने कोर्ट में वर्चुअल रूप से हाजिर होकर अनुसंधान की वर्तमान स्थिति की जानकारी दी. कोर्ट ने उनसे कहा कि पुलिस का अनुसंधान किस प्रकार चल रहा है, 7 साल से अधिक समय बीतने के बाद भी गुमला से लापता हुई बच्ची अब तक बरामद नहीं की जा सकी है. 

 

वही एसपी गुमला से कोर्ट ने मामले की अनुसंधान की स्थिति पूछा. कोर्ट ने पाया कि अनुसंधान में कोई प्रगति नहीं हुई है. इस पर कोर्ट ने असंतोष व्यक्त किया और कहां कि सरकार मामले में दो सप्ताह में जवाब दाखिल करें. संतोषजनक जवाब नहीं आया तो मामला सीबीआई को दिया जाएगा. मामले की सुनवाई हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की अध्यक्षता वाली खंडपीठ में हुई.

 

क्या है मामला

दरअसल, सितंबर 2018 से गुमशुदा गुमला की 6 वर्षीय बच्ची की बरामद करने को लेकर उसकी मां चंद्रमुनि उराइन की ओर से दायर हेवियस कार्पस की सुनवाई झारखंड हाई कोर्ट कर रही है. पूर्व की सुनवाई में कोर्ट को बताया गया था कि इस मामले में गहरी अनुसंधान के लिए नया एसआईटी का गठन किया गया है, जिसने दिल्ली जाकर उस अपहरण किए गए बच्ची की जानकारी लेने की कोशिश की. उसके फोटो को जगह-जगह अपलोड कराया है. दुर्भाग्यवश अभी तक बच्ची बरामद नहीं हुई है. बच्ची की तलाश जारी है. इसी मामले में वर्ष 2023 में गठित एसआईटी की छापेमारी में लापता नौ बच्चे बरामद हुए थे.

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