Ranchi: नेशनल नियोनाटोलॉजी फोरम, झारखंड ब्रांच द्वारा होटल बीएनआर में आयोजित तीसरा ईस्ट जोन कॉन्फ्रेस नियोकॉन रविवार को समाप्त हो गया. समापन सत्र में नवजात शिशु संबंधित सभी तरह के बीमारियों के विषय में देश-विदेश के जाने माने शिशु रोग विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे. इस दौरान डॉक्टरों को बताया गया कि बच्चों के उपचार के समय किन-किन चीजों पर बारीकी से नजर रखना जरूरी है. किस कंडिशन में कौन से उपकरण का इस्तेमान करना है. बच्चों में सांस की समस्या होने पर वेंटिलेटर द्वारा कृत्रिम ऑक्सीजन देकर उनकी जान बचाने का भी प्रशिक्षण दिया गया. इसे भी पढ़ें-
JSCA">https://lagatar.in/jsca-countrys-first-stadium-where-wood-plastic-composite-picket-fencing-is-being-installed/">JSCA
देश का पहला स्टेडियम जहां लग रही वुड प्लास्टिक कंपोजिट पिकेट फेंसिंग नवजात को कृत्रिम ऑक्सीजन देकर बचायें जान
डॉक्टरों को बताया गया कि नवजात बच्चों को कृत्रिम ऑक्सीजन देकर जान बचाई जा सकती है. नेशनल नियोनेटोलॉजी फोरम के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ विक्रम दत्ता ने बताया कि नवजात बच्चों की गुणवत्ता में सुधार से 75 प्रतिशत शिशु मृत्यु दर में सुधार लाया जा सकता है. उन्होंने डॉक्टरों और अस्पताल संचालकों को सुझाव देते हुए कहा कि (डब्लूएचओ की गाइडलाइन) जिसका पालन किया जाए तो व्यापक सुधार संभव है. सभी अस्पतालों को चार स्टेप लागू करने होंगे. पहला अपनी परेशानी को पहचाने, दूसरा परेशानी को पहचान कर मुख्य परेशानी को अलग करें, तीसरा एक टीम बनायें जिसमें डॉक्टर, मरीज, नर्स और मरीज के परिजन शामिल हो और उनके सुझाव पर अमल करते हुए समस्याओं का निदान करें. इसके बाद इस नियम को अपने अस्पताल पर लागू करें.
एंटीबायोटिक का अधिक इस्तेमाल ठीक नही
अक्सर यह बातें सामने आ रही है एंटीबायोटिक दवाओं का जमकर उपयोग हो रहा है. यह अच्छी बात नही है. उन्होंने कहा कि एंटीबायोटिक दवाओं को लिखने से पहले थोड़ा परहेज किया जाए. ज्यादा प्रयोग नुकसान दायक सिद्ध हो सकता है. डॉ. दत्ता ने कहा कि अगर जन्म के साथ ही नवजात बच्चे को उसके परिजन अथवा मां अपने सीने से सटा कर रखती हैं तो बच्चा गर्म रहता है. इससे बच्चों की मृत्यु दर 38 प्रतिशत कम हो जाती है. अत: सभी डॉक्टरों को यह सलाह उनके परिजनों को देने की आवश्यकता है. इसे भी पढ़ें-
चाकुलिया">https://lagatar.in/chakulia-kanimhulis-team-became-the-winner-in-the-panchayat-level-football-competition/">चाकुलिया
: पंचायत स्तरीय फुटबॉल प्रतियोगिता में कानीमहुली की टीम बनी विजेता झारखंड में नवजात बच्चों की मृत्युदर कम
बालपन चिल्ड्रेन अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. राजेश कुमार ने कहा कि देश में नवजात बच्चों की मृत्यु दर जितनी है उसमे झारखंड में औसत मृत्यु दर कम है. इस बाबत सरकार और एजेंसियां मिलकर काम कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि तीसरा ईस्ट जोन कॉन्फ्रेस नियोकॉन में जाने माने 54 से अधिक विशेषज्ञों ने अपने विचार रखें. देश के विभिन्न हिस्सों से करीब 400 शिशु रोग विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया. शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ श्याम सिडाना ने कहा कि इस कॉन्फ्रेंस में कम खर्च के साथ बेहतर इलाज से संबंधित जानकारी दी गई. बताया गया कि गर्भवती महिलाओं को बेहतर खान पान से संबंधित जानकारी गर्भधारण से पूर्व दे दी जाए तो बच्चों में कुपोषण, विकलांगता की समस्या खत्म हो जायेगी. कंगारु मदर केयर के माध्यम से भी बच्चों को बचाया जा सकता है. उन्होंने कहा कि अगर डाक्टर माता पिता को पहले से ही जागरुक करें तो नवजात मृत्यु दर को कम किया जा सकता है. [wpse_comments_template]
Leave a Comment