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तिलैया का केसरिया कलाकंद और बड़हिया का रसगुल्ला नहीं खाए तो खाए क्या

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जो भी लोग मिठाई के शौकीन हैं, वो झुमरीतिलैया का केसरिया कलाकंद और बड़हिया का रसगुल्ला खाए बगैर नहीं रह सकते. आपने टेस्ट किया क्या....
आनंद सिंह आप जब झारखंड">https://lagatar.in/national-herald-case-clashes-between-police-and-congress-workers-protested-by-setting-tires-on-fire-outside-ed-office/">झारखंड

की राजधानी रांची से बिहार की राजधानी पटना के लिए चलते हैं, तो बीच में एक शहर आता है. उस शहर का नाम है झुमरीतिलैया. झुमरीतिलैया यूं तो कई चीजों को लेकर फेमस है. जैसे, विविध भारती में कई सालों तक फरमाइशी गीतों को लेकर दीवानगी, अबरख को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नाम, तिलैया डैम की मनोहारी छवि आदि... लेकिन, हम जो बात आपको बताने जा रहे हैं, वह खान-पान से जुड़ा है. हम आज आपको बताने जा रहे हैं, उस केसरिया कलाकंद के बारे में जो झुमरीतिलैया की शान है. राजा हो या रंक, जो भी इस शहर में आता है, वह अगर खाने का शौकीन है तो एक बार केसरिया कलाकंद जरूर खाता है. इसे भी पढ़ें : छत्तीसगढ़">https://lagatar.in/good-news-from-chhattisgarh-rahul-trapped-in-borewell-in-janjgir-champa-for-105-hours-was-rescued/">छत्तीसगढ़

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केसरिया कलाकंद अन्य कलाकंदों से थोड़ा अलग होता है. इसमें आटा या मैदा नहीं, प्योर छेने का इस्तेमाल होता है. यह छेना भी बेहद गाढ़ा होता है, जिसमें ओरिजनल केसर का इस्तेमाल किया जाता है. इस केसर के कारण ही कलाकंद का स्वाद निराला हो जाता है. यह अन्य कलाकंदों की तरह भरभरा कर गिर नहीं जाता. यह अपने सांचे में फिट रहता है. केसर का इस्तेमाल करने से इसका रंग पीला हो जाता है. यही इसकी खुबसूरती है. 90 के दशक में केसरिया कलाकंद को लेकर जो होटल सबसे ज्यादा प्रसिद्ध था, उसका नाम है आनंद विहार. अब तो कई दुकानें खुल गई हैं. पूर्णिमा टॉकीज से लेकर पुराना बस स्टैंड और गुमो बस्ती तक केसरिया कलाकंद बेचने वाले कई दुकानदार हैं. केसरिया कलाकंद की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह मुंह में जाते ही घुल जाता है. आपको केसर के साथ-साथ केवड़े की भी खुशबू महसूस होती है. अब तो इसके निर्यात की भी बात चल रही है. वैसे, एक दौर था, जब केसरिया कलाकंद मास्को, बर्लिन आदि भी पहुंच चुका है. जो लोग मास्को और बर्लिन से आते थे, वो स्पेशली इसे ले जाते थे. अब बात करते हैं पटना से कोई 90 किलोमीटर दूर बड़हिया की. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2022/06/WhatsApp-Image-2022-06-15-at-3.50.39-PM-650x375.jpeg"

alt="तिलैया का केसरिया कलाकंद" width="650" height="375" /> तिलैया का केसरिया कलाकंदअभी हाल में बड़हिया का नाम इसलिए चर्चा में आया था, क्योंकि बड़हिया वालों ने कई ट्रेनों को रोक दिया था. उनका कहना था कि जैसे पहले ट्रेनें रूकती थीं, वैसे ही अभी भी रूकनी चाहिए. रेलवे ने जब बताया कि बड़हिया से रेवेन्यू कलेक्शन ठीक नहीं है, तो बड़हिया के कई लोगों ने इस संबंध में बकायदा आरटीआई लगा दी और आरटीआई से ये पता चला कि साल में कोई पौने दो करोड़ रुपये का रेवेन्यू रेलवे को जाता है. तमाम धरना-प्रदर्शनों के बाद इतना प्रेशर बना कि रेलवे को जितनी ट्रेनें पहले रूक रही थीं, उनमें से अधिकांश को फिर से रोकने के लिए नोटिफिकेशन जारी करना पड़ा. इसे भी पढ़ें : गृह">https://lagatar.in/announcement-of-home-ministry-agniveers-will-get-priority-in-recruitment-in-capfs-and-assam-rifles/">गृह

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लेकिन ठहरें. आपको लग रहा होगा कि हम क्यों आपको बड़हिया के रेल आंदोलन से जुड़ी बात बता रहे हैं. [caption id="attachment_332685" align="alignnone" width="750"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2022/06/WhatsApp-Image-2022-06-15-at-3.50.38-PM-750x375.jpeg"

alt="बड़हिया का रसगुल्ला " width="750" height="375" /> बड़हिया का रसगुल्ला[/caption] असलियत में इस रेल आंदोलन के पीछे 250 से ज्यादा उन रसगुल्ला दुकानदारों की बड़ी भूमिका थी, जिनका व्यापार चौपट हो रहा था. खैर...बड़हिया के रसगुल्लों की खासियत यह है कि ये साइज में बड़े होते हैं. इनका रंग गजब का होता है. एक रसगुल्ला खा लेने के बाद दूसरे रसगुल्ला के लिए आपको हिम्मत जुटानी पड़ती है. इसमें जो चीनी इस्तेमाल होती है, वह उम्दा क्वालिटी की होती है. बड़हिया में जो रसगुल्ला बनता है, वह बिहार में ही नहीं बल्कि पश्चिम बंगाल, झारखंड और उड़ीसा तक भेजा जाता है. हर राज्य में बड़हिया के रसगुल्लों की भारी डिमांड है. 80 रुपये से लेकर 250 रुपये प्रति किलो तक बड़हिया के रसगुल्ले मिलते हैं. आप अगर शुगर के पेशेंट हैं तो आपके स्पेशल ऑर्डर पर बड़हिया के रसगुल्ले बगैर चीनी के भी बनाए जा सकते हैं. इसे भी पढ़ें : नेशनल">https://lagatar.in/national-herald-case-clashes-between-police-and-congress-workers-protested-by-setting-tires-on-fire-outside-ed-office/">नेशनल

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