Search

IG विकास वैभव, जिसने बदल दी मगध जोन की पुलिसिंग, लोगों के चेहरे पर दिखता है संतोष

 

Uploaded Image

Rahul kumar Singh

 


10 जून को जब मैं गया जी की पावन धरती पर पहुंचा, तब मन में एक सहज आकांक्षा थी कि बिहार के तेजस्वी, कर्मनिष्ठ एवं जननायक पुलिस अधिकारी, मगध प्रक्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक विकास वैभव जी के साथ कम-से-कम एक घंटा संवाद करूगा.किंतु वहां पहुंचने के उपरांत जो दृश्य मैंने देखा, उसने मेरे मन-मस्तिष्क को गहराई तक उद्वेलित कर दिया और मुझे यह समझा दिया कि वास्तविक लोकसेवा क्या होती है तथा जनविश्वास किस प्रकार अर्जित किया जाता है.

शाम लगभग 5:30 बजे मैं अपने स्नेही मित्र बिनायक प्रसाद जी के साथ सिविल लाइन स्थित पुलिस महानिरीक्षक कार्यालय पहुंचा. कार्यालय की सीढ़ियां चढ़ते समय मैंने सहज भाव से कहा कि अपने सभी प्रश्न तैयार रखिए, क्योंकि विकास वैभव जी अभी भी अपने दायित्वों के निर्वहन में व्यस्त होंगे. किंतु जैसे ही हम कार्यालय के कॉरिडोर में पहुंचे, वहां का दृश्य अत्यंत मार्मिक था. सैकड़ों की संख्या में महिलाएं, बुजुर्ग, युवा और पीड़ित नागरिक न्याय की आशा लेकर अपनी बारी की प्रतीक्षा कर रहे थे. उन चेहरों पर वर्षों की पीड़ा भी थी और एक अदृश्य विश्वास भी कि उनकी बात अवश्य सुनी जाएगी.

हम भी उन्हीं लोगों के साथ उनके कक्ष में पहुंचे. वहां जो दृश्य उपस्थित था, वह प्रशासनिक दायित्व और मानवीय संवेदनशीलता का अद्भुत संगम था. प्रत्येक व्यक्ति अपनी व्यथा उसी आत्मीयता से रख रहा था, जैसे कोई पुत्र अपने पिता के समक्ष अथवा कोई नागरिक अपने संरक्षक के समक्ष रखता है. विकास वैभव जी प्रत्येक शिकायत को गंभीरता से सुन रहे थे, तत्काल संबंधित अधिकारियों को दूरभाष पर निर्देश दे रहे थे और त्वरित जांच सुनिश्चित कर रहे थे. यह क्रम लगातार लगभग सात बजे तक चलता रहा. सबसे प्रेरणादायक बात यह थी कि प्रत्येक फरियादी के चेहरे पर जाते समय संतोष की झलक दिखाई दे रही थी. न्याय मिलने से पूर्व ही उन्हें यह विश्वास मिल चुका था कि उनकी बात सुनी गई है और उस पर कार्यवाही होगी.

सभी जन-सुनवाई पूर्ण होने के उपरांत हमें उनसे विस्तृत चर्चा का अवसर प्राप्त हुआ. बातचीत के दौरान मगध प्रक्षेत्र में नक्सली गतिविधियों, साइबर अपराधों, आर्थिक अपराधों, भूमि माफियाओं तथा बालू माफियाओं के बढ़ते प्रभाव जैसे गंभीर विषयों पर विस्तार से विमर्श हुआ. चर्चा के क्रम में जहानाबाद के युवा रिशु राज के प्रकरण का भी उल्लेख हुआ, जिसने प्रशासनिक जवाबदेही और पुलिस व्यवस्था की चुनौतियों को उजागर किया.

जब इस मामले के तथ्यों पर गंभीरतापूर्वक विचार हुआ, तब यह स्पष्ट हुआ कि कुछ अधिकारियों द्वारा कर्तव्यपालन में गंभीर त्रुटियां हुई थीं.भ्रष्टाचार और विधि-विरुद्ध आचरण के आरोपों ने पुलिस व्यवस्था की साख को चुनौती दी थी.किंतु जैसे ही तथ्य उनके समक्ष आए, विकास वैभव जी ने बिना किसी दबाव अथवा पक्षपात के कठोर निर्णय लिया. दोष सिद्ध होने पर संबंधित पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया तथा तत्कालीन थानाध्यक्ष के विरुद्ध भी आवश्यक कार्रवाई हेतु निर्देश प्रदान किए गए. यह केवल प्रशासनिक निर्णय नहीं था, बल्कि यह संदेश था कि व्यवस्था में बैठे किसी भी व्यक्ति को कानून से ऊपर नहीं माना जा सकता.

मैं लगभग अट्ठाईस वर्षों से विकास वैभव जी को जानता हूं. उनके व्यक्तित्व का सबसे अद्भुत पक्ष यह है कि उनकी संवेदनाएं सदैव ईमानदार और पीड़ित लोगों के साथ खड़ी दिखाई देती हैं. किंतु जब विषय भ्रष्टाचार, अन्याय अथवा कर्तव्यच्युति का होता है, तब उनकी दृष्टि में ऐसी प्रचंडता दिखाई देती है जो किसी भी दोषी व्यक्ति के लिए चेतावनी बन जाती है. वे उन दुर्लभ अधिकारियों में से हैं जिनके भीतर करुणा और कठोरता दोनों का अद्भुत संतुलन विद्यमान है.

मगध प्रक्षेत्र की जनता आज स्वयं को अपेक्षाकृत सुरक्षित अनुभव कर रही है क्योंकि उसे यह विश्वास है कि उसके अधिकारों की रक्षा करने वाला एक सजग प्रहरी मौजूद है. इसी क्रम में विकास वैभव जी ने स्पष्ट शब्दों में संपूर्ण मगध रेंज के पुलिस अधिकारियों एवं कर्मियों को चेतावनी दी कि अनुसंधान में किसी प्रकार की लापरवाही सहन नहीं की जाएगी. विधि-विरुद्ध कार्यवाही, शक्ति का दुरुपयोग अथवा कर्तव्य के प्रति उदासीनता किसी भी स्तर पर स्वीकार्य नहीं होगी. दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी. यह केवल प्रशासनिक निर्देश नहीं, बल्कि कानून के शासन की पुनर्पुष्टि थी.

इस संपूर्ण घटनाक्रम को देखकर मेरे मन में एक गंभीर प्रश्न भी उत्पन्न हुआ. अनेक ऐसे मामले, जिनका समाधान थाना स्तर पर ही हो जाना चाहिए था, वे पुलिस महानिरीक्षक स्तर तक पहुंच रहे हैं. यह स्थिति केवल प्रशासनिक चुनौती नहीं, बल्कि आत्ममंथन का विषय है. यदि निचले स्तर पर उत्तरदायित्व और संवेदनशीलता सुनिश्चित हो जाए, तो जनता को न्याय के लिए इतनी लंबी प्रतीक्षा नहीं करनी पड़े.

मन इस विचार से भी उद्वेलित हुआ कि जिस अधिकारी की ईमानदारी, राष्ट्रनिष्ठा, प्रशासनिक दक्षता और जनसेवा की भावना निर्विवाद है, ऐसे अधिकारी को बिहार ने लगभग छह वर्षों तक अपनी पूर्ण क्षमता से कार्य करने का अवसर क्यों नहीं दिया. यह प्रश्न केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का है जो कभी-कभी अपने सर्वश्रेष्ठ प्रतिभाशाली कर्मयोगियों का समुचित उपयोग नहीं कर पाती.

आज जब समाज का एक बड़ा वर्ग निराशा, अविश्वास और नैतिक पतन के दौर से गुजर रहा है, तब विकास वैभव जैसे अधिकारी आशा के दीपस्तंभ के रूप में दिखाई देते हैं. उनका जीवन यह सिद्ध करता है कि यदि इच्छाशक्ति, ईमानदारी और राष्ट्रहित सर्वोपरि हो, तो प्रशासन केवल शासन का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का सशक्त उपकरण बन सकता है.

 


डिस्क्लेमर : लेखक राहुल कुमार सिंह "लेट्स इंस्पायर बिहार अभियान" के मुख्य समन्वयक हैं

 

 

 

 

बेहतर अनुभव व ज्यादा खबरों के लिए ऐप पर जाएं

ऐप डाउनलोड करने के लिए QR स्कैन करें
Scan QR Code
Available on App Store & Play Store
Download for Android Download for iOS

Comments

Leave a Comment

Follow us on WhatsApp

Lagatar Media

बेहतर न्यूज़ अनुभव
ब्राउज़र में ही
//