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भारत में अवैध सट्टे का कारोबार लगातार बढ़ रहा...सालाना आठ लाख करोड़ के पार...

 NewDelhi :  भारत में अवैध सट्टे का कारोबार लगातार बढ़ रहा है. पब्लिक पॉलिसी थिंक टैंक सेंटर फॉर नॉलेज सॉवरेन्टी(CKS)  की रिपोर्ट के अनुसार विभिन्न माध्यमों से इस कारोबार में लगनेवाली रकम सालाना आधार पर 100 अरब डॉलर (लगभग आठ लाख करोड़) के आसपास होने का अनुमान है. इसमें कहा गया है कि ऑफशोर गेमिंग, सट्टेबाजी और जुए के ऐप्स का प्रसार राष्ट्रीय सुरक्षा (National Security) और डेटा संप्रभुता के लिए खतरा है. ">https://lagatar.in/category/desh-videsh/">

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सेंटर फॉर नॉलेज सॉवरेन्टी ने अपने श्वेत पत्र में इसका खुलासा किया है. इसका विषय भारत में अवैध जुआ और सट्टेबाजी: जोखिम, चुनौतियां और प्रतिक्रियाएं था. यह रिपोर्ट देश में ऑनलाइन गेमिंग, जुआ और सट्टेबाजी के क्षेत्र में विदेशी कंपनियों की बढ़ती गतिविधियों से जुड़ी चिंताओं पर प्रकाश डालती है. इस रिपोर्ट को लेफ्टिनेंट जनरल विनोद जी खंडारेऔर विनीत गोयनकाफाउंडर सेक्रेटरी सीकेएस ने तैयार किया है.

पैसे का मनी लॉन्ड्रिंग-क्रिप्टो खरीद में इस्तेमाल

इस रिपोर्ट (श्वेत पत्र) में दिये गये आंकड़ें इस बात की गवाही देते हैं कि अवैध सट्टा और जुआ, भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा, वित्तीय स्थिरता और डेटा संप्रभुता पर बड़ा प्रभाव डाल रहा है. इनमें खासतौर पर अवैध सट्टेबाजी कराने वाली साइटों और विदेशी संस्थाओं से इनके संबंध, जासूसी और डेटा उल्लंघनों के बारे में चिंताएं बढ़ाने वाले है. इन ऑपरेटरों से जुड़े संदिग्ध लेन-देन का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग और क्रिप्टोकरेंसी खरीदने के लिए किया गया है, जिस कारण भारत की वित्तीय अखंडता प्रभावित हो रही है. रेग्युलेशन की कमी के कारण टैक्स के माध्यम से जुटाये जाने वाले राजस्व में भी इससे कमी आ रही है.

साइबर क्राइम में वृद्धि का बन रहा कारण  

अवैध सट्टेबाजी और जुए से जुड़ी गतिविधियों के कारण साइबर सुरक्षा के खतरों और साइबर अपराधों में  वृद्धि हुई है.  रिपोर्ट्स क अनुसार ऐसे प्लेटफॉर्मस अक्सर अपने ऑपरेशंस को छिपाने के लिए एडवांस्ड तकनीक का उपयोग करते हैं, जिससे एजेंसियों के लिए साइबर अपराधों को प्रभावी ढंग से ट्रैक करना या फिर रोकना चुनौती भरा होता ज है. CKS के फाउंडर सचिव विनीत गोयनका ने कहा कि अवैध जुए की अनियंत्रित वृद्धि भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक अखंडता के लिए एक गंभीर खतरा है. इन गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए तुरंत जरूरी कदम उठाये जाने चाहिए.

 जुए के विज्ञापन रोकने के लिए सख्त नियम बनाने की सिफारिश

 रिपोर्ट में यह निष्कर्ष भी निकाला गया है कि अवैध सट्टेबाजी और जुए में नागरिकों के बीच लत का कारण बनने और वित्तीय बर्बादी को बढ़ावा देने की क्षमता है. श्वेत पत्र में इसके सामाजिक व आर्थिक प्रभावों पर गहराई से विचार करते हुए, अवैध जुए के विज्ञापनों को रोकने के लिए सख्त नियम बनाने की सिफारिश की गयी है.
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