कार्रवाई नहीं होने से प्रशासन पर उठ रहे सवाल
Dhanbad : धनबाद कोयलांचल में अवैध लॉटरी का कारोबार तेजी से पैर पसारता जा रहा है. जिले के विभिन्न इलाकों में मुख्य सड़कों के किनारे दुकानों व अस्थायी काउंटरों पर खुलेआम लॉटरी टिकट बेचे जा रहे हैं. हैरानी की बात यह है कि कारोबारियों में पुलिस का कोई भय नजर नहीं आ रहा है और धंधा बेखौफ चल रहा है.
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस अवैध कारोबार का सबसे ज्यादा असर गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों पर पड़ रहा है. रोज कमाने-खाने वाले मजदूर और छोटे कामगार जल्दी पैसे कमाने के लालच में लॉटरी के जाल में फंसकर कर्ज और आर्थिक तंगी का शिकार हो रहे हैं. कई परिवारों की हालत बदतर हो गई है.इस मुद्दे को लेकर पहले भी लोगों ने विरोध-प्रदर्शन किया था. रणधीर वर्मा चौक पर धरना देकर प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की गई थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया.
लोगों का आरोप है कि पुलिस को गुप्त सूचना देने के बावजूद कार्रवाई नहीं होती जिससे अवैध कारोबारियों का मनोबल और बढ़ गया है. यही कारण है कि अब आम नागरिक खुलकर शिकायत करने से भी कतराने लगे हैं.
धंधे में संगठित सिंडिकेट के सक्रिय होने की चर्चा
सूत्रों के मुताबिकस, अवैध लॉटरी का यह धंधा अब संगठित सिंडिकेट के माध्यम से संचालित किया जा रहा है. हाल के महीनों में कथित तौर पर गुप्त बैठकों के जरिए जिले के अलग-अलग इलाकों में संचालन और सप्लाई की जिम्मेदारियां बांटी गई हैं. हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन कई क्षेत्रों में खुलेआम टिकटों की बिक्री से नेटवर्क के संगठित होने के संकेत मिल रहे हैं. बताया जा रहा है कि कुछ लोग प्रशासनिक स्तर पर रोक-टोक नहीं होने का दावा करते हुए बेखौफ होकर कारोबार फैला रहे हैं.
अलग-अलग क्षेत्रों में नेटवर्क
सूत्रों के अनुसार, इस धंधे में झरिया व बलियापुर क्षेत्र में एन वर्मा सक्रिय है. झरिया क्षेत्र में उसके सहयोग के लिए एस अंसारी, टी अंसारी, ए वर्मा व जी साव की टीम सक्रिय है. वहीं, निरसा में ए साव को जिम्मा दिया गया है. बाघमारा में पी सिंडिकेट को जिम्मा दिया गया है. जबकि धनबाद, गोविंदपुर के शहरी व ग्रामीण इलाकों में साव सिंडिकेट को सप्लाई और संचालन का काम सौंपा गया है. कई जगहों पर दिनदहाड़े टिकटों की बिक्री हो रही है जिससे कानून व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं.
सामाजिक कार्यकर्ताओं की चेतावनी
सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि समय रहते इस पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई तो इसका दुष्प्रभाव समाज पर और गहरा होगा. गरीब तबका आर्थिक बर्बादी की ओर धकेला जाएगा और अपराध की घटनाएं भी बढ़ सकती हैं. अब लोगों की नजर प्रशासन पर टिकी है कि वह इस अवैध कारोबार पर कब और कैसे प्रभावी शिकंजा कसता है या फिर लॉटरी सिंडिकेट इसी तरह कानून को चुनौती देता रहेगा.
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