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कोडरमा में अवैध अभ्रक खनन, तस्करी जारी, रेंजर राम बाबू फिर चर्चा में

Ranchi : वन विभाग के चर्चित रेंजर राम बाबू फिर से चर्चा में हैं. इस बार उनकी चर्चा वन्य प्राणी आश्रयणी (Wild Life Sanctuaries)  में अवैध खनन को लेकर है. कोडरमा वन्य प्राणी आश्रयणी में अभ्रक (ढिबरा) के अवैध खनन को लेकर महालेखाकार अपनी रिपोर्ट में आपत्ति कर चुका है. इसमें अवैध खनन से निकाले गये अभ्रक को विदेशों में भेजे जाने का उल्लेख किया गया था. लेकिन महालेखाकार की रिपोर्ट पर किसी तरह की कार्रवाई नहीं हुई.

 

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अवैध खनन का JIO लोकेशन

 

राम बाबू वन विभाग के इकलौते ऐसे रेंजर थे, जो 10 रेंज के प्रभारी थे. उसके पास बिरसा मुंडा चिड़ियाघर के रेंजर का भी प्रभार था. चिड़ियाघर के प्रभारी रेंजर के रूप मे वह अपने साले के कारनामों की वजह से चर्चित हुए थे. उनका साला बिरसा मुंडा चिड़ियाघर में सप्लाई का काम करता था. इस दौरान उसने चिड़ियाघर में 200 इंडेन गैस सिलिंडर के सप्लाई का बिल जमा किया. वह इंडेन का सिलिंडर सप्लाई करने के लिए अधिकृत नहीं है. क्योंकि वह इंडेन गैस का अधिकृत डीलर नहीं है. इसके बावजूद रेंजर राम बाबू ने अपने साले के बिल को सत्यापित किया. इसके बाद 1000 रुपये प्रति सिलिंडर की दर से भुगतान किया गया. हालांकि घरेलू उपयोग में लाये जाने वाले इंडेन गैस की कीमत इतनी नहीं थी. राम बाबू के साले के सप्लायर बनने और दूसरे रेंज में खुद को रेंजर के रूप में पेश करने का मामला पकड़ में आने के बाद विभाग के अधिकारियों से राम बाबू से बिरसा मुंडा चिड़ियाघर के रेंज का प्रभार वापस ले लिया.

 

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अवैध खनन का JIO लोकेशन

 

अब राम बाबू की चर्चा कोडरमा वन क्षेत्र में हो रहे अवैध खनन को लेकर हो रही है. कोडरमा वन क्षेत्र में अभ्रक का अवैध खनन हो रहा है. इससे संबंधित एक शिकायत वन विभाग को मिली है. इसमें यह आरोप लगाया गया है कि कोडरमा वन्य प्राणी आश्रयणी (Wild Life Sanctuaries) में अवैध खनन किया जा रहा है. इसमें अभ्रक, क्वार्ज सहित अन्य प्रकार के खनिज शामिल है. साथ ही अवैध खनन के मामले में राम बाबू के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की गयी है.  

 

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अवैध खनन का JIO लोकेशन

 

वन्य प्राणी आश्रयणी में किसी तरह का खनन आदि का काम पूरी तरह प्रतिबंधित है. महालेखाकार द्वारा भी कोडरमा वन क्षेत्र में अभ्रक के अवैध खनन से संबंधित रिपोर्ट विधानसभा में पेश की जा चुकी है. इसमें अवैध खनन के सहारे निकाले गये अभ्रक को कुछ कंपनियों द्वारा फिनलैंड, जर्मनी, जापान, कोरिया, चीन सहित अन्य देशों में बेचे जाने का उल्लेख किया गया था. साथ ही यह भी कहा गया था कि इस धंधे में शामिल लोग अभ्रक के अवैध खनन में बच्चों का भी इस्तेमाल करते हैं.

 

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