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अवैध बालू कारोबार फल-फूल रहा, तस्वीरें बयां कर रहीं हकीकत, मसलिया थाना प्रभारी का इनकार

Dumka News: स्थानीय सूत्रों का दावा है कि यहां से हर दिन 25 से 30 हाइवा बालू निकाली जा रही है. जेसीबी की मदद से बालू डंपरों में लोड की जाती है. इसके बाद दुमका, गुड़ियाजोरी, हिरणपुर और पाकुड़ होते हुए पश्चिम बंगाल के मालदा, बहरमपुर और फरक्का तक इसकी ढुलाई की जाती है.
 
बालू लदे हाइवा की तस्वीर

Dumka News: सिदो-कान्हू और फूलो-झानो की संघर्षभूमि में अवैध बालू कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा है. नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की रोक के बावजूद मयूराक्षी नदी से बालू के अवैध उत्खनन और परिवहन का आरोप है. दुमका के रामेश्वर के बाद अब मसानजोर थाना क्षेत्र के फूलसरिया को भी बालू सिंडिकेट का नया ठिकाना बन गया है. 

 

स्थानीय सूत्रों का दावा है कि यहां से हर दिन 25 से 30 हाइवा बालू निकाली जा रही है. जेसीबी की मदद से बालू डंपरों में लोड की जाती है. इसके बाद, इसे दो रूटों पर ले जाया जाता है. पहली रूट टोंगरा थाना होते हुए रामपुर हाट और दूसरी रूट होते हुए दुमका, गुड़ियाजोरी, हिरणपुर और पाकुड़ होते हुए पश्चिम बंगाल के मालदा, बहरमपुर और फरक्का तक इसकी ढुलाई की जाती है.

 

तस्वीरें कुछ और कह रहीं, पुलिस का दावा कुछ और

फूलसरिया इलाके से बड़े पैमाने पर बालू के उठाव की तस्वीरें सामने आई हैं. इन तस्वीरों में बालू के उत्खनन और ढुलाई का काम स्पष्ट दिख रहा है. इसके बावजूद कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं. मसलिया थाना प्रभारी से जब इस मामले में सवाल किया गया, तो उन्होंने इसे अपने थाना क्षेत्र का मामला मानने से इनकार कर दिया. ऐसे में सवाल उठता है कि अगर यह कारोबार दूसरे थाना क्षेत्र में चल रहा है, तो इसकी निगरानी और कार्रवाई की जिम्मेदारी किसकी है.


एक ट्रक बालू की कीमत 50 से 55 हजार रुपये

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, एक ट्रक बालू की कीमत 50 से 55 हजार रुपये तक बताई जा रही है. आरोप है कि इसमें करीब 30 हजार रुपये पासिंग के नाम पर लिए जाते हैं. ग्रामीणों का दावा है कि नदी घाट से निकलने वाले रास्तों पर पड़ने वाले कुछ गांवों में भी प्रति ट्रक एक से दो हजार रुपये तक दिए जाते हैं. स्थानीय सूत्रों ने बालू कारोबार के संचालन में मंडल बंधुओं के नाम भी लिए हैं. 

 

Uploaded Image

जमा किए गए बालू की तस्वीर


बंगाल के चालान पर झारखंड की बालू ढुलाई का आरोप

नाम नहीं छापने के शर्त पर बालू ढोने वाले वाहन के एक चलाक ने कहा कि रास्ते में पुलिस की गाड़ियां रहती हैं, लेकिन व्यवस्था इतना मजबूत है कि बालू लदे ट्रकों और हाइवा को नहीं रोका जाता है. साथ ही फर्जी चालान भी बालू लोड करने के दौरान पर ही मिल जाती है, जो बंगाल का होता है.
इस मामले में दुमका एसपी का पक्ष जानने के लिए कई बार फोन किया गया, लेकिन उनका आधिकारिक फोन नंबर बंद मिला. पुलिस प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी.

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