- केंद्र सरकार ने अपने तीन साल पहले जारी किये गये नोटिफिकेशन को वापस लिया
दिव्यांग, महिला व विशेष कारण वाले शिक्षकों का पहले होगा अंतर जिला तबादला
सड़क से संसद तक हुआ विरोध
2019 में सम्मेद शिखर को धार्मिक पर्यटन स्थल घोषित किया गया था, लेकिन इतने साल बाद इसका विरोध तब शुरू हुआ, जब वहां एक युवक का शराब पीता हुआ वीडियो वायरल हुआ. संसद और झारखंड विधानसभा में यह मुद्दा गूंजा. उधर, अपने तीर्थ स्थल को सुरक्षित करने के लिए झारखंड समेत पूरे देश में जैन समुदाय सड़क पर उतर गया. कुछ राजनीतिक दल भी जैन समुदाय के पक्ष में आये. कई जैन मुनियों ने आमरण अनशन भी शुरू कर दिया. इसमें जैन मुनि सुज्ञेयसागर महाराज ने मंगलवार को प्राण भी त्याग दिया.समझिये विवाद की क्रोनोलॉजी को
26 फरवरी 2019 को तत्कालीन रघुवर सरकार ने एक गजट नोटिफिकेशन जारी किया था, जिसमें राज्यभर के धार्मिक स्थलों को पर्यटक स्थल घोषित किया गया था. इसमें गिरिडीह के पारसनाथ, मधुबन का भी उल्लेख था. इसके बाद 2 अगस्त 2019 को भारत सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने एक गजट जारी किया, जिसमें इसे वन्य जीव अभयारण्य, इको सेंसेटिव जोन पर्यटन स्थल के रूप में चिन्हित किया गया. इसके बाद 2021 में हेमंत सरकार ने नई पर्यटन नीति घोषित की, जिसका गजट नोटिफिकेशन 17 फरवरी 2022 को जारी हुआ. इसमें पारसनाथ को धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में चिन्हित किया गया है. इस नोटिफिकेशन में धर्मस्थल की पवित्रता बरकरार रखते हुए इसके विकास की बात कही गई है. जैन समाज पारसनाथ को पर्यटन स्थल घोषित करने वाले इन सभी नोटिफिकेशन का विरोध कर रहा था और इन सब नोटिफिकेशन को वापस लेकर सम्मेद शिखर को सिर्फ धार्मिक स्थल घोषित करने की मांग कर रहा था.ऐसे हुआ विवाद का हल
इस विवाद का सुलझाने के लिए केंद्र और राज्य दोनों सरकारों की ओर से पहल की गई. झारखंड सरकार ने केंद्र सरकार को पत्र भेजकर 2 अगस्त 2019 की अधिसूचना पर विचार करने का आग्रह किया. वहीं केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने जैन समाज के पदाधिकारियों के साथ बैठक की. इसके बाद वहां पर्यटन की गतिविधियों पर रोक लगा दी गई. इस मामले को लेकर केंद्र सरकार ने एक समिति भी बनाई है, जिसमें राज्य सरकार को जैन समुदाय से दो और जनजातीय समुदाय से एक सदस्य को शामिल करने को कहा गया है.आदिवासियों ने कर दिया है सम्मेद शिखर पर दावा
सम्मेद शिखर को पर्यटन स्थल से धार्मिक स्थल घोषित करने का मामला तो फिलहाल सुलझ गया है, लेकिन विवाद अभी और भी है. दरअसल सम्मेद शिखर पर संथाल आदिवासियों ने अपना दावा कर दिया है. आदिवासियों का दावा है कि यह संथाल आदिवासियों का मरांग बुरू तीर्थ स्थल है. इसलिए झारखंड और केंद्र सरकार इसे संथालियों का तीर्थ स्थल घोषित करे, नहीं तो देश स्तर पर आंदोलन किया जाएगा. 17 जनवरी से आंदोलन शुरू करने का एलान किया गया है. 5 राज्यों के 50 जिलों में एक साथ धरना-प्रदर्शन के बाद भारत बंद की भी घोषणा की जाएगी. इसे भी पढ़ें – कल्याणकारी">https://lagatar.in/welfare-schemes-are-being-implemented-on-the-ground-not-on-papers-and-files-hemant-soren/">कल्याणकारीयोजनाएं कागजों और फाइलों में नहीं, धरातल पर उतारा जा रहा : हेमंत सोरेन [wpse_comments_template]

Leave a Comment