झारखंड में ED की बढ़ती दबिश, एक साल में 151 जगहों पर छापेमारी, 2 IAS समेत 16 गिरफ्तार
इन वर्षों में इतने मामले सुलझे
वर्ष 2017-18 : 3783 मामले मध्यस्थता के लिए आए, जिनमें से 1746 मामलों में दोनों पक्षों की आपसी सहमति से मामला सुलझा लिया गया. जबकि 352 केस ऐसे रहे जिसमें मध्यस्थता नहीं हो पायी. वर्ष 2018-19 : मात्र 468 मामले मध्यस्थता के लिए आए, जिनमें से 287 मामलों में दोनों पक्षों की आपसी सहमति से मामला सुलझा लिया गया. जबकि 19 केस ऐसे रहे जिसमें मध्यस्थता नहीं हो पायी. वर्ष 2019-20 : 2259 मामले मध्यस्थता के लिए आए, जिनमें से 1079 मामलों में दोनों पक्षों की आपसी सहमति से मामला सुलझा लिया गया. जबकि 125 केस ऐसे रहे, जिसमें मध्यस्थता नहीं हो पायी. वर्ष 2020-21 : 1962 मामले मध्यस्थता के लिए आए, जिनमें से 846 मामलों में दोनों पक्षों की आपसी सहमति से मामला सुलझा लिया गया. जबकि 20 केस ऐसे रहे, जिसमें मध्यस्थता नहीं हो पायी. वर्ष 2021-22 : 3151 मामले मध्यस्थता के लिए आए, जिनमें से 1467 मामले दोनों पक्षों की आपसी सहमति से मामला सुलझा लिया गया. जबकि 134 केस ऐसे रहे जिसमें मध्यस्थता नहीं हो पायी. इसे भी पढ़ें -झारखंड">https://lagatar.in/corona-slows-down-in-jharkhand-5-new-patients-found-in-24-hours-19-recover/">झारखंडमें कोरोना संक्रमण की रफ्तार हुई कम, 24 घंटे में 5 नये मरीज मिले, 19 हुए स्वस्थ [wpse_comments_template]

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