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धनबाद में प्रधानाध्यापकों के सभी 237 पद खाली, शिक्षक भी आधे

 
Neeraj kumar  Dhanbad : जिले में शिक्षकों के लगभग आधे पद खाली हैं. यहां 1795 प्राथमिक और मध्य विद्यालय हैं, जिनमें 4608 पद शिक्षकों के और 237 पद प्रधानाध्यापकों के लिए स्वीकृत है. लेकिन, वर्तमान में इंटर प्रशिक्षित शिक्षकों के 2500 शिक्षक कार्यरत हैं. इनमें स्नातक प्रशिक्षित शिक्षकों की संख्या जोड़ दें तो यह आंकड़ा 2789 होता है. इसके बाद भी जिले में शिक्षकों के लगभग 1819 पद खाली हैं. प्रधानाध्यापकों के सभी स्वीकृत यानी 237 पद खाली है. जिले के सभी प्राथमिक और मध्य विद्यालय प्रभारियों के भरोसे हैं. जिले के अंतिम प्रधानाध्यापक त्रिपुरारी सिंह चौधरी कोला कुसमा प्राथमिक विद्यालय से फरवरी 2021 में सेवानिवृत्त हो चुके हैं.

 711 की जगह हैं 289 शिक्षक

जिले के 1795 प्राथमिक और मध्य विद्यालयों में स्नातक प्रशिक्षित शिक्षकों के 711 पद स्वीकृत हैं,  जिनमें से 289 पद नई नियुक्ति से भरना था. वर्ष 2019 में हुई अंतिम नियुक्ति में इसमें से यह पद भर लिया गया. अब भी जिले के स्कूलों में स्नातक प्रशिक्षित के 422 पद खाली हैं. जिले के प्राथमिक व मध्य विद्यालयों में लगभग ढाई लाख विद्यार्थी हैं. ऐसे में 1:35 (35 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक) के अनुपात के अनुसार जिले के प्राथमिक और मध्य विद्यालयों को मिलाकर कुल 7143 शिक्षक होने चाहिए. इसके अलावा 237 प्रधानाध्यापकों की नियुक्ति होनी चाहिए. लेकिन वर्तमान में जिले में कार्यरत 2789 शिक्षकों में से 237 को विभिन्न विद्यालयों में प्रभारी को जिम्मेवारी दी गई है, जिससे कक्षा लेने वाले शिक्षकों की संख्या घटकर 2552 रह गयी है. 1795 प्राथमिक तथा मध्य विद्यालयों में कुल ढाई लाख विद्यार्थित के लिए शिक्षण कार्य में लगे शिक्षकों की संख्या 2552 है. ऐसे में वर्तमान में छात्र-शिक्षक अनुपात 97 छात्र पर एक शिक्षक हो गया है. यह तय अनुपात से लगभग तीन गुना है.

 विभाग प्रतिमाह बचा रहा 6 करोड़ रुपया

प्रभारी या वरीय शिक्षकों का वेतन 4200-4600 पे ग्रेड पर आधारित होता है. प्रधानाध्यापकों को 4800-5400 का पे ग्रेड मिलता है. इससे दोनों के `इन हैंड` वेतन में लगभग 10 हज़ार रूपए का अंतर आता है. ऐसे में विभाग को प्रधानाध्यापक के स्थान पर प्रभारी नियुक्त करने से प्रतिमाह 23 लाख रुपया की बचत होती है. स्नातक प्रशिक्षित शिक्षकों का वेतन इंटर प्रशिक्षित शिक्षकों से लगभग पांच हज़ार रूपया अधिक होता है. ऐसे में विभाग प्रोन्नति रोक कर और 422 पद खाली रखकर 21 लाख रुपया प्रतिमाह की बचत करता है. विभाग द्वारा स्वीकृत शिक्षकों के पद 4608 है जबकि 1819 शिक्षकों के खाली पद के कारण (शिक्षकों का औसत वेतन 30 हज़ार रूपया माने तो) विभाग को पांच करोड़ 45 लाख रुपया की बचत होती है. यह भी पढ़ें : मुख्यमंत्री">https://lagatar.in/dhanbad-on-the-arrival-of-the-chief-minister-the-police-postponed-the-dharna/">मुख्यमंत्री

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