Search

Advertisement
Advertisement
Advertisement

हेमंत राज में सिर्फ रांची में हुई 10 हजार करोड़ से अधिक की लूटः बाबूलाल मरांडी

Ranchi : पूर्व सीएम बाबूलाल मरांडी के मुताबिक रांची में 10 हजार करोड़ से भी अधिक के जमीन लूट का खेला हुआ है. सोशल मीडिया के जरिए उन्होंने प्रवर्तन निदेशालय (ED) को जमीन महाघोटाले की गहराई से जांच करने मांग की है. बाबूलाल ने ट्वीट कर दावा किया है कि अगर रांची जमीन के गोरखधंधे के षड्यंत्र की गहराई से जांच होगी, तो साहिबगंज का चर्चित 1000 करोड़ का पत्थर खदान लूट घोटाला इसके सामने बौना दिखने लगेगा. रांची जमीन घोटाले में 10,000 करोड़ से भी ज्यादा का घोटाला हुआ है. प्रवर्तन निदेशालय निदेशक को जमीन महाघोटाले में कई अहम बिंदुओं पर जवाबदेह लोगों से विस्तार से पूछताछ करनी चाहिये. उन्होंने कहा कि पर्दे के पीछे रिमोट कंट्रोल से इस धंधे में शामिल चेहरों को भी बेनकाब करना होगा. उनकी गर्दन पकड़नी होगी, जिनके चलते आज झारखंड की देश-दुनिया में बदनामी हो रही है. इसे भी पढ़ें - हेमंत">https://lagatar.in/4-biharis-have-surrounded-hemant-soren-from-where-will-the-development-of-tribal-natives-come-lobin/">हेमंत

सोरेन को 4 बिहारी घेरे रखे हैं, कहां से होगा आदिवासी-मूलवासी का विकास : लोबिन

सत्ता के संरक्षण में गड़बड़ी

https://twitter.com/yourBabulal/status/1650076887153250304

बाबूलाल मरांडी ने कहा है हेमंत राज में रांची में हुए जमीन महाघोटाले के बारे में कई लोगों से उन्होंने बातचीत की. इस गोरखधंधे के बारे में विस्तार से समझने का प्रयास किया है. सत्ता के संरक्षण में दलालों, कुछ धन लोभी प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों ने मिलकर भ्रष्टाचार का ऐसा काम किया है, जिसकी गूंज लम्बे समय तक सुनायी देगी. इसकी जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी, वैसे-वैसे कई बड़े सरकारी-गैर सरकारी लुटेरे लाईन लगाकर जेल जाते देखे जायेंगे. लोग कहते है कि हेमंत सरकार बनने के चंद महीने बाद ही कोविड लॉकडाउन लग गया. सरकारी-ग़ैर सरकारी कामकाज, रोज़गार ठप्प पड़ गये. बेईमानों ने इस अवधि में इजी मनी मेकिंग का सबसे आसान रास्ता जमीन की हेराफेरी को बनाया. रांची में इस गोरखधंधे को अच्छे से चलाने के लिये “सर्टिफाइड भ्रष्ट” अफसर की प्रेम से खोज हुई.कोडरमा में सरकारी गाछ तक कटवा कर बेच खाने के मामले में हाईकोर्ट से जमानत प्राप्त चार्जशीटेड आईएएस छवि रंजन को इस “काम” के लिये सही आदमी समझ कर लाया गया. “ तुम मन माफ़िक़ धंधा चलाओ-बदले में गाछ काटने के केस से बचाने में मदद लो.” इस तर्ज़ पर ज़मीन लूट योजना का नियंत्रण और डायरेक्शन सत्ता के मशहूर उस दलाल ने संभाला, जो अभी जेल में बंद है.

 सरकार का पहला शिकार

बाबूलाल ने कहा पहला शिकार मेडिका अस्पताल के बगल वाली जमीन को बनाया गया. भारी संख्या में पुलिस के बल पर ज़मीन क़ब्ज़ा करवाया गया. मुझे यह भी बताया जा रहा है कि इस गोरखधंधे को अंजाम देने के लिये दो सीनियर अफ़सरों ने तो उस दिन छुट्टी लेकर जमीन कब्जाने का नियंत्रण किया, ताकि हंगामा हो, लोग पूछताछ करें तो बता सकें कि वे तो छुट्टी पर हैं, कुछ पता ही नहीं है. इस जमीन क़ब्ज़ाने की योजना की सफलता से इन बेईमानों का मनोबल इतना बढ़ गया कि इन लोगों ने कागजातों में हेराफेरी कर जमीन क़ब्ज़ाने के धंधे को मोटी कमाई का जरिया ही बना लिया. कोविड जैसे संकट के बाद भी नियम के विपरीत इस गिरोह ने रात में पुलिस लाईन से बसों में ठूंस कर ले जाये गये फोर्स के साथ जमीन क़ब्ज़ाने में आतंक का राज कायम कर दिया.

पुलिस बल के दम बजरा की जमीन पर कब्जा

बजरा की जमीन भी इनके निशाने पर रहा. 75 सालों की लगान रसीद एक दिन में काटकर भारी संख्या में पुलिस के दम पर दिन-रात जमीन क़ब्ज़ा कराने का ऐसा काम हुआ, जिसकी दूसरी मिसाल नहीं मिल सकती. हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन के अंधा कानून की इस कारवाई को अभी रद्द कर दिया है. ज़मीन के विवाद में जांच या कब्जा के लिये रात में पुलिस को भेजने का नियम नहीं है. लेकिन कई ऐसे वीडियो हमें देखने को मिला है, जिसमें रात में पुलिस लाइन से बसों में भरकर पंहुचे फोर्स और अफसर आतंक क़ायम करने के लिये गेट तोड़कर कई जगहों पर घुसने का प्रयास करते देखे जा सकते हैं. बाबूलाल मरांडी ने कहा सुना है कि “जमीन लूटो” गोरखधंधा रात में इसलिये किया जाता था कि पब्लिक की भीड़ और हंगामा न हो. कम से कम पत्रकार मौके पर पंहुचे. पीड़ित पक्ष अगर फरियाद लेकर किसी जनप्रतिनिधि के माध्यम से सीनियर अफसरों से सम्पर्क करना चाहें तो, रात का बहाना बना कर कोई अफसर मिले ही नहीं. और दिन के उजाले से पहले गोरखधंधा हो जाये.

राज्य की जनता को मुख्यमंत्री को जवाब देना चाहिए

बाबूलाल मरांडी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट के जारिए पूछा है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को बताना चाहिए कि ये सब काम किसके आदेश पर, किसके सह पर होता था? क्या ये संभव है कि बिना मुख्यमंत्री की जानकारी के राज्य की राजधानी में इतना बड़ा गोरखधंधा हो जाये? ये कैसे संभव है कि कोई अफसर ऐसे धंधों को अंजाम देने के लिये किसी दलाल से सीधे डायरेक्शन ले और अपने किये की रिपोर्ट दलाल को ही करे? प्रवर्तन निदेशालय के निदेशक को जमीन महाघोटाले में रिमोट कंट्रोल से इस धंधे में शामिल चेहरों को भी बेनकाब कर उनकी गर्दन पकड़नी चाहिए, जिनके चलते आज झारखंड की देश-दुनियां में बदनामी हो रही है. इसे भी पढ़ें - अंगकिता">https://lagatar.in/angkita-dutta-exploitation-case-assam-police-reached-bengaluru-to-arrest-youth-congress-president-bv-srinivas/">अंगकिता

दत्ता शोषण मामला : युवा कांग्रेस अध्यक्ष बीवी श्रीनिवास को गिरफ्तार करने बेंगलुरु पहुंची असम पुलिस
[wpse_comments_template]  

Comments

Leave a Comment

Follow us on WhatsApp

Lagatar Media

Lagatar Media App
बेहतर न्यूज़ अनुभव
Lagatar Media App
ब्राउज़र में ही