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धनबाद के कई गांवों में सभी चापाकल खराब, कैसे बुझेगी प्यास

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Dhanbad : धनबाद के ग्रामीण क्षेत्रों में सभी चापाकल बेकार पड़े हैं. इन चापाकलों की अब मरम्मत भी नहीं हो सकती. ऐसे चापाकलों की संख्या दिन ब दिन बढ़ती जा रही है. पिछले 3 वर्षों से सरकार ने इस पर कोई काम नहीं किया. जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में जहां 3 वर्ष पूर्व ऐसे चापाकलों (एसआर) की संख्या 364 थी, जो अब बढ़कर 500 पहुंच गई है. हालत यह है कि गांवों में पानी की समस्या का कोई निदान नहीं दिखाई देता.

     चार पंचायतों में 46 चापाकल पूरी तरह डेड

लगातार की टीम ने गोविंपुर के लगभग 4 पंचायतों का जायजा लिया. गोविंदपुर के आसनबनी पंचायत का खिल कनाली गांव,  बारियो पंचायत का मांझी टोला, जियालगढ़ा पंचायत का कौआ बांध, हिंद होटल इलाका के अलावा भितिया पंचायत की कांड्रा बस्ती में लगभग 46 चापाकल पूरी तरह डेड पाये गए. इन चापाकलों की अब मरम्मत नहीं हो सकती. ग्रामीणों ने बताया कि यहां मरम्मत के नाम पर सिर्फ लीपापोती होती है.

    आसनबनी पंचायत में 10 चापाकल खराब

आसनबनी पंचायत में खेल कनाली गांव के सरजू मंडल ने बताया कि उनके गांव में लगभग 10 से भी अधिक चापाकल विगत चार-पांच वर्षों से खराब पड़े हैं. वे अब बनने लायक  भी नहीं रहे. गांव में सिर्फ दो या तीन ही ऐसे चापाकल हैं, जिनसे गांव के लोग अपनी प्यास बड़ी मुश्किल से बुझा पाते हैं.

    दो हजार की आबादी चार चापाकलों के भरोसे

भितिया पंचायत की कांड्रा बस्ती के रामप्रवेश महतो ने बताया कि बस्ती की जनसंख्या लगभग 2000 (दो हजार) है, लेकिन पीने योग्य शुद्ध जल की काफी कमी है. कुछ वर्ष पूर्व यहां मुखिया ने सोलर टैंक लगाया था. परंतु अब वे खराब पड़े हैं. कई तो अपनी जगह पर दिखाई भी नहीं दे रहे. लगभग 14 में 10 चापाकल पूरी तरह सूख चुके हैं. अब इतनी बड़ी आबादी पीने योग्य पानी के लिए सिर्फ चार चापाकलों पर निर्भर है.

                      क्या कहते हैं अधिकारी

[caption id="attachment_283832" align="aligncenter" width="300"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2022/04/bheekh-ram-300x160.jpeg"

alt="" width="300" height="160" /> कार्यपालक अभियंता भीख राम भगत[/caption] पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल 2 के कार्यपालक अभियंता भीख राम भगत ने बताया कि उनके डिवीजन के अंदर पिछले वर्ष किए गए सर्वे के आधार पर 364  एस आर चापाकल थे, जिनकी संख्या बढ़कर लगभग 500 हो चुकी है. 3 वर्ष से इन एसआर चापाकलों पर कोई काम नहीं हुआ. इस वर्ष संभावना बन रही है कि सरकार की तरफ से एसआर पर काम होगा. ट्यूबवेल, जो कि डेड हो चुके हैं उन्हें एसआर ( स्ट्रक्चर रीलोकेट ) करते हुए नया चापाकल लगाएंगे. फिलहाल एसआर के लिए विभाग की तरफ से चिट्ठी भेज दी गई है. यह भी पढ़ें :  रांची-दुमका-रांची">https://lagatar.in/ranchi-dumka-ranchi-express-from-9th-april-to-godda/">रांची-दुमका-रांची

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