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सीएम ने दी अभियोजन की स्वीकृतिः 2011-12 के दौरान ऊर्जा विभाग में भ्रष्टाचार का मामला

Ranchi: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 2011-12 के दौरान ऊर्जा विभाग में हुए भ्रष्टाचार के मामले में अभियोजन की स्वीकृति दी है. 2.5 करोड़ रुपये के कार्य को 20.87 करोड़ में भेल को दिये जाने का यह मामला है. जिसमें प्राथमिक अभियुक्त राज्य विद्युत बोर्ड के तात्कालीक अध्यक्ष शिवेन्द्र नाथ वर्मा और राज्य विद्युत बोर्ड के तात्कालीन सदस्य (वित्त) के खिलाफ सीबीआई और एसीबी ने प्राथमिकी दर्ज की थी. इसे भी पढ़ें-देवघर">https://lagatar.in/deoghar-raghuvar-das-inspected-the-airport/">देवघर

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2.5 करोड़ के काम को 20.87 करोड़ में भेल को दिया था

प्राथमिकी अभियुक्तों पर आरोप है कि इन्होंने 2011-2012 में झारखंड राज्य विद्युत बोर्ड, भारत हेवी इलेक्ट्रीक्लस लिमिटेड (भेल), भोपाल एवं मेसर्स नॉर्दन पावर इरेक्टर लिमिटेड (एनपीईएल) के पदाधिकारियों के साथ मिलीभगत कर बेईमानी से स्वर्णरेखा हाइड्रो इलेक्ट्रसिटी प्रोजेक्ट (सिकीदरी) की मरम्मती एवं रख-रखाव के लिए मनोनयन के आधार पर 2.5 करोड़ रुपये के कार्य को बहुत ही ऊंचे दर 20.87 करोड़ रुपये में भेल को दे दिया.

शर्तों का उल्लंघन करते हुए हुआ था भुगतान

आरोप है कि राज्य विद्युत बोर्ड के पदाधिकारियों ने बेईमानी से भेल के द्वारा निर्धारित शर्तों का उल्लंघन करते हुए भुगतान कर दिया. साथ ही भेल, भोपाल के पदाधिकारियों ने बेईमानी से प्रोजेक्ट के मरम्मती एवं रख-रखाव से संबंधित कार्य को मेसर्स नॉर्दन पावर के साथ 15.32 करोड़ रूपये में सबलेट/कॉन्ट्रैक्ट कर लिया. यह कॉन्ट्रैक्ट सीवीसी के नियमों के विरुद्ध था. इसे भी पढ़ें-हर">https://lagatar.in/hidden-agenda-in-every-news-it-is-necessary-to-save-democracy-and-constitution-in-critical-situation-hemant/">हर

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वहीं मेसर्स नॉर्दन पावर ने उस कार्य को 5.55 करोड़ रुपये की लागत पर निष्पादित कर दिया. इस तरह भेल,भोपाल एवं मेसर्स नॉर्दन पावर इरेक्टर लिमिटेड द्वारा खराब गुणवत्ता के कार्य करने और देर से काम पूरा करने के कारण झारखंड राज्य विद्युत बोर्ड को वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा था. [wpse_comments_template]  

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