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DGP नियुक्ति मामले में 10 राज्यों में से छह ने सुप्रीम कोर्ट के कारण बताओ नोटिस का जवाब नहीं दिया

Ranchi: डीजीपी पद पर नियुक्ति के मामले में झारखंड समेत छह राज्यों ने सुप्रीम कोर्ट के कारण बताओ नोटिस का जवाब नहीं दिया. राज्यों को 19 मई को जवाब देना था. जिन राज्यों ने कारण बताओ नोटिस का जवाब दिया है, उनमें मणिपुर, अरूणाचल प्रदेश व छत्तीसगढ़ शामिल है. जबकि जवाब नहीं देने वाले राज्यों में झारखंड, पंजाब, गोवा, मिजोरम समेत छह राज्य शामिल हैं.

 

जानकारी के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने UPSC की अनुशंसा से अलग या कार्यकारी DGP नियुक्त करने के मामले में झारखंड सहित 10 राज्यों को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब देने का निर्देश दिया था. UPSC के वकील द्वारा कोर्ट में DGP नियुक्ति के सिलसिले में दी गई जानकारी के बाद यह निर्देश दिया गया था. 

 

न्यायालय के निर्देश के आलोक में झारखंड, छत्तीसगढ़, पंजाब, मणिपुर, अरूणाचल प्रदेश, गोवा, मिजोरम और उत्तर प्रदेश समेत दस राज्यों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था. इन राज्यों को 19-5-2026 से पहले शपथ पत्र के माध्यम से जवाब देना था. निर्धारित तिथि से पहले तक सिर्फ चार राज्यों ने शपथ पत्र दायर कर अपना पक्ष पेश किया. इन राज्यों में मणिपुर, उत्तर प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश और छत्तीसगढ़ का नाम शामिल है. 

 

झारखंड सहित छह राज्यों ने न्यायालय के निर्देश के आलोक में निर्धारित समय सीमा के अंदर शपथ पत्र दायर नहीं किया. UPSC के वकील ने सुप्रीम कोर्ट में DGP के मामले में राज्यों द्वारा सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों का उल्लंघन किये जाने की जानकारी दी थी. इसके बाद न्यायालय ने संबंधित राज्यों को कारण बताओ नोटिस जारी करने का निर्देश दिया था. साथ ही Amicus Curiae और UPSC के वकील को अपना-अपना शपथ पत्र देने का निर्देश दिया था.

 

न्यायालय द्वारा दिये गये निर्देश के आलोक में झारखंड और उत्तर प्रदेश सरकार को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था. झारखंड और उत्तर प्रदेश सरकार को शपथ पत्र दायर कर यह बताना था कि इन राज्यों ने DGP की नियुक्ति के लिए UPSC को अधिकारियों की सूची क्यों नहीं भेजी. लेकिन झारखंड और उत्तर प्रदेश ने निर्धारित समय सीमा तक सुप्रीम कोर्ट में शपथ पत्र दायर कर अपना पक्ष नहीं पेश किया है.

 

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के अधिवक्ता द्वारा न्यायालय को जानकारी दी गयी थी कि छत्तीसगढ़ में नियमित DGP की नियुक्ति नहीं हुई है. वहां Acting DGP काम कर रहे हैं. UPSC द्वारा 13 जुलाई 2025 को ही तीन अधिकारियों के नामों की एक सूची भेजी गयी थी. लेकिन सरकार ने इस पैनल से DGP की नियुक्ति नहीं की है. न्यायालय ने इसे गंभीरता से लेते हुए छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव को कारण बताओ नोटिस भेजने का निर्देश दिया. साथ ही यह भी जानना चाहा कि अब तक कार्यकारी डीजीपी को काम करने से क्यों नहीं रोका गया.

 

छत्तीसगढ़ के अधिवक्ता ने इस मुद्दे पर जवाब देने के लिए छह सप्ताह का समय मांगा था. न्यायालय ने छह सप्ताह का समय देते हुए 19-5-20206 के पहले तक जवाब देने का समय दिया था. छत्तीसगढ़ ने इस समय सीमा के अंदर अपना जवाब दाखिल कर दिया है.

 

UPSC के वकील द्वारा दी गयी जानकारी के आधार पर पंजाब, मणिपुर, अरूणाचल प्रदेश, गोवा, मिजोरम को भी नोटिस जारी किया गया था. इन्हें यह बताने को कहा गया था कि प्रकाश सिंह मामले में न्यायालय द्वारा दिये गये निर्देश के आलोक में कोई नियम बनाये बिना ही UPSC  द्वारा अनुशंसित पैनल से अलग DGP को कैसे नियुक्त किया गया. क्यों नहीं इस मामले में अवमानना की कार्रवाही की जाये.  

 

न्यायालय द्वारा जारी किये गये कारण बताओ नोटिस के आलोक में इसमें से सिर्फ मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश ने ही शपथ पत्र के माध्यम से अपना पक्ष पेश किया है. न्यायालय ने UPSC की ओर से दी गयी सूचनाओं के आलोक में हिमाचल प्रदेश को भी कारण बताओ नोटिस जारी का निर्देश दिया था. हिमाचल प्रदेश को यह बताने के लिए कहा गया था कि UPSC द्वारा भेजे गये पत्रों के आलोक में राज्य ने आगे की कार्रवाई क्यों नहीं की. हिमाचल प्रदेश के वकील ने जवाब देने के लिए छह सप्ताह का समय मांगा था. न्यायालय ने इस मांग को मंजूर कर लिया था.

 

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