- अपने गांव की मिट्टी से उठकर आनंद डेविड खलखो बने रांची महाधर्मप्रांत के सहायक बिशप
Ranchi News : मांडर की धरती एक बार फिर आस्था, विश्वास और आध्यात्मिक उल्लास से अभिभूत रही. रांची महाधर्मप्रांत के नवनियुक्त सहायक बिशप आनंद डेविड खलखो के अपने गृह पल्ली संत अलोइस चर्च पहुंचने पर विश्वासियों ने उनका भावपूर्ण स्वागत किया. इस अवसर पर विशेष पवित्र मिस्सा का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों फादर, सिस्टर और विश्वासी उपस्थित रहे.
पवित्र मिस्सा के दौरान फादर शैलेंद्र टोप्पो ने बिशप आनंद डेविड खलखो के जीवन, पारिवारिक पृष्ठभूमि और पुरोहिताई यात्रा पर प्रकाश डाला. उन्होंने बताया कि बिशप आनंद का जन्म 20 नवंबर 1975 को मांडर पल्ली के ख्रीस्त कॉलोनी गांव में हुआ था. धार्मिक संस्कारों से जुड़े परिवार में पले-बढ़े आनंद डेविड ने बचपन से ही ईश्वर और कलीसिया की सेवा के प्रति समर्पण का भाव विकसित किया.

सहायक बिशप ने विश्वासियों को दिया आशीर्वाद
सात भाई-बहनों में चौथे, परिवार से मिला सेवा का संस्कार
आनंद डेविड खलखो सात भाई-बहनों में चौथे स्थान पर हैं. उनके पिता स्वर्गीय तरसिसियुस खलखो ठेकेदार थे. जबकि माता सिब्रिया तिग्गा धर्मनिष्ठ गृहिणी हैं. उनकी बड़ी बहन सिस्टर मार्था और छोटी बहन सिस्टर पुनीता भी धर्म समाज से जुड़कर कलीसिया की सेवा कर रही हैं.
प्रारंभिक शिक्षा मांडर से प्राप्त करने के बाद उन्होंने 1990 से 1994 तक संत इग्नास हाई स्कूल, गुमला में शिक्षा ग्रहण की. इसके बाद उन्होंने कलीसिया की सेवा के लिए अपना जीवन समर्पित करने का निर्णय लिया. उन्होंने संत जॉन बियानी माइनर सेमिनरी, कोलकाता में अध्ययन किया और संत अल्बर्ट्स कॉलेज, रांची से दर्शनशास्त्र की शिक्षा प्राप्त की.
ईश्वरीय विनती से गूंजा चर्च, विश्वासियों में दिखा आध्यात्मिक उत्साह
पवित्र मिस्सा के दौरान ईश्वरीय गीतों और मधुर संगीत से संत अलोइस चर्च का वातावरण आध्यात्मिक हो उठा. विश्वासियों ने प्रार्थना और गीतों के माध्यम से नए सहायक बिशप के लिए ईश्वर से आशीष की कामना की. इस अवसर पर पल्ली पुरोहित फादर बिपिन कंडूलना, फादर शैलेंद्र टोप्पो, फादर सीजो सहित अन्य फादर, सिस्टर और बड़ी संख्या में विश्वासी उपस्थित रहे.
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