मामले पर “आप” कार्यकर्ताओं का बीजेपी कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन
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चलो देश बचाने चलते हैं...
मैं धरती हूं... झारखंड की मेरा चीरहरण रहा होए, मुझे तस्कर कपटी लूट रहे अब मुझे बचाव कोए... अंत में उन्होंने अपनी पुस्तक की आखिरी लाइन सुनाते हुए कहा- चलो देश बचाने चलते हैं रूठों को मानने चलते हैं... कोई कड़वे बोल भी लिखता है, वो पागल शायर दिखता है ! वो किस मिट्टी का जन्मा है न डरता है न बिकता है, वो देश प्रेमी गद्दार नहीं उसे मीत बनाने चलते हैं. चलो देश बचाने चलते हैं.... कवियित्री मीना बंधन ने अपने मधुर कविता ``साथ मिलजुल के कुछ अब नया हम करें `` वेवफा दोस्तों से वफा हम करें. कितने खामोश नजर आते हो, दिल के हर जख्म को छुपाते हो... के साथ श्रोताओं का मनोरंजन कराया. कार्यक्रम में आये सभी कवियों ने एक से बढ़कर एक नग्में सुनाये, जिसे सुन कार्यक्रम स्थल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा. कार्यक्रम का संचालन चंद्रिका ठाकुर देश दीप रांची, अभिनव कुमार मिश्रा औरंगाबाद ने संयुक्त रूप से किया. दोनों ही संचालनकर्ताओं ने एक से बढ़कर एक चुटकुले सुनाकर दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया. इसे भी पढ़ें:यादव">https://lagatar.in/yadav-mahasabha-completes-100-years-meeting-decided-to-celebrate-centenary-year-many-demands-discussed/">यादवमहासभा के 100 वर्ष पूरे, बैठक कर शताब्दी वर्ष मनाने का निर्णय, कई मांगों पर भी हुई चर्चा [wpse_comments_template]

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