Ranchi : आयकर विभाग को अपनी गलती से चर्चित कोयला व्यापारी एलबी सिंह का जब्त किया गया 100 करोड़ रुपये छोड़ना पड़ा. यह गलती आयकर विभाग (सेंट्ररल रेंज-2) के तत्कालीन अपर आयकर आयुक्त (Addl.CIT) अभिषेक कुमार ने की थी. उन्होंने मूल्यांकन पदाधिकारी (AO- Assessing Officer) की रिपोर्ट पर उसी दिन अपनी सहमति दे कर की थी, जिस दिन उन्हें रिपोर्ट भेजी गयी थी. इसी प्रमुख गलती की वजह से आयकर ट्रिब्यूनल ने Assessment Order को खारिज कर दिया. विभाग ने यह गलती जानबूझ कर की थी या नहीं. यह जांच का विषय हो सकता है.
आयकर विभाग की अनुसंधान शाखा द्वारा नवंबर 2011 में की गयी छापेमारी के दौरान 100 करोड़ रुपये जब्त किया गया था. साथ व्यापारिक गतिविधियों से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज भी जब्त किये गये. आयकर विभाग की अनुसंधान शाखा द्वारा छापेमारी के बाद तैयार की गयी रिपोर्ट के आलोक में चर्चित कोयला व्यापारी एलबी सिंह, कुंभ नाथ सिंह और भरत का कर निर्धारण के लिए मूल्यांकन (Assessment) किया गया.
धनबाद सेंट्रल सर्किल के तत्कालीन सहायक आयकर आयुक्त (Asstt.Commissioner) एसके दिवाकर ने एलबी सिंह, कुंभ नाथ सिंह और भरत सिंह का अलग-अलग Assessment किया. इसमें सात वित्तीय वर्षों (2006-2013) के दौरान इन तीनों द्वारा दाखिल किये गये आयकर रिटर्न में बतायी गयी आमदनी और छापेमारी में मिले तथ्यों के आधार पर उनकी वास्तविक आमदनी का आकलन किया गया.
2006-2013 तक की अवधि में इन तीनों द्वारा दाखिल किये गये रिटर्न में अपनी कुल 98.13 करोड़ रुपये बतायी गयी थी. हालांकि AO ने Assessment के दौरान इसी अवधि में इन तीनों की कुल आमदनी 326.31 करोड़ रुपये होने का आकलन किया. यानी इन तीनों ने मिलकर कुल 228.18 करोड़ रुपये की आमदनी छिपायी थी.
रिटर्न और मूल्यांकन में आमदनी (करोड़ में)
| नाम | रिटर्न | मूल्यांकन |
| एलबी सिंह | 86.15 | 230.86 |
| कुंभ नाथ सिंह | 9.29 | 74.94 |
| भरत सिंह | 2.69 | 20.51 |
एसके दिवाकर ने Assessment के बाद Draft Assessment Order सहमति के लिए 24 नवंबर 2023 को Addl.CIT अभिषेक कुमार के पास भेजी. आयकर अधिनियम की धारा-153D के तहत संयुक्त आयुक्त स्तर के नीचे के अधिकारी द्वारा Assessment करने पर आदेश जारी करने से पहले Draft Assessment Order पर Addl.CIT की सहमति लेना जरूरी है. इस प्रावधान के तहत भेजे गये Draft Assessment Order पर Addl.CIT अभिषेक कुमार ने 24 नवंबर 2024 को ही अपनी सहमति दे दी. और एसके दिवाकर ने उसी दिन Assessment Order जारी कर दिया. इस Assessment Order के खिलाफ एलबी सिंह, कुंभ नाथ सिंह और भरत सिंह ने तत्कालीन कमिशनर अपील (CIT-A) राजबीर जैन के यहां अपील दायर की.
इसके बाद एलबी सिंह, कुंभनाथ सिंह और भरत सिंह ने आयकर ट्रिब्यूनल में अपने खिलाफ हुए फैसले के खिलाफ अपील दायर की. ट्रिब्यूनल में इन तीनों के मामले की सुनवाई संयुक्त रूप से की गयी. सुनवाई के दौरान आयकर विभाग का प्रतिनिधित्व करने की जिम्मेवारी राजबीर जैन को सौंप दी. इसके बाद ट्रिब्यूनल में मामले की सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान राजबीर जैन (CIT-DR) ने ट्रिब्यूनल से सुनवाई टालने का अनुरोध किया. इसके लिए यह तर्क दिया कि उन्होंने इन तीनों के मामले की सुनवाई कमीश्नर अपील के रूप में की है. इसलिए उन्हें खुद से जुड़े मामले में ट्रिब्यूनल में बहस करना सही नहीं होगा. लेकिन ट्रिब्यूनल ने उनके अनुरोध को खारिज कर दिया और सुनवाई की.
सुनवाई के दौरान एलबी सिंह व अन्य की ओर से कुछ नये तथ्य पेश किये गये. इसमें यह कहा गया कि AO के Draft Assessment Order पर Adll.CIT ने उसी दिन सहमति दे दी, जिस दिन उसे उनके पास भेजा गया था. ऐसे में Adll.CIT ने Draft Assessment Order पर सहमति देने के लिए अपने विवेक का इस्तेमाल नहीं किया. यह केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) द्वारा जारी Circular No.19/2019 in F.No.225/95/2019- ITA.II, dated 14-8-2019 का उल्लंघन है. इसलिए AO का आदेश वैध नहीं है.
ट्रिब्यूनल ने एक ही दिन में इन तीनों से जुड़े कुल 21 मामलों पर सहमति देने के मामले पर अपनी राय जताते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिये गये आदेश के अनुरूप नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने Draft Assessment Report पर सहमति देने या उसे मंजूर करने के लिए सोच विचार करने का निर्देश दिया है. अगर इन तीनों मामलों को देखें तो AO धनबाद में थे और Adll.CIT रांची में.
अगर इन तीनों मामले से जुड़ी फाइलों को रांची भेजा जाये तो कम से कम चार घंटा आने और चार घंटा जाने में लगेगा. अगर रास्ते में खाने के लिए आधा-आधा घंटा रुके तो फाइलों को लाने ले जाने में नौ घंटा लगेगा. इसके बाद अगर Adll.CIT हर एक फाइल को देखने में कम से कम 10-10 मिनट दें तो 21 फाइलों को देखने में करीब साढ़े तीन घंटे लगेंगे. यानी कुल समय 12 घंटा से ज्यादा हो जाता है.
ऐसे में Adll.CIT द्वारा सभी 21 मामलों से जुड़े Draft Assessment Report को पढ़ना और इससे संबंधित दस्तावेज को देखकर सहमति देना व्यवहारिक रूप से संभव नहीं है. यानी Adll.CIT ने Draft Assessment Report पर सहमति देने के लिए अपने विवेक का इस्तेमाल नहीं किया. उन्होंने जैसे-तैसे इस पर सहमति दे दी. इसलिए इसे अस्वीकार किया जाना चाहिए. क्योंकि यह सुप्रीम कोर्ट द्वारा सिराजुद्दीन एंड कंपनी के मामले में तय किये गये सिद्धांत का उल्लंघन है.
ट्रिब्यूनल ने इन तथ्यों के मद्देनजर Adll.CIT द्वारा दी गयी सहमति को खारिज कर दिया. साथ ही एलबी सिंह, कुंभ नाथ सिंह और भरत सिंह के अपील को स्वीकार कर लिया. ट्रिब्यूनल ने अपना फैसला सितंबर 2025 में सुनाया.
