Ranchi News: आयकर ट्रिब्यूनल से दवा व्यापारी मोहन रिति पर 3.90 लाख रुपये के दंड के आदेश को खारिज कर दिया है. इस व्यापारी ने नोटबंदी के दौरान रद्द किये गये नोटो को अपने खाते में जमा किया था. रद्द घोषित किये गये नोटों का मूल्य 12.12 लाख रुपये था.
Assessing Officer (AO) ने इस दवा व्यापारी का Assessment करने के बाद उस पर 3.90 लाख रुपये का दंड लगाया था. दवा व्यापारी ने AO के फैसले के खिलाफ आयकर आयुक्त (CIT-A) के पास अपील की थी. आयकर आयुक्त की ओर से मामले की सुनवाई के लिए दवा व्यापारी/कर दाता(Assesse)को नोटिस भेजा. लेकिन नोटिस उसे नहीं मिला. क्योंकि आयकर आयुक्त के कोर्ट ने गलत पते पर नोटिस भेजा था. नोटिस नहीं मिलने की वजह से दवा व्यापारी अपना पक्ष नहीं कर सके. इसलिए आयकर आयुक्त ने एकपक्षीय फैसला किया और AO द्वारा लगाये गये 3.90 लाख रुपये के दंड के आदेश को सही करार दिया.
दवा व्यापारी ने आयकर आयुक्त (अपील) के फैसले के खिलाफ आयकर ट्रिब्यूनल में अपील की. मामले की सुनवाई के बाद आयकर ट्रिब्यूनल ने AO द्वारा दिये गये दंड के आदेश को खारिज कर दिया. ट्रिब्यूनल ने अपने फैसले में कहा कि इस मामले में आयकर अधिनियम की धारा 69A लगान सही नहीं था. क्योंकि इस मामले में धन का स्रोत घोषित है. इसलिए दवा व्यापारी पर आयकर अधिनियम की धारा 277AA(1) के तहत लगाया गया दंड कानून सही नहीं है.
क्या है मामला
भारत सरकार ने आठ नवंबर 2016 को 500 और 1000 रुपये के नोट को रद्द घोषित कर दिया था. साथ ही इस बैंक खातों में जमा करने का आदेश दिया था. सरकार द्वारा इन नोटों को रद्द करने के बाद दवा व्यापारी ने अपने बैंक खाते में रद्द घोषिद नोट जमा किया. इसका मूल्य 12.12 लाख रुपये था. Assessment Year 2017-18 में उसके खाते में सभी स्रोतों से कुल 65.11 लाख रुपये जमा हुआ था. लेकिन व्यापारी ने संबंधित वर्ष में रिटर्न दाखिल नहीं किया गया था.
इसलिए Assessing Officer(AO) रिटर्न दाखिल करने के लिए नोटिस जारी किया. हालांकि Assessee ने रिटर्न दाखिल नहीं किया. इसके बाद AO खाते में जमा कुल राशि 65.11 लाख को आमदनी मान कर 3.90 लाख रुपये का दंड लगाया. व्यापारी द्वारा रिटर्न दाखिल नहीं करने की वजह से AO ने खाते में जमा पूरी राशि को धारा 69A को अघोषित माना और दंड लगा दिया. आयकर आयुक्त ने अपील की सुनवाई के दौरान गलत ई-मेल पर नोटिस भेजा. इससे व्यापारी आयकर आयुक्त के यहां सुनवाई में हाजिर नहीं हुआ.
ट्रिब्यूनल में व्यापारी की ओर से यह दावा किया गया कि AO ने खाते में जमा पूरी राशि को आमदनी मान कर Assessment किया, जो नियमानुसार गलत है. वह एक छोटा व्यापारी है. उसके दुकान का नाम M/s Classic Health Care है. वह आयकर अधिनियम की धारा 44AD के दायरे में है. इस धारा में यह प्रावधान है कि खाते में चेक, ऑन लाइन के सहारे जमा राशि में से 6% और नकद जमा में से 8% का आमदनी मान कर आय योग्य टैक्स की गणना की जायेगी. लेकिन AO ने ऐसा नहीं किया.
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