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हजारीबाग: NTPC के चट्टी बरियातु व केरेडारी प्रोजेक्ट से अरबों की आमदनी, सड़क बदहाल

Hazaribagh: केरेडारी प्रखंड में भारत सरकार की महारत्न कम्पनी एनटीपीसी (एनएमएल) के दो माइंस केरेडारी व चट्टी बरियातु कोयला खनन परियोजना से अब प्रति वर्ष अरबों रुपये की आमदनी शुरू हो गयी है. इसके विपरीत अगर केरेडारी प्रखंड क्षेत्र के सड़कों की हालत देखी जाय तो ऐसा लगता है यहां एनटीपीसी सीएसआर मद से सामुदायिक विकास के कार्य में सिर्फ कोरम पूरा किया जा रहा है. सबसे पहले हम गरिकला मोड़ से कंडाबेर माता स्थान रोड़ (चार किलोमीटर) की बात करेंगे. नेता से लेकर एनटीपीसी के अधिकारी भी मां अष्टभुजी मंदिर में आस्था रखते हैं. लगभग हर माह हजारों श्रद्धालुओं का आना-जाना इस मार्ग से मंदिर तक होता है. हिचकोले खाना पसंद आ रहा है. पर इस सड़क को दुरुस्त कराना उचित नहीं समझा है.

दूसरी सड़क कोदवे से पाण्डु व बालेदेवरी तक है

हम दूसरी सड़क कोदवे से पाण्डु व बालेदेवरी (8 किलोमीटर) की बात करेंगे तो यह सड़क भी इतनी खस्ता है कि राहगीरों को काफी मशक्कत के बाद लोचर, बसरिया, हैवई, बेंगवरी, पाण्डु, तरहेसा, टुंडा, बलिया, बालेदेवरी गांव जाना होता है. सबसे बड़ी बात है कि इसी मार्ग से केरेडारी कोयला खनन परियोजना में कार्यरत अधिकारी व वर्कर्स का जाना होता है. इस सड़क का खराब होने के पीछे कन्वेयर बेल्ट निर्माण कर रही कम्पनी एलएंडटी के भारी वाहन (50 से 100 टन भारी) हैं. रोज टेलर से भारी मशीन इसी 12 फीट चौड़ी सड़क से ले जाया जाता है. जबकि इस सड़क की लोड लेने की क्षमता मात्र 10 से 12 टन भारी वाहन तक ही सीमित है.

इस सड़क से अधिकारी व वर्कर्स जाते हैं

प्रखंड के तीसरी जर्जर सड़क की बात करें तो केरेडारी बेलचौक से पगार नोवा आहार तक की जर्जर सड़क है. इस दो किलोमीटर सड़क की हालत इतनी जर्जर है कि कोई नया चालक एक बार गया तो दुबारा नहीं जाना चाहेगा. जबकि इसी मार्ग से चट्टीबरियातु कोयला खनन परियोजना में कार्यरत अधिकारी व वर्कर्स भी जाते हैं. एनटीपीसी के प्रबंधक भी इसी मार्ग से जाते हैं पर इस सड़क को दुरुस्त करना मुनासिब नहीं समझा गया. आगे चौथी सड़क की बात करेंगे तो जोरदाग से लबनिया मोड़ की ढाई किलोमीटर की जर्जर सड़क है.

इस सड़क पर रैयतों का टेंट लगा रहता है

इस मार्ग से ट्रांसपोर्टिंग भी होता है यही कारण है कि सड़क काफी जर्जर हो गयी है तथा लगातार जाम लगा रहता है जिससे जोरदाग गांव के लोगों को केरेडारी व टंडवा जाने में बड़ी परेशानी होती है. इस सड़क का भार कम करने के लिये जोरदाग मुंडा टोली से लबनिया मोड़ तक 2.2 किलोमीटर बाईपास ट्रांसपोर्टिंग सड़क बनाई गई पर सभी रैयत जिनकी जमीन इस 2.2 किलोमीटर सड़क में गयी है कम्पनी इनके साथ ठीक से समझौता नहीं कर पाई. नतीजा लगातार इस सड़क पर रैयतों का टेंट लगा रहता है. रैयत नॉकरी व मुआवजा की मांग करते हैं. इसे भी पढ़ें - गोधरा">https://lagatar.in/film-the-sabarmati-report-made-on-godhra-incident-is-tax-free-in-madhya-pradesh/">गोधरा

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