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कोरोनाकाल में मनोचिकित्सकों से सलाह लेने वाले मरीजों की संख्या में वृद्धि

टोल फ्री नंबरों पर पहले आ रहे थे महज 2 से 3 कॉल, अब आ रहे 30

Chulbul

Ranchi: कोरोना और इससे जुड़ी खबरों ने एक बार फिर लोगों को डरा दिया है. कोरोना के पिछली लहर के मुकाबले इस बार डर केवल लोगों को नौकरी और व्यापार का ही नहीं बल्कि संक्रमण का भी है. कोरोना की पहली लहर में तनाव से जूझ रहे लोगों के लिए सरकार ने केंद्रीय मनोचिकित्सक संस्थान (सीआईपी) के जरिये 15 टोल-फ्री नंबर्स की शुरुआत की थी. संक्रमण कम होने के साथ ही इन नंबरों पर फोन आने कम हो गए थे.

मार्च 2021 तक दिन में 2 या 3 फोन मुश्किल से आ रहे थे. लेकिन अप्रैल 2021 से शुरू हुए कोरोना की दूसरी लहर को देखते हुए प्रबंधन ने इन नंबरों को दोबारा एक्टिव कर दिया है. सीआईपी के चिकित्सकों के अनुसार अब हर दिन लगभग 30 कॉल आ रहे हैं. इसके साथ ही हर दिन संपर्क करने वालों की संख्या में बढ़ोतरी होती जा रही है.

लोगों को सता रहा मौत का भय

इन नंबरों पर ज्यादातर फोन वैसे लोगों की आ रही हैं जिन्हें संक्रमण से मौत का डर सता रहा है. उन्हें यह डर सता रहा है कि कोरोना से कहीं उनकी मौत ना हो जाये. लोग ऐसा पूछ रहे हैं कि कोरोना संक्रमित होने पर क्या उनकी मौत हो जाएगी.

इसके अलावा कई लोग रात में नींद न आने, घबराहट, मानसिक तनाव न झेल पाने के साथ ही काम को लेकर कई मजदूरों के भी फोन आ रहे हैं. इसकी जानकारी टोल-फ्री नंबरों को अटेंड कर रहे चिकित्सकों ने दी. ये चिकित्सक फोन पर ही काउंसलिंग कर इनकी मदद कर रहे हैं. 

घबराएं नहीं,  सकारात्मक सोचें- डॉ निशांत गोयल

परिस्थितियों को देखते हुए सीआईपी में प्रोफेसर डॉ निशांत गोयल ने कहा कि जितनी जानकारी सभी को होनी चाहिए वह उनके पास पहले से ही है. खुद को सकारात्मक चीजें करने के लिए प्रेरित करें. अगर फिर भी परेशानी कम नहीं हो रही तो डॉक्टर्स से संपर्क करें.

पुराने मरीजों के इलाज में हो रही परेशानी, डॉक्टर्स ने जताई चिंता

चिकित्सकों ने बताया कि सीआईपी में इलाज करवाने झारखंड समेत दूसरे प्रदेशों से भी मरीज आते हैं. हालात यह हैं कि कोरोना के डर से मरीज खुद आने में असक्षम हैं. टॉल फ्री नंबरों पर संपर्क कर मरीज परेशानी बता कर डॉक्टरी परामर्श ले सकते हैं और कहीं के भी मेडिकल शॉप से दवाएं ले सकते हैं.

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