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बढ़ी आमद, ठहरा पलायन : खून से लाल रहने वाली धरती अब स्ट्रॉबेरी की खेती से है लाल

जहां गोलियों की तड़तड़ाहट से कांप उठता था इलाका, वहां आज है खुशहाली का आलम आज किसानों की मेहनत का दिख रहा असर हर दिन फलों से भरे 1000 बॉक्स भेजे जा रहे दिल्ली और कोलकाता Gaurav Prakash Hazaribagh : हजारीबाग के कटकमदाग प्रखंड स्थित बेंदी के उदयपुर, कुब्बा और चीचीकला के किसानों की आमद बढ़ गई और उनका पलायन भी ठहर गया. ये सकारात्मक बदलाव आया है. इतिहास यहां पर खून-खराबे की रही है. नब्बे के दशक में इन इलाकों में नक्सलियों के तांडव से धरती रक्तरंजित हो जाया करती थी, वहां के खेत अब स्ट्रॉबेरी की खेती से लाल हो रहे हैं. इसे भी पढ़ें– उद्धव">https://lagatar.in/uddhav-factions-shiv-sena-congress-ncp-should-fight-maharashtra-assembly-and-lok-sabha-elections-together/">उद्धव

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बेंदी इलाके में नक्सलियों का था वर्चस्व

बेंदी का इलाका नक्सलियों का गढ़ माना जाता था. दो से तीन दशक पूर्व यहां जन अदालत लगती थी और गोलियों की तड़तड़ाहट से पूरा इलाका कांप उठता था. लेकिन अब किसानों की मेहनत का सुखद नतीजा देखने को मिल रहा है. हजारीबाग के कटकमदाग प्रखंड की लगभग 14 एकड़ जमीन में इन दिनों स्ट्रॉबेरी की खेती हो रही है. बेंदी, उदयपुर और कुब्बा चीचीकला में 70 से अधिक किसान स्ट्रॉबेरी की खेती कर खुशहाल हो रहे हैं. आलम यह है कि बेंदी में एक कलेक्शन सेंटर बनाया गया है. वहां से 1000 बॉक्स रोजाना स्ट्रॉबेरी कोलकाता और दिल्ली जैसे महानगरों में भेजे जा रहे हैं. यही नहीं हजारीबाग के स्थानीय बाजार में भी किसान स्ट्रॉबेरी बेच रहे हैं. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/01/kkk-3.jpg"

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खेती के लिए वापस लौट रहे युवा

किसान बताते हैं कि कुब्बा और चिचीकला गांव में एक समय ऐसा भी स्थिति था कि कोई भी युवक रहना पसंद नहीं करते थे. ग्रामीण पलायन कर गए थे. लेकिन स्थिति बदली, आज किसान वापस अपने गांव पहुंच रहे हैं. पहले किसान यहां परंपरागत खेती करते थे. लेकिन समय बदलने के साथ-साथ खेती का दायरा भी बदलता और बढ़ता चला गया. टमाटर के बदले अब हम लोग स्ट्रॉबेरी की खेती कर रहे हैं. इसे भी पढ़ें– आलोक">https://lagatar.in/five-leaders-including-alok-dubey-lal-kishore-nath-rajesh-gupta-will-be-expelled-from-congress-for-six-years/">आलोक

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परिवर्तन कार्यक्रम से बदल रही सुदूर इलाकों की तस्वीर

एचडीएफसी बैंक और केजीवीके के परिवर्तन कार्यक्रम से ग्रामीण इलाकों की तस्वीर और तकदीर बदल रही है. कार्यक्रम के सहायक प्रबंधक धर्मेंद्र कुमार तिवारी बताते हैं कि उन लोगों ने ग्रामीणों को स्ट्रॉबेरी की खेती की ट्रेनिंग दी और उसके बाद उन्हें पौधे भी उपलब्ध कराए. नतीजतन ग्रामीण क्षेत्र के आदिवासी बहुल क्षेत्र के लोग स्ट्रॉबेरी की खेती से लोग जुड़ गए. आज परंपरागत खेती के साथ-साथ छोटे-छोटे ब्लॉक में स्ट्रॉबेरी की खेती की जाने लगी. पहले इन किसानों की आय बहुत कम थी. लेकिन हाई वैल्यू प्रोडक्ट की खेती करने से उनकी कमाई बढ़ गई. पहले दो-चार जगह ही उन लोगों ने स्ट्रॉबेरी की खेती कराई, लेकिन इस वर्ष स्ट्रॉबेरी की खेती करने वालों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है. लोग खुद आकर उनसे संपर्क स्थापित करते हैं. किसान अब अत्याधुनिक तरीके से खेती कर रहे हैं. डीप इरीगेशन और मल्चिंग से सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है.

स्ट्रॉबेरी की खेती में लगे हैं तीन गांवों के किसान

बेंदी गांव की बात की जाए तो अमित दूबे और शारदानंद दुबे स्ट्रॉबेरी की खेती कर रहे हैं, तो उदयपुर में नायक गंझू, लालमणि गंझू, दिगंबर गंझू, राजेंद्र कुमार भोक्ता जबकि कुब्बा में सुषमा देवी, बिरजनी टोप्पो, तरेसा गुड़िया, सुनील भेंगरा, संजीत प्रजापति और जाकिर अंसारी स्ट्रॉबेरी की खेती में लगे हुए हैं.

बिचौलियों से बचने के लिए बनाया गया है कलेक्शन सेंटर

बेदी के बाजार ताल में एचडीएफसी बैंक के संपोषित व केवीजीके की ओर से संचालित संपूर्ण ग्राम विकास परियोजना के तहत स्ट्रॉबेरी उत्पादकों के लिए कनेक्शन सेंटर भी बनाया गया है. बिचौलियों से किसान परेशान न हों, इसके लिए यह सेंटर बनाया गया है. ऐसे में अब किसानों को ज्यादा आमदनी हो रही है. पिछले दिनों आगरा की मुखिया संगीता देवी, पंचायत समिति सदस्य गोवर्धन गंझू और परिवर्तन कार्यक्रम के सहायक प्रबंधक धर्मेंद्र कुमार तिवारी ने स्ट्रॉबेरी कलेक्शन सेंटर का उद्घाटन किया था. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/01/kkk-2.jpg"

alt="" width="600" height="300" /> इसे भी पढ़ें– BREAKING:">https://lagatar.in/torture-of-cold-children-up-to-class-5-extended-holiday-till-january-15/">BREAKING:

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पुलिसिंग के कारण ग्रामीण इलाकों में परिवर्तन : एसपी

वहीं हजारीबाग एसपी मनोज रतन चौथे बताते हैं कि बेहतर पुलिसिंग के कारण ग्रामीण इलाकों में परिवर्तन आ रहा है. कम्युनिटी पुलिसिंग के साथ-साथ ग्रामीणों का विश्वास भी पुलिस के प्रति बढ़ा है. नक्सलियों को उन लोगों ने इलाके से खदेड़ दिया है. इसका ही परिणाम है कि ग्रामीण इलाकों में परिवर्तन दिख रहा है. साथ ही साथ सरकारी योजनाएं भी धरातल पर उतर रही हैं. इससे गांवों की तस्वीर भी बदली है. आने वाले दिनों में वे लोग और बेहतर पुलिसिंग कर पाएंगे, जिससे ग्रामीणों का विश्वास पुलिस के प्रति बढ़ेगा. उनके पास यह भी सूचना है कि जो ग्रामीण पलायन कर गए थे, वह फिर से अपने गांव पहुंच रहे हैं और आत्मनिर्भर होने के लिए खेती से जुड़े व्यवसाय में लग गए हैं. [wpse_comments_template]

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