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झारखंड में स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत नवजात पर बढ़ता इलाज खर्च और मौत

Ranchi News: स्वास्थ्य से जुड़े आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024 में पांच लाख तक की बीमा लागू रहने के दौरान राज्य में कुल 33 हजार नवजातों को अस्पताल में भर्ती कराया गया था. इनके इलाज के लिए अस्पतालों की ओर से कुल 86.88 करोड़ रुपये का दावा किया गया था. यानी पांच लाख तक बीमा की अवधि में प्रति नवजात इलाज का औसत खर्च 26 हजार रुपये थे.
 
AI की मदद से तैयार सांकेतिक तस्वीर.

Ranchi News: झारखंड में सरकार द्वारा चलाये जा रहे अबुआ स्वास्थ्य योजना में नवजात पर इलाज का खर्च 26 हजार से बढ़कर 1.10 लाख रुपये हो गया है. साथ ही राजधानी के कुछ अस्पतालों में नवजात का मृत्युदर 15%-40% तक पहुंच गया है.


स्वास्थ्य से जुड़े आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024 में पांच लाख तक की बीमा लागू रहने के दौरान राज्य में कुल 33 हजार नवजातों को अस्पताल में भर्ती कराया गया था. इनके इलाज के लिए अस्पतालों की ओर से कुल 86.88 करोड़ रुपये का दावा किया गया था. यानी पांच लाख तक बीमा की अवधि में प्रति नवजात इलाज का औसत खर्च 26 हजार रुपये थे.


सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में 33 हजार के मुकाबले सिर्फ 15 हजार नवजात को अस्पताल में भर्ती कराया गया. हालांकि इन 15 हजार नवजातों के इलाज पर अस्तालों की ओर से 134.25 करोड़ रुपये का दावा किया. वर्ष 2026 में अब तक सात हजार नवजातों को राज्य के विभिन्न सूचीबद्ध अस्पतालों में भर्ती कराया गया. इनके इलाज पर अस्पतालों ने 79.79 करोड़ रुपये का दावा किया है.


इन आकंड़ों के विश्लेषण से इस बात की पुष्टि होती है कि राज्य में बीमा राशि बढ़ने के बाद नवजातों के अस्पताल में भर्ती होने में कमी आयी है. लेकिन प्रति नवजात इलाज का औसत खर्च बढ़ा है. 2024 में नवजात पर औसत इलाज खर्च 26 हजार था. 2025 में यह बढ़कर 89 हजार हो गया और 2026 में अब तक यह बढ़कर 1.10 लाख रुपये हो गया है. यानी 2024 के मुकाबले प्रति नवजात इलाज खर्च में चार गुना से अधिक की वृद्धि हुई है.


वर्ष 2026 में नवजात की इलाज के लिए बने कुछ विशेष अस्पतालों में मृत्यु दर 15%-40% तक पहुंच गया. रांची के रानी अस्पताल में भर्ती 700 नवजात में से 100 की मौत हुई है. रांची के नारायण चिल्ड्रेन अस्पताल में भर्ती 150 नवजात में से 50 की मौत हो गयी. 


साथ ही रांची के लिटिल हार्टस न्यू बॉर्न एंड चाइल्ड हार्ट सेंटर में भर्ती 100 में से 40 नवजात की मौत हो गयी है. इसके अलावा जमशेदपुर से डॉक्टर अभिषेक अस्पताल में भर्ती 250 में से 70 नवजात की मौत हो गयी है. देवघर के पार्वती क्लिनिक में भर्ती 300 में से 50 नवजात की मौत हुई है.

 

झारखंड में गरीब परिवारों के लिए आयुष्मान भारत और अबुआ स्वास्थ्य बीमा योजना चलाया जा रहा है. इस दोनों ही योजनाओं के तहत कुल 70 लाख परिवारों का बीमा है. इसमें से 30 लाख परिवारों को आयुष्मान भारत योजना और 40 लाख परिवारों को अबुआ स्वास्थ्य बीमा योजना का लाभ मिलता है. 


आयुष्मान भारत योजना में शामिल परिवारों को सालाना पांच लाख रुपये तक के कैशलेस इलाज की सुविधा मिलती है. जबकि अबुआ स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत हर परिवार को सालाना 15 लाख रुपये तक के कैशलेस इलाज की सुविधा है. आयुष्मान भारत योजना के कुल खर्च का 60% प्रतिशत केंद्र सरकार और 40% राज्य सरकार देती है. जबकि अबुआ आवास योजना का पूरा खर्च राज्य सरकार उठाती है.

 


सरकारी बीमा योजना में प्रति व्यक्ति औसत इलाज खर्च

 

वर्ष इलाज दावा औसत खर्च बीमा
2024  33 हजार 86.88 करोड़ 26 हजार 5 लाख
2025 15 हजार 134.25 करोड़ 89 हजार 15 लाख
2026  7 हजार 79.79 करोड़ 1.10 लाख 15 लाख


इलाज के दौरान नवजात की मौत का उदाहरण    

                   

मरीज मौत प्रतिशत अस्पताल
700 100 14.28 % रानी हॉस्पिटल,रांची
250 70 28% डॉक्टर अभिषेक चाइल्ड केयर मेटरनिटी हॉस्पिटल,जमशेदपुर
150 50 33.33% नारायण चिल्ड्रेन अस्पताल, रांची
300 50  16.66% पार्वती क्लिनिक एंड रिसर्च सेंटर, देवघर
100 40  40% लिटिल हार्टस न्यू बॉर्न एंड चाइल्ड हार्ट सेंटर, रांची

                   
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