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भारतीय बैंकों ने दस साल में 16.35 लाख करोड़ का कर्ज राइट ऑफ किया, पर डिफॉल्टरों को नहीं मिलेगी राहत...

2023-24 के दौरान बैंकों ने 1.70 लाख करोड़ रुपये के कर्ज माफ किये, जो 2022-23 के 2.16 लाख करोड़ से कम है. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के अनुसार ये राइट ऑफ नियमों के तहत किये गये हैं. NewDelhi : भारतीय बैंकों ने पिछले दस सालों में 16.35 लाख करोड़ रुपये की कर्ज राइट ऑफ किया है. संसद में पेश ताजा सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2018-19 में सबसे ज्यादा 2.36 लाख करोड़ रुपये के कर्ज राइट ऑफ हुए हैं. 2014-15 में सबसे कम 58,786 करोड़ रुपये के NPA(गैर निष्पादित परिसंपत्ति) बट्टे खाते में डाले गये थे. आंकड़े कहते हैं कि 2023-24 के दौरान बैंकों ने 1.70 लाख करोड़ रुपये के कर्ज माफ किये, जो 2022-23 के 2.16 लाख करोड़ से कम है. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के अनुसार ये राइट ऑफ नियमों के तहत किये गये हैं. कहा कि अगर कोई कर्ज चार साल तक नहीं चुकाया जाता है, तो उसे पूरी तरह से प्रोविजन करना पड़ता है. इससे बैंकों की बैलेंस शीट साफ होती है और उनकी वित्तीय स्थिति मजबूत होती है.

राइट ऑफ कर्जदारों की जिम्मेदारी खत्म नहीं करता

नियमानुलार राइट ऑफ करने का मतलब यह नहीं निकलता कि कर्ज लेने वालों को माफी दे दी गयी है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में बयान दिया कि राइट ऑफ कर्जदारों की जिम्मेदारी खत्म नहीं करता. बैंकों का फोकस अब भी इन पैसों को वसूल करने पर है. बैंक केवल RBI के दिशा-निर्देशों और बैंकों के बोर्ड की ओर से स्वीकृत नीति के हिसाब से NPA को बट्टा खाते में डालते हैं. कहा कि इस तरह बट्टे खाते में डालने से कर्जदारों को देनदारियों में छूट नहीं मिलती है. उन्हें इससे कोई फायदा नहीं होता.

29 बड़े कॉर्पोरेट कर्जदारों पर 61,027 करोड़ रुपये बकाया

आंकड़े बताते हैं कि 31 दिसंबर 2024 तक, 29 बड़े कॉर्पोरेट कर्जदारों पर 61,027 करोड़ रुपये बकाया हैं. इनमें से हर कर्जदार पर 1,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज है. हालांकि, इन कर्जदारों के नाम गोपनीय रखे हैं. क्योंकि आरबीआई के नियमों में गोपनीयता का प्रावधान है. हालांकि बैंकों ने इन पर बकाया वसूलने के लिए कई कदम उठाए हैं. सभी डिफॉल्टर्स पर सिविल कोर्ट, डेट रिकवरी ट्रिब्यूनल और सारफेसी एक्ट के तहत कार्रवाई चल रही है. इस क्रम में नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) के जरिए भी कर्ज वसूली की कोशिश हो रही है.

बैंकों की सेहत में  आया है सुधार

इन सबके बीच अच्छी खबर आयी है कि भारतीय बैंकों, खासकर सरकारी बैंकों की हालत सुधरी है. RBI की ताजा रिपोर्ट के अनुसार बैंकों के खराब कर्ज यानी ग्रॉस NPA सितंबर 2024 में 13 साल के सबसे निचले स्तर 2.5% पर आ गये हैं, जो कि मार्च 2024 में 2.7% थे. नेट NPA भी 0.62% से घटकर 0.57% हो गये हैं. सरकारी बैंकों के ग्रॉस एनपीए की बात करें तो यह सितंबर 2024 में लुढ़ककर 3.12% पर पहुंच गये हैं जबकि मार्च 2018 में ये 14.58% के ऊंचे स्तर पर थे.

 बड़े कॉर्पोरेट डिफॉल्टरों से वसूली अभी भी एक बड़ी चुनौती है

कहा गया है कि बैंकों के एसेट्स की क्वालिटी बेहतर तो हुई है, लेकिन बड़े कॉर्पोरेट डिफॉल्टरों से वसूली अभी भी एक बड़ी चुनौती बन कर सामने खड़ी है. वित्त मंत्रालय के अनुसार बैंकों ने कर्ज वसूलने के लिए कानूनी कार्रवाई और कर्जदारों से सीधी बातचीत तेज कर दी है. जानकारों के अनुसार वर्तमान में, बैंकिंग सेक्टर में सुधार के संकेत दिख रहे हैं, लेकिन अगर बड़े कर्जदारों से रकम नहीं वसूली गयी तो ये चिंता का सबब बन सकती है. हर खबर के लिए हमें फॉलो करें
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