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भारतीय वन सर्वेक्षण की रिपोर्ट : भारत का 25 प्रतिशत हिस्सा पेड़ों और वनों से ढका हुआ है...

NewDelhi : देहरादून स्थित वन अनुसंधान संस्थान द्वारा तैयार भारत वन स्थिति रिपोर्ट (आईएसएफआर) शनिवार को जारी की गयी. केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने यह रिपोर्ट जारी की. रिपोर्ट में देश के वन एवं वृक्ष आवरण की स्थिति का विवरण दिया गया है. भारतीय वन सर्वेक्षण (FSI) ने यह रिपोर्ट रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट डेटा और फील्ड-आधारित इन्वेंट्री की व्याख्या के आधार पर तैयार की है. रिपोर्ट के अनुसार, भारत का कुल वन और वृक्ष आवरण (2023 तक) 827,357 वर्ग किमी है, जो देश के क्षेत्रफल का लगभग 25फीसदी है.

देश में कुल वन क्षेत्र 715,342.6 वर्ग किमी (21.7फीसदी ) है

2021 में की गयी गणना की तुलना में क्षेत्रफल में 1,445.8 वर्ग किमी की वृद्धि हुई है. रिपोर्ट के अनुसार देश में कुल वन क्षेत्र 715,342.6 वर्ग किमी (21.7%) है, जबकि वृक्ष आवरण 112,014.3 वर्ग किमी (3.4%) है. जान लें कि 1988 की राष्ट्रीय वन नीति के अनुसार पारिस्थितिकी स्थिरता बनाये रखने के लिए भौगोलिक क्षेत्र का कम से कम 33फीसदी भाग वन के अंतर्गत होना चाहिए. एफएसआई के मौजूदा आकलन से जानकारी सामने आयी है कि 2021 की तुलना में देश में वन क्षेत्र में 156.4 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि हुई है.

वन क्षेत्र में 0.05फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है

रिपोर्ट की मानें तो वन क्षेत्र में यह वृद्धि रिकॉर्डेड फॉरेस्ट एरिया (आरएफए) के अंदर 7.2 वर्ग किलोमीटर और बाहर 149.1 वर्ग किलोमीटर है. यानी कुल मिलाकर वन क्षेत्र में 0.05% की बढ़ोत्तरी हुई है, रिपोर्ट में इसे स्वामित्व, कानूनी स्थिति और भूमि उपयोग के बावजूद 10फीसदी से अधिक या उसके बराबर वृक्ष छत्र घनत्व वाली एक हेक्टेयर से अधिक सभी भूमि के रूप में परिभाषित किया गया है. परिभाषा के अनुसार, ऐसी भूमि जरूरी नहीं कि रिकॉर्डेड फॉरेस्ट एरिया हो और इसमें बाग, बांस और ताड़ के बागान भी शामिल हों .

 1 दिसंबर, 2023 को वन (संरक्षण) संशोधन अधिनियम पारित किया गया था

2021 और 2023 के सर्वेक्षणों के बीच, केंद्र सरकार ने 1 दिसंबर, 2023 को वन (संरक्षण) संशोधन अधिनियम पारित किया था. तब सरकार पर आरोप लगे थे कि उसने वन की परिभाषा को कमजोर कर दिया है. यह अधिनियम चिड़ियाघरों और सफारी को वन की परिभाषा से छूट देता है, भले ही वे वन क्षेत्रों में स्थित हों. रिपोर्ट के अनुसार मध्यम सघन वनों में 1,234.9 वर्ग किमी की कमी आयी है, खुले वनों में 1,128.2 वर्ग किमी की कमी तथा अत्यंत सघन वनों में 2,431.5 वर्ग किमी की वृद्धि हुई है. पिछले दो वर्षों में वृक्षावरण में 1,289.4 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि हुई.

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