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झारखंड में सरकारी दामाद की तरह होता घुसपैठियों का स्वागत : चंपाई

Ranchi :   पूर्व सीएम चंपाई सोरेन ने कहा है कि जब दिल्ली, महाराष्ट्र व अन्य राज्यों में कोई घुसपैठिया पकड़ा जाता है तो उस पर कानूनी कार्रवाई होती है. लेकिन झारखंड में सरकारी दामाद की तरह उनका स्वागत होता है, स्थानीय प्रशासन उन पर हाथ डालने से डरता है. सरकारी अधिकारी उनके समर्थन में फर्जी एफिडेविट फाइल करते हैं और इन सब के बावजूद जब हाई कोर्ट मामले की जांच के लिए कमिटी बनाने का आदेश देता है, तो राज्य सरकार उस आदेश को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट चली जाती है. https://twitter.com/ChampaiSoren/status/1916839670249635960

सभी के आधार कार्ड में एक ही जन्म तिथि सोशल मीडिया पोस्ट में आगे कहा है कि मुंबई पुलिस ने 13 बांग्लादेशी घुसपैठियों को गिरफ्तार किया है, जिनके पास साहिबगंज (झारखंड) के बने फर्जी आधार कार्ड बरामद हुए हैं. इन सभी के आधार कार्ड में 1 जनवरी की जन्मतिथि दर्ज है. पिछले हफ्ते, चाकुलिया में एक समुदाय विशेष के तीन हजार फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनने की खबर मिली थी. इन घटनाओं से यह स्पष्ट है कि मुर्शिदाबाद की तर्ज पर अवैध घुसपैठियों को झारखंड में फर्जी डॉक्यूमेंट बना कर दिये जा रहे हैं. अवैध घुसपैठियों का गढ़ बन चुका है झारखंड चंपाई ने कहा कि हमने पहले भी कहा था कि बंगाल के बाद झारखंड इन अवैध घुसपैठियों का गढ़ बन चुका है. पाकुड़ और साहिबगंज जैसे इलाकों में आदिवासी समाज अल्पसंख्यक बन चुका है. लेकिन सत्ता के मद में चूर इस अंधी-बहरी सरकार को ना कुछ दिखाई देता है और ना ही सुनाई देता है. झारखंड में जब कभी भी हम लोग घुसपैठ का मुद्दा उठाते हैं तो सत्ता पक्ष केंद्र सरकार पर सारी जिम्मेदारी डालने लगता है. ये घुसपैठिए पिछले कई दशकों से लगातार झारखंड में प्रवेश कर रहे हैं. कई इलाकों में सीमा खुली होने और पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा बाड़बंदी के लिए जमीन उपलब्ध न कराये जाने के कारण इन्हें रोकना आसान नहीं है. वैसे भी, जब आपके घर में कोई बाहरी आता है, तो उसे रोकने और जांचने की पहली जिम्मेदारी आपकी ही होती है. अबुआ सरकार इन घुसपैठियों को संरक्षण क्यों दे रही? सवाल यह है कि यह तथाकथित अबुआ सरकार इन घुसपैठियों को संरक्षण क्यों दे रही है? क्या आदिवासियों एवं मूलवासियों को दरकिनार कर इन्हीं घुसपैठियों को बचाने और बसाने के लिए अलग झारखंड राज्य बना था? क्या कोई सत्ता एवं वोट बैंक के लिए इस हद तक गिर सकता है कि अपने ही लोगों को नकार कर, इन देश-विरोधी विदेशी घुसपैठियों को संरक्षण दे?

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