- यूरोपियन देशों के हालात ने पूरी दुनिया को सकते में डाल दिया है. दुनिया भर के सत्ताधीश हुए परेशान, सब हैं चौंकन्ने.
Lagatar Desk
फ्रांस, इटली व बेल्जियम में बड़े पैमाने पर चल रहे आंदोलन व प्रदर्शनों ने दुनिया भर के सत्ताधीशों की नींद उड़ा दी है. दोनों देशों में लाखों लोग सड़क पर हैं. आगजनी और हिंसा का दौर शुरु हो गया है. हजारों लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है.
16 व 17 अक्टूबर को इन तीनों देशों में हुए प्रदर्शनों की वजह बढ़ती महंगाई, जिंदगी जीने की लागत में बेतहाशा बढ़ोतरी, बेरोजगारी, वेतन में कम बढ़ोतरी, नौकरी के अवसर कम होना, सरकार में भ्रष्टाचार व महंगी होती शिक्षा शामिल है.
इटलीः पीएम जॉर्जिया मेलोनी के खिलाफ आक्रोश
इटली में 16 व 17 अक्टूबर को हुए प्रदर्शनों को लेकर एपी न्यूज की खबर के मुताबिक महंगाई, बेरोजगारी, शिक्षा नीतियों, स्कूलों की स्थिति, शिक्षा के फंडिंग और विदेशी छात्रों पर 30 प्रतिशत की सीमा वाली डिग्री की वजह से आंदोलन हो रहे हैं.
एपी न्यूज की खबर के मुताबिक इटली के प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की सरकार के खिलाफ लोगों में जबरदस्त असंतोष है. 17 अक्टूबर को हुए प्रदर्शनों में चार लाख से अधिक लोग शामिल हुए. रोम, ट्यूरिन, बोलोन्या, वेरोने समेत कई जगहों पर हिंसा हुई. तनाव की स्थिति बनी हुई है.

इटली में लाखों लोग सड़क पर उतर कर सरकार की नीतियों का विरोध कर रहे हैं.
Internazionale की रिपोर्ट के मुताबिक रोम में एक लाख लोगों ने रैली की. शांतिपूर्ण मार्च हिंसक हो गई. पुलिस पर पत्थरबाजी दी. आगजनी व दुकानों में लूट पाट की. सीजीआईएल की एस रैली में हड़ताल का ऐलान किया गया है.
इटली की सरकार का मानना है कि यह आंदोलन फ्रांस और स्पेन के हालिया प्रदर्शनों से प्रेरित है. पूरे यूरोप में महंगाई के खिलाफ व्यापक आक्रोश है.
प्रधानमंत्री मेलोनी ने हिंसा की निंदा की है, जबकि विपक्ष और संगठनों ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा है कि आंदोलन के लिए सरकार की नीतियां जिम्मेदार है.
फ्रांसः हर तरफ हिंसक प्रदर्शन, हालात बेकाबू
फ्रांस में चल रही हिंसा को लेकर रायटर ने खबर दी है कि यूरोपिय देशों में सबसे व्यापक व हिंसक प्रदर्शन फ्रांस में ही हो रहे हैं. 17 अक्टूबर को देशभर में महंगाई (cost of living), कमजोर सार्वजनिक सेवाओं (खासकर स्कूलों) और असमानता के खिलाफ कई शहरों में बड़े प्रदर्शन हुए.
फ्रांस में सितंबर महीने में छात्र आंदोलन शुरु हुआ था. छात्रों का आंदोलन स्कूलों की खराब स्थिति, शिक्षकों की कमी व जर्जर इमारतों के ख़िलाफ़ शुरु हुआ था. बाद में इस आंदोलन में कई यूनियन, येलो वेस्ट्स (Gilets Jaunes), मजदूर, किसान और पेंशनर भी शामिल हो गए हैं.

फ्रांस में आंदोलन हिंसक हो गया है. हालात बेकाबू होते जा रहे हैं.
फ्रांस की आंतरिक मंत्रालय के अनुसार 17 अक्टूबर को देशभर में आंदोलन हुए. इन आंदोलनों में 5.50 लाख से अधिक लोग शामिल हुए. जबकि फ्रांस की राजधानी पेरिस में हुए प्रदर्शन में एक लाख से अधिक लोग शामिल हुए. हालांकि आंदोलनकारियों ने देश भर में करीब 9 लाख लोगों के आंदोलन में शामिल होने की बात कही है.
आंदोलन के दौरान 17 अक्टूबर को कई शहरों में आंदोलनकारियों व पुलिस के बीच टकराव हुए हैं. भीड़ को हटाने के लिए पुलिस ने आंसू गैस और वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया. रिपोर्ट के मुताबिक़ ल्यों में टूरिस्ट ऑफिस, लिमोज में सिटी हॉल, पेरिस में गाड़ियों में आगजनी की गई. दुकानों की लूट, मार्सेल टाउन हॉल पर हमला किया गया. पुलिस ने कुल 1200 लोगों को गिरफ्तार किया है.
बेल्जियमः राजधानी ब्रुस्सेल तक पहुंचा आंदोलन
बेल्जियम में भी महंगाई, बजट में कटौती और शिक्षा लागत में बढ़ोतरी के ख़िलाफ़ आंदोलन जारी है. बेल्जियम के प्रधानमंत्री Bart De Wever की केंद्र-दक्षिणपंथी सरकार (“Arizona” गठबंधन) बजट में बचत की कोशिश कर रही है, जिससे यूनियनें और छात्रों में जबरदस्त नाराजगी है.
बेल्जियम का छात्र आंदोलन फ्रांस की तर्ज पर चल रहा है. यहां आंदोलन की शुरुआत लीग (Liège) से हुई. छात्रों ने शिक्षा लागत में बढ़ोतरी, भीड़भाड़ और सुधारों के खिलाफ प्रदर्शन किया. बाद में यह आंदोलन बेल्जियम की राजधानी ब्रुस्सेल तक पहुंच गया.

बेल्जियम में पुलिस पर पत्थरबाजी करता प्रदर्शनकारी.
9 अक्टूबर को ब्रुस्सेल में बड़े प्रदर्शन हुए. जिसमें 50 हज़ार से अधिक लोग शामिल हुआ. प्रदर्शन में शामिल युवाओं ने पत्थरबाजी की, पटाखें फोड़ें और वाहनों में आग लगा दी. पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया.
17 अक्टूबर को ब्रुस्सेल और लीग में हजारों छात्रों ने प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारी छात्रों व पुलिस के बीच झड़पें हुईं. रायटर रिपोर्ट के मुताबिक़ बेल्जियम के आंतरिक मंत्री ने कहा है कि अब यह “सिर्फ प्रदर्शन नहीं रहा” और कठोर कार्रवाई होगी.