Gaurav Prakash Hazaribagh : समाज में खुलेपन आने के साथ-साथ नाबालिगों की ओर से अंजाम दिए जा रहे आपराधिक वारदात भी बढ़ रहे हैं. इनमें हत्या, मारपीट, दुष्कर्म आदि की घटनाएं शामिल हैं. समाज के लिए यह बड़ी चुनौती बनती जा रही है. अभिभावक इस बात को लेकर चिंतित रहते हैं कि उनके बच्चे गलत रास्ते पर नहीं जाएं. वहीं जिनके बच्चे गलत रास्ते पर चले गए हैं, वह कैसे मुख्यधारा में लौटें. झारखंड में पहली बार बाल संरक्षण आयोग ऐसे बच्चे जो अपराध की दुनिया से निकाल उन्हें मुख्यधारा में जोड़ने के लिए काउंसिलिंग करने का विचार बना रहा है. झारखंड बाल संरक्षण आयोग के सदस्य सुनील वर्मा बताते हैं कि अगर आयोग के पास ऐसे मामले आएंगे, तो वे लोग काउंसिलिंग का सहारा लेंगे. इसके लिए जिला स्तर पर टीम बनाई जाएगी. इसमें मनोचिकित्सक को रखा जाएगा. वहीं राज्य स्तरीय टीम भी बनाई जाएगी. कितने दिनों की काउंसिलिंग की जाए, वह केस पर निर्भर करेगा. बाल संरक्षण आयोग ने इस बात को लेकर ट्वीट भी किया है कि बच्चों में आपराधिक प्रवृत्ति बढ़ने के पीछे के कारण क्या हैं. इसे भी पढ़ें :
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झारखंड में बढ़ रहा बाल अपराध का ग्राफ
एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक राज्य में बाल अपराध बढ़ रहे हैं. वर्ष 2019 में बच्चों के खिलाफ अपराध के 1,674 मामले दर्ज किए गए, जबकि 2020 में यह बढ़कर 1,795 और 2021 में 1,867 हो गए. महिलाओं के खिलाफ अपराधों में 2020 में मामूली गिरावट देखी गई, लेकिन 2021 में वह फिर बढ़ गया. 2019 में महिलाओं के खिलाफ कुल 8,760 अपराध दर्ज किए गए. इसके बाद 2020 में 7,630 और 2021 में 8,110 मामले दर्ज किए गए. इसे भी पढ़ें :
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