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रिम्स को जाम मुक्त बनाने की पहलः अवैध प्राइवेट एंबुलेंस कैंपस से आउट

Ranchi: राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान रिम्स पर न सिर्फ झारखंड बल्कि पड़ोसी राज्यों के मरीजों का भी भार है. ओपीडी में इलाज के लिए हर दिन हजारों की संख्या में मरीज पहुंचते हैं. तो वहीं सैकड़ों मरीजों को यहां भर्ती भी किया जाता है. एंबुलेंस और डॉक्टरों के लिए आने जाने वाला रास्ता पुरानी इमरजेंसी के पास अवैध एंबुलेंस चालकों ने अपना कब्जा जमा लिया था. इस वजह से जाम की समस्या बनी रहती थी. प्रबंधन के द्वारा सोमावर को अवैध एंबुलेंस को बाहर का रास्ता दिखाया गया. होमगार्ड के जवानों ने सभी अवैध एंबुलेंस को बाहर हटवाया और परिसर को जाम मुक्त बनाया. वहीं परिसर में बनी दोपहिया वाहनों की पार्किंग के पास बांस की घेराबंदी को भी हटाया गया. इसे पढ़ें- हजारीबाग:">https://lagatar.in/hazaribagh-eight-people-injured-in-bagodar-accident-admitted-in-hazaribagh-mla-took-care/">हजारीबाग:

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मरीजों को बरगला कर करते हैं मोटी कमाई

गौरतलब है कि रिम्स परिसर में दर्जनों की संख्या में प्राइवेट एंबुलेंस चालकों का कब्जा है. यहां 24 घंटे एंबुलेंस खड़े किए जाते है. एंबुलेंस चालकों का एक सिंडिकेट काम करता है. रिम्स से डिस्चार्ज होने वाले मरीजों को वार्ड में सिंडिकेट भांप लेता है. एंबुलेंस से घर तक छोड़ देने की बात कहते हुए मोटी कमाई की जाती है. इस सिंडिकेट में रिम्स के वार्ड बॉय की संलिप्तता से भी इंकार नहीं किया जा सकता है.

रेट चार्ट तय नहीं, जिससे जितनी मर्जी लिया जाता है किराया

एंबुलेंस के लिए रेट का निर्धारण नहीं किया गया है. एंबुलेंस चालक मनमाना किराया वसूलते हैं. छोटे एंबुलेंस के लिए 15 रुपये प्रति किलोमीटर की दर से मांग की जाती है. मोल भाव के बाद बात बन जाने पर एंबुलेंस से घर छोड़ा जाता है. इसे भी पढ़ें- शाम">https://lagatar.in/evening-news-diary-3-apr-2023-jharkhand-news-updates/">शाम

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क्या कहते हैं रिम्स के जनसंपर्क अधिकारी

इस मामले पर रिम्स के जनसंपर्क अधिकारी डॉ राजीव रंजन ने कहा कि परिसर को जाम मुक्त बनाने के लिए प्रबंधन के द्वारा एंबुलेंस को हटाया गया है. अस्पताल परिसर का रास्ता वन वे है. एक तरफ से गाड़ियां आएंगी और दूसरी तरफ से जाएंगी, ऐसी व्यवस्था करने की कोशिश की गई है. [wpse_comments_template]

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