फर्स्ट एड निःशुल्क तो सैनिटरी पैड के लिए 10 रु क्यों
जांच में पाया गया कि दो शिक्षिका के गैर जिम्मेदाराना व्यवहार की वजह से छात्रा को 10 रुपये के लिए महावारी की स्थिति में सिक रूम, क्लास रूम और स्टाफ रूम तक चक्कर लगाने को मजबूर होना पड़ा. मिथिला टुडू ने स्कूल प्रबंधन से पूछा कि जब विद्यार्थियों के लिए फर्स्ट एड की व्यवस्था निःशुल्क होनी चाहिए, तो 10 रुपये का शुल्क क्यों. उन्होंने कहा कि जल्द ही जांच रिपोर्ट जिला शिक्षा पदाधिकारी भूतनाथ रजवार को सौंप देंगी. वह अपने स्तर से स्कूल व शिक्षिका के विरुद्ध कार्रवाई करेंगे. बता दें कि इसके पूर्व स्कूल प्रबंधन भी इस विषय को गंभीर मानते हुए अपने स्तर पर जांच कराने की बात कह चुका है.स्कूल में पहले भी प्रताड़ित हुए हैं बच्चे
इस घटना के बाद शिल्पी सिंह नामक एक महिला ने भी सोशल मीडिया पर पोस्ट डालते हुए अपनी बेटी के साथ इस तरह के व्यवहार का जिक्र किया है. महिला ने बताया कि जब उसकी बेटी कक्षा दो में पढ़ती थी, तब एक शिक्षिका ने उसे बुरी तरह मारा-पीटा था. परिजनों ने एफआईआर भी दर्ज कराई थी. यह मामला विगत आठ-दस वर्षों से न्यायिक प्रक्रिया की मार झेल रहा है. अपराधी मजे से बाहर घूम रहा है. अब उनकी बेटी 11वीं कक्षा में है. परंतु उस घटना को याद कर वह आज भी डिप्रेशन में आ जाती है.स्कूल प्रबंधन और शिक्षिका को कोस रहे लोग
सोशल मीडिया पर लोग स्कूल प्रबंधन और शिक्षिका को कोस रहे हैं. जबकि कई लोग स्कूल प्रबंधन से मांग कर रहे हैं कि छात्राओं के लिए हर स्कूल के सिक रूम और महिला शौचालय में सेनेटरी पैड बॉक्स की व्यवस्था की जाए, ताकि जरूरत पड़ने पर छात्राओं को किसी से मदद ना मांगनी पड़े. झारखंड अभिभावक महासंघ के प्रदेश महासचिव मनोज मिश्रा, पप्पू सिंह और मधुरेंद्र कुमार सिंह ने शिक्षा विभाग के सचिव, उपायुक्त, संबंधित स्कूल की प्राचार्य एवं अन्य स्कूलों के प्रबंधन से पत्राचार शुरू कर दिया है. यह भी पढ़ें: धनबाद">https://lagatar.in/dhanbad-if-the-demands-of-the-displaced-are-not-fulfilled-till-chhath-then-the-movement-basudev/">धनबाद: छठ तक विस्थापितों की मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन- बासुदेव [wpse_comments_template]
















































































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