Lagatar Desk: आईडीबीआई बैंक को बेचने के फैसले पर लगातार सवाल उठ रहे हैं. दो नवंबर को बिजनेस वर्ल्ड (Businessworld) ने अपनी चौथी खोजी खबर प्रकाशित किया है. जिसमें यह सवाल उठाया गया है कि क्या IDBI के पैसे से ही IDBI को खरीद रहा है Fairfax. खबर को पत्रकार पलक शाह ने तैयार किया है. हिन्दी के पाठकों के लिए खबर के महत्पूर्ण अंश का हिन्दी अनुवाद किया गया है.
सौदे का मूल ढांचा
- सरकार और LIC मिलकर IDBI बैंक में अपना 60.72% हिस्सा बेच रहे हैं.
- कीमत: ₹81 प्रति शेयर, कुल ₹52,878 करोड़ (लगभग $5.6 बिलियन).
- सौदे के दिन बाजार भाव लगभग ₹90 प्रति शेयर था, इसलिए यह बाजार से सस्ता सौदा माना जा रहा है.
- सौदे के बाद सरकार के पास 15% और LIC के पास 19% (कुल 34%) बचा रहेगा. बैंक पर Fairfax नियंत्रण ले लेगी.
- सौदा अभी अंतिम नहीं है. RBI की “fit and proper” मंजूरी और अन्य नियामक अनुमोदन बाकी हैं.
सवाल: फंडिंग का स्रोत
Fairfax के अधिकारियों ने निवेशकों के साथ एक कॉल (15 अक्टूबर 2026) में प्रेम वत्सा ने बताया कि IDBI बैंक के पास अतिरिक्त पूंजी (excess capital) है. बैंक Fairfax की बीमा और वित्तीय कंपनियां नकद (cash) में बाजार भाव पर खरीदेगा. पीटर क्लार्क (Fairfax प्रेसिडेंट) ने आंकड़ा दिया है कि कुल खरीद कीमत: $5.6 बिलियन. Digit Insurance (General + Life) और IIFL Capital का योगदान - लगभग $3 बिलियन, यह कुल कीमत का आधे से ज्यादा (लगभग 54%) है.
पलक शाह के अनुसार, $3 बिलियन ≈ ₹28,300 करोड़ बनता है. यानी Fairfax जो पैसा IDBI खरीदने के लिए दे रही है, उसका बड़ा हिस्सा IDBI खुद Fairfax की कंपनियां खरीदकर वापस Fairfax को दे देगा. एक एनालिस्ट (ATB Cormark) ने जब पूछा - “Digit और IIFL को बैंक में डाल दिया जाएगा और आप surplus capital से कैश निकाल लेंगे.” वत्सा ने इसका जवाब दिया - “Yes, that’s true.” हां यही सच है.
कैसे पैसा घूमेगा
- Fairfax सरकार और LIC को ₹52,878 करोड़ देकर 60.72% खरीदती है.
- फिर IDBI बैंक (जिस पर अब Fairfax का नियंत्रण होगा) Fairfax की Digit और IIFL Capital में हिस्सेदारी बाजार भाव पर नकद खरीदता है.
- यह नकद पैसा Fairfax ग्रुप के पास वापस चला जाता है, जिससे सौदे की फंडिंग पूरी होती है.
IDBI बैंक 30 सितंबर 2026 को ₹61,164 करोड़ की नेट वर्थ और लगभग 27% कैपिटल एडेक्वेसी रेशियो के साथ मजबूत स्थिति में है. यह अतिरिक्त पूंजी मुख्य रूप से 2016-2020 के संकट के दौरान सरकार और LIC द्वारा डाले गए पैसे से आई है (उस समय बैंक का संचयी नुकसान लगभग $6.4 बिलियन था).
अन्य महत्वपूर्ण बिंदु
- सौदा सस्ता क्यों? पहले रिजर्व प्राइस ₹94.42 था, जिसे बाद में घटाया गया. लेखिका के पहले लेखों में दावा किया गया है कि बिड खोलने के बाद वैल्यूएशन बदला गया.
- कंपनियां: Go Digit General, Go Digit Life और IIFL Capital. इनमें से Go Digit Life लिस्टेड नहीं है, इसलिए उसकी सही वैल्यूएशन पर सवाल है.
- नियामकीय मुद्दे: RBI के नियम बैंक को किसी एक वित्तीय कंपनी में अपनी पूंजी का 10% से ज्यादा और कुल 20% से ज्यादा निवेश करने की अनुमति नहीं देते. इसके लिए अलग मंजूरी चाहिए.
- Fairfax का दावा है कि इससे एक मजबूत “global Indian bank” बनेगा, जिसमें बैंकिंग + इंश्योरेंस + वेल्थ मैनेजमेंट एक साथ होंगे. मैनेजमेंट वही रहेगा (Rakesh Sharma CEO).
संवाददाता के सवाल
- क्या Fairfax ने अपनी बिड में यह बताया था कि IDBI का पैसा इस्तेमाल होगा?
- क्या वैल्यूएशन करने वाली एजेंसियों ने इस बात को ध्यान में रखा?
- IDBI के अल्पांश शेयरधारकों (सरकार + LIC के 34%) का हित कैसे सुरक्षित रहेगा, जब नियंत्रक खुद अपनी कंपनियां बैंक को बेच रहा हो?
- RBI इस संरचना को कैसे मंजूर करेगा?
डिस्क्लेमरः इस खबर को अनुवाद करने व तैयार करने में AI की मदद ली गई है.
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