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ISRO ने फिर रचा इतिहास, श्रीहरिकोटा से SSLV-D3-EOS-08 की सफल लॉन्चिंग, आपदा से पहले मिलेगा अलर्ट

  • देश को मिला नया ऑपरेशनल रॉकेट
NewDelhi : भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने अंतरिक्ष ने फिर इतिहास रचा है.  इसरो ने आज सुबह 9:17 बजे श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से SSLV-D3 रॉकेट की सफल लॉन्चिंग की. इसके अलावा नया अर्थ ऑब्जरवेशन सैटेलाइट EOS-8 को भी लॉन्च किया गया. SSLV-D3-EOS-08 रॉकेट के साथ एक छोटा सैटेलाइट SR-0 DEMOSAT भी भेजा गया है. यह सैटेलाइट धरती की निगरानी करेगा. इस सैटेलाइट पर तीन पेलोड्स लगे हैं. ये सैटेलाइट्स धरती से 475 किलोमीटर की ऊंचाई के गोलाकार ऑर्बिट में चक्कर लगायेंगे. यह सैटलाइट किसी भी आपदा के आने से पहले अलर्ट देगी. https://twitter.com/PTI_News/status/1824292938249060771

जानें क्या है SSLV-D3 रॉकेट 

SSLV का फूल फॉर्म स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल है. वहीं D3 यानी तीसरी डिमॉनस्ट्रेशन फ्लाइट है. इस रॉकेट का इस्तेमाल मिनी, माइक्रो और नैनो सैटेलाइट्स की लॉन्चिंग के लिए किया जाता है. SSLV रॉकेट की लंबाई 34 मीटर है. इसका व्यास 2 मीटर है. SSLV का वजन 120 टन है. एसएसएलवी 10 से 500 किलो के पेलोड्स को 500 km तक पहुंचा सकता है. SSLV सिर्फ 72 घंटे में तैयार हो जाता है. SSLV को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर के लॉन्च पैड एक से लॉन्च किया जाता है. https://twitter.com/isro/status/1824193679130808661

https://twitter.com/isro/status/1824017646335250499

EOS-8 रॉकेट धरती से ऊपर निचली कक्षा में लगायेगा चक्कर

SSLV-D3 के साथ अर्थ ऑब्जरवेशन सैटेलाइट यानी EOS-8 को भी लॉन्च किया गया है. यह धरती से ऊपर निचली कक्षा में चक्कर लगायेगा. EOS-8  पर्यावरण की मॉनिटरिंग, आपदा प्रबंधन और तकनीकी डेमॉन्स्ट्रेशन का काम करेगा. यह अपने साथ महत्वपूर्ण उन्नत तकनीकों को ले गया है. इसका वजन 175.5 किलोग्राम है.  इस सैटेलाइट में तीन स्टेट-ऑफ-द-आर्ट पेलोड हैं.  इनके नाम इलेक्ट्रो ऑप्टिकल इंफ्रारेड पेलोड (EOIR), ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम रिफ्लेक्टोमेट्री पेलोड (GNSS-R) और सिक यूवी डोजीमीटर (SiC UV Dosimeter) हैं. EOIR चौबीसों घंटे पृथ्वी की विस्तृत छवियों को कैप्चर करेगा. वहीं GNSS-R को महासागरों, पहाड़ों, बर्फ के आवरण और जंगलों जैसी पृथ्वी की विशेषताओं का विश्लेषण करने के लिए बनाया है. जबकि SiC UV Dosimeter को अंतरिक्ष में पराबैंगनी विकिरण को मापने के लिए डिजाइन किया गया है.

SSLV को ऑपरेशनल रॉकेट का दर्जा मिला

बता दें कि  SSLV-D3 के लॉन्चिंग के साथ SSLV को ऑपरेशनल रॉकेट का दर्जा मिल गया. SSLV-D3, SSLV का तीसरा और आखिरी रॉकेट था, जिसे लॉन्च कर दिया गया. इससे पहले SSLV के दो रॉकेट अंतरिक्ष में लॉन्च किये गये थे. SSLV-D1 की लॉन्चिंग 7 अगस्त 2022 को हुई थी. वहीं SSLV-D2 को 10 फरवरी 2023 को लॉन्च किया गया था. SSLV-D2 के साथ तीन सैटेलाइट EOS-07, Janus-1 और AzaadiSAT-2 भेजे गये थे. [wpse_comments_template]

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