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सिनेमा हॉल में बाहर से खाने की चीज लाने पर रोक लगाना सही : सुप्रीम कोर्ट

New Delhi : सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सिनेमा हॉल और मल्टीप्लेक्स में बाहर से खाने की चीजें लाने पर रोक लगाना सही है. यह सिनेमा हॉल मालिकों के व्यापार के अधिकार के दायरे में आता है. इस अधिकार को उनसे नहीं छीना जा सकता. यह भी कहा कि किसी को भी हॉल परिसर में मिलने वाली चीजें खाने के लिए बाध्य नहीं किया जाता. जिसे वहां न खाना हो, न खाए. सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर के सिनेमा हॉल और मल्टीप्लेक्स मालिकों की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह बातें कही हैं. याचिकाकर्ताओं ने 2018 में आए जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी. हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि सिनेमा हॉल में आनेवाले लोग बाहर से खाने की चीजें ला सकते हैं. सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को हाईकोर्ट के उस फैसले को निरस्त कर दिया, जिसमें हाईकोर्ट ने सिनेमा हॉल में बाहर से खाने पीने की चीजें ले जाने की इजाजत दी थी.

सिनेमा हॉल कोई जिम नहीं है

चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा, सिनेमा हॉल कोई जिम नहीं है, जहां आपको हेल्दी भोजन की आवश्यकता है. यह एक मनोरंजन का स्थान है. सिनेमा हॉल प्राइवेट प्रोपर्टी है. यहां उसके मालिक ही मर्जी चलेगी. हाईकोर्ट कैसे कह सकता है कि वे सिनेमा हॉल के अंदर कोई भी खाना ला सकते हैं? जजों का कहना था कि राज्य सरकार की तरफ से नियम न बनाने के चलते सिनेमा हॉल मालिकों को व्यापार के मौलिक अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता.

सिनेमा हॉल के पास नियम बनाने के अधिकार

शीर्ष अदालत ने कहा कि सिनेमा हॉल के पास नियम बनाने का अधिकार है. चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, अगर कोई सिनेमा हॉल में जलेबी लेकर जाना चाहे तो प्रबंधन उसे मना कर सकता है. अगर दर्शक ने जलेबी खाकर सीट से अपनी चाशनी वाली अंगुलियां पोंछ ली तो सीट खराब हो सकती है. इसके बाद सीट की सफाई का खर्च कौन देगा? कुछ लोग तंदूरी चिकन लेकर भी सिनेमा हॉल आते हैं लेकिन बाद में उनकी हड्डियां वहीं छोड़ जाते हैं. उससे भी कुछ लोगों को परेशानी होती है.

`लोगों को मुफ्त में पीने का पानी उपलब्ध कराते हैं`

सिनेमा हॉल मालिकों की याचिका में कहा गया था कि वे लोगों को मुफ्त में पीने का स्वच्छ पानी उपलब्ध कराते हैं. इसके अलावा अगर कोई नवजात बच्चा अपने माता पिता के साथ आया हो, तो उसके लिए जरूरी खाने-पीने की सामग्री हॉल में लेकर आने पर भी कोई पाबंदी नहीं है. लेकिन यह नहीं कहा जा सकता कि सभी दर्शक बाहर से खाने की चीजें ला सकते हैं.

SC ने जम्मू-कश्मीर HC के आदेश को किया रद्द

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश को अनुचित करार दिया. पीठ ने कहा कि उच्च न्यायालय ने अपने अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन किया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिस तरह दर्शकों को अधिकार है कि वो किस थिएटर में कौन सी फिल्म देखें ठीक उसी तरह सिनेमा हॉल प्रबंधन को भी नियम बनाने के अधिकार हैं.

2018 से जुड़ा है मामला

प्रधान न्यायाधीश ने यह भी कहा कि जब टीवी पर 11 बजे के बाद कुछ खास वर्ग की फिल्मों के प्रसारण का नियम बनाया गया, इसका मकसद कुछ और था. इस तरह की फिल्में वयस्क लोग बच्चों के सोने के बाद ही देखें. मगर इस पर भी कई लोगों को आपत्ति थी. उन लोगों का कहना था कि वयस्क तो देर रात खाना-पीना खाकर सो जाते हैं. बच्चे ही जागे रहते हैं. बता दें कि दो वकीलों ने जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट के 18 जुलाई 2018 को दिए फैसले को यहां सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. सिनेमा हॉल में बाहर से खाने पीने की चीजें ले जाने पर पाबंदी लगा दी थी.
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