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विस चुनाव : झामुमो के लिए आसान नहीं होगा गुमला और सिसई में अपनी जीत को दोहराना...

गुमला जिला : झामुमो के भूषण, जिगा, चमरा का मुकाबला भाजपा के सुदर्शन, अरुण और समीर से,  विशुनपुर  में कांटे की टक्कर Pravin kumar Ranchi : गुमला जिले में पड़नेवाली तीन विधानसभा सीटों को फिर से अपने कब्जे में रख पाना झामुमो के लिए चुनौतीपूर्ण काम होगा. आदिवासी अस्मिता, संविधान बचाने की बात करने वाले इंडिया गठबंधन के लिए तीनों विधानसभा सीट  अहम है. भाजपा ने यहां से हैवीवेट उम्मीदवार उतारे हैं, जिनककी पकड़ इलाके में पार्टी फोल्डर के बाहर भी है. भाजपा ने गुमला विधानसभा सीट से पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री सुदर्शन भगत, व विशुनपुर से पूर्व सांसद और अजजा मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष समीर उरांव को उतारा है.  सिसई से कांग्रेस के दिग्गज नेता कार्तिक उरांव के दामाद और पूर्व विधायक बंदी उरांव के बेटे डॉ अरुण उरांव को प्रत्याशी बनाया गया है. अरुण उरांव पूर्व आईपीएस अधिकारी हैं. इन तीनों सीटों पर फिलहाल झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) का कब्जा है, भाजपा ने इन्हें अपने कब्जे में लेने की रणनीति तैयार की है.

सुदर्शन भगत और भूषण तिर्की के बीच कांटे की टक्कर

गुमला विधानसभा सीट से भाजपा के उम्मीदवार सुदर्शन भगत को बनाये जाने के बाद सरना वोटों का पूरी तरह से भाजपा के पक्ष में ध्रुवीकरण देखा जा रहा है. सुदर्शन के चुनाव में खड़े होने पर गैर भाजपा वोट भी भाजपा के पाले में जाते धिख रहे है. इससे झामुमो प्रत्याशी भूषण तिर्की की परेशानी बढती जा रही है. भूषण ने बड़े इलाके में एक विधायक के तौर पर कुछ खास नहीं किया है,  जिसे दिखाया जा सके. सत्तारुढ़ दल के विधायक होने के कारण लोगों में इनके प्रति नाराजगी देखी जा रही है. हालांकि भूषण तिर्की के पक्ष में ईसाई और मुस्लिम वोटों का ध्रुवीकरण देखा जा रहा है. लेकिन भाजपा गुमला विधानसभा सीट पर जीत की संभावना देख रही है.

विशुनपुर में भाजपा  के समीर उरांव का मुकाबला  झामुमो के चमरा लिंडा  से

विशुनपुर विधानसभा सीट से भाजपा ने समीर उरांव को अपना उम्मीदवार बनाया है. इस सीट पर मुख्य मुकाबले में झामुमो के चमरा लिंडा हैं. हाल ही में झामुमो पार्टी से इनका निलंबन वापस लिया है. लोकसभा चुनाव में चमरा लिंड़ा को अपने ही विधानसभा क्षेत्र में मात्र 13276 वोट मिले थे. कांग्रेस पार्टी भी चमरा के इस कदम से नाराज थी. लोकसभा चुनाव में चमरा की उम्मीदवारी विधानसभा में उसे परेशान कर सकती है. समीर उरांव को लोकसभा चुनाव के समय विशुनपुर से 63076 वोट मिले थे वहीं कांग्रेस के सुखदेव भगत को 77895 वोट मिले थे. देखा जा रहा है कि कांग्रेस का एक मजबूत खेमा चमरा के पैरों तले से जमीन खिसकाने का काम कर रहा है. जिसका खामियजा झामुमो को  भुगतना होगा. समीर उरांव पहले सिसई विधानसभा क्षेत्र से विधायक रह चुके हैं.वर्तमान में भाजपा के अजजा मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष हैं.

सिसई में उरांव वर्सेस मुंडा की लडाई!

सिसई विधानसभा सीट में भाजपा ने अरुण उरांव को उम्मीदवार बनाया है.अरुण उरांव पूर्व आईपीएस अधिकारी हैं. उनका संबंध झारखंड के दो प्रमुख कांग्रेस राजनीतिक घरानों से रहा है. उनके पिता बंदी उरांव सिसई से विधायक रह चुके हैं,जबकि उनके ससुर कार्तिक उरांव झारखंड के एक प्रमुख जनजातीय नेता थे. अरुण के चुनावी मैदान में उतरने से भाजपा को क्षेत्र में एक सशक्त उम्मीदवार मिला है, जिससे सिसई सीट पर मुकाबला और भी रोचक हो गया है. अरुण अपनी नौकरी छोड़ने के बाद से ही सिसई विधानसभा क्षेत्र में सक्रिय रहे है. पुराने कांग्रेसी नेताओ का भी उन्हें साथ मिल रहा है. साथ ही एक मुश्त सरना वोट उनके पक्ष में गोलबंद होता दिख रहा है, जिससे झामुमो के विधायक जिगा सुसारण होरो की परेशानी बढ़ती जा रही है. सिसई के कमडरा प्रखंड में मुंडा और उरांव उम्मीदवार को लेकर लोग बंट रहे हैं.

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