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शहरी निकायों के 7 लाख अवैध भवनों को नियमित होने में अभी लगेगा टाइम

  • सुझावों और दूसरे राज्यों की योजना का अध्ययन हो रहा, अभी समय लगेगा : गजानंद राम
Ranchi: झारखंड के शहरी निकायों में बने करीब 7 लाख अवैध भवनों के नियमितिकरण में अभी वक्त लगेगा. अनधिकृत आवासीय निर्माण के नियमितीकरण के लिए योजना -2022 का फाइनल ड्राफ्ट अभी तैयार नहीं हुआ है. जनवरी 2023 से नगर विकास की विभाग की कमेटी इस ड्राफ्ट पर राज्यभर से आये 100 से अधिक सुझावों और दूसरे राज्यों की योजना का अध्ययन कर रही है. नगर विकास विभाग के चीफ टाउन प्लानर और ड्राफ्ट पर आये सुझावों का अध्ययन करने वाली कमेटी के प्रमुख गजानंद राम ने कहा है कि अभी इस योजना के लागू होने में समय लगेगा.

सीएम की सहमति के बाद 19 नवंबर को जारी हुआ था ड्राफ्ट

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आदेश के बाद 19 नवंबर 2022 को अवैध मकानों को रेगुलर करने की योजना का ड्राफ्ट तैयार किया गया था. इसमें 31 दिसंबर 2019 के पहले भवनों को रेगुलर करने की बात कही गई थी. ड्राफ्ट के मुताबिक 15 मीटर की ऊंचाई तक वाले तीन मंजिला भवनों को रेगुलर किया जाएगा, वहीं 500 वर्गमीटर से कम प्लॉट का प्लिंथ क्षेत्र 100 प्रतिशत और 500 वर्गमीटर से बड़े प्लॉट का प्लिंथ क्षेत्र 75 फीसदी या 500 वर्गमीटर (दोनों में जो भी कम हो) होना चाहिए. दिसंबर 2022 तक सरकार ने इस ड्राफ्ट पर आपत्तियां और सुझाव मांगी थी.

लोग चाहते हैं बिना शर्त अवैध मकान वैध कर दे सरकार

अधिकांश लोगों ने बिना शर्त अवैध मकानों को नियमित करने का सुझाव दिया है. लोगों ने विभाग को सीएनटी-एसपीटी एक्ट का उल्लंघन कर बने मकानों, एग्रीकल्चर लैंड और ओपन स्पेस में बने भवनों को भी रेगुलर करने का सुझाव दिया है. राज्य के शहरी निकायों में करीब 7 लाख भवन अवैध हैं. इनमें से अधिकांश ने नक्शा पास कराये बिना मकान बनाया है, जबकि कई लोगों ने नक्शा पास कराने के बावजूद नक्शे के मुताबिक मकान नहीं बनाया है. सबसे ज्यादा अवैध मकान राजधानी रांची में हैं. रांची में करीब सवा दो लाख मकान हैं. इनमें से 33 हजार का ही नक्शा पास है. 1 लाख 90 हजार मकानों में से अधिकांश सीएनटी एक्ट का उल्लंघन कर बने हैं. कई लोगों ने नदी-नालों और जल स्त्रोतों को घेरकर मकान बनाया है. कई जमीनों का मामला कोर्ट में भी लंबित है. इसे भी पढ़ें दो">https://lagatar.in/investigation-report-has-to-be-given-to-dc-on-the-death-of-two-prisoners-yet-not-received-from-the-judicial-magistrate/">दो

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