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जगन्नाथपुर : आदिवासी हो समाज महासभा ने कोल गुरू लाको बोदरा की 103वीं जयंती मनाई

 
Jagnnathpur (Rohit Mishra) : सोमवार को आदिवासी हो समाज महासभा सह अनुमंडल समिति ने ओत गुरू कोल लाको बोदरा की 103वीं जयंती मनाई. मौके पर समाज के लोगों ने रितुई गुण्डुई शहीद स्थल पर ओत गुरू कोल लाको बोदरा की तस्वीर पर माल्यार्पण कर श्रद्धा सुमन अर्पित किये. उसके बाद उनके जीवनी पर प्रकाश डाला. वक्ताओं ने कहा कि लाको बोदरा का जन्म खूंटपानी प्रखण्ड के पासेया गांव में हुआ था. प्रारंभिक शिक्षा गांव के बाचोमहातु विद्यालय में हुई. इसे भी पढ़ें : कोडरमा">https://lagatar.in/koderma-mla-angry-with-the-style-of-the-station-in-charge/">कोडरमा

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नौकरी छोड़ समाज के काम में बिताय पूरा जीवन

साथ ही जालंधर विश्वविद्यालय से बीएससी करने के बाद रेलवे में सेवा दी. इसी दौरान उन्होंने वारंग क्षिति लिपि का आविष्कार किया. बाद में उन्होंने नौकरी छोड़कर समाज के काम में पूरा जीवन व्यतीत कर दिया. उन्होंने कहा कि सभी आदिवासियों को अपनी भाषा की पढ़ाई करनी चाहिए. लोगों की पहचान अपनी भाषा व संस्कृति से होती है. उसके बाद समाज के लोगों ने जगन्नाथपुर में प्रभात फेरी निकाली. मौके पर सुदर्शन लागुरी, अर्जुन सिंकु, लखन सिंकु, सामिया लागुरी, तिरिल तिरिया सहित तुरतुंग के शिक्षक, शिक्षिकाएं एवं अन्य आदिवासी हो समाज महासभा के सदस्यगण उपस्थित रहे. [wpse_comments_template]
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