कृषि विधेयक को पूर्णरूप से समाप्त करने की पहल करें
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि झारखंड में अधिकांशतः आयातित वस्तुओं का ही व्यापार होता है. ऐसी वस्तुओं के कृषि शुल्क के दायरे में आने से यह किसी विपणन व्यवस्था की फीस न होकर सीधा-सीधा टैक्स हो जायेगा. जीएसटी के अतिरिक्त डबल टैक्सेशन होगा. अन्य राज्य से आयातित वस्तु पर अधिकतम स्लैब में कृषि शुल्क लगाकर बाजार समिति ने कोई सुविधा उपलब्ध नहीं कराई है, यह सीधा-सीधा आम उपभोक्ता पर महंगाई बढ़ानेवाला है. आग्रह किया कि इस पर पुनर्विचार किया जाये. राज्य के किसान और व्यवसाय के हित में इस विधेयक को पूर्णरूप से समाप्त करने की पहल करें. प्रतिनिधिमंडल में चेंबर अध्यक्ष किशोर मंत्री, उपाध्यक्ष आदित्य मल्होत्रा, महासचिव डॉ अभिषेक रामाधीन, पूर्व अध्यक्ष प्रवीण जैन छाबड़ा, रांची चेंबर पंडरा के अध्यक्ष संजय माहुरी शामिल रहे. इसे भी पढ़ें – देवघर">https://lagatar.in/deoghar-video-of-devotees-being-allowed-to-enter-baba-temple-through-vip-route-goes-viral/">देवघर: बाबा मंदिर में श्रद्धालु को वीआईपी रास्ते से प्रवेश कराने का वीडियो वायरल [wpse_comments_template]

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