Search

 
 
 

जयपाल सिंह मुंडा  झारखंड आंदोलन का बिगुल फूंकने वाले पहले व्यक्ति थे :  संघर्ष मोर्चा

आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा के केद्रीय अध्यक्ष विदेशी महतो ने कहा, झारखंड में लूट की नीति चल रही है. आदिवासी मूलवासी के राज्य में लूट की नीति खत्म नही हो रही है. सरकारी दफ्तर में घूस ली जा रही है. .बिना पैसा  कोई काम नहीं हो रहा है.
 

  Basant Munda

Ranchi :  कचहरी रोड स्थित जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा के सदस्यों ने आज जयपाल सिंह मुंडा को याद किया. उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किये.  उनके संघर्ष, आंदोलन, नेतृत्व और प्रतिभा को नमन किया.

इस अवसर पर कैलेंडर2026 जारी किया गया. विधायक मधुरा महतो, संस्थापक पुष्कर महतो,रतन लाल महतो, रतन लाल महतो,इजहार राही, दुमका प्रमंडल अध्यक्ष जिंदर कोल, कोल्हान प्रमंडल के विश्वजीत प्रमाणिक, जगत महतो, पलामू प्रमंडल के विशुन उरांव ने कार्यक्रम की अगुवाई की. 


कार्यक्रम में रामगढ़, हजारीबाग, लातेहार, गुमला, रांची, लोहरदगा समेत अन्य जिलों से भारी संख्या में आदोंलनकारी शामिल हुए. इस दौरान वक्ताओं ने अपनी बात रखते बताया,  जयपाल सिंह मुंडा का जन्म 3 जनवरी 1903 में खूंटी के टकरा गांव में हुआ था.


उनकी पढ़ाई ऑक्सफोर्ड में हुई. शिक्षा के बाद उनका चयन भारतीय सिविल सेवा(आईसीएस) में हो गया. वे 1925 में ऑक्सफोर्ड स्कूल का खिताब पाने वाले हॉकी के एकमात्र अंतराष्ट्रीय खिलाड़ी थे. उनकी कप्तानी में 1928 में ओलंपिक में भारत को हॉकी में स्वर्ण पदक मिला था.

 

झारखंड आंदोंलनकारियों के बच्चे को मिले सरकारी नौकरी में लाभ

 

इस अवसर पर आंदोलनकारियों ने कहा, झारखंड आंदोलन का बिगुल फूंकने वाले पहले व्यक्ति जयपाल सिंह मुंडा थे. उन्होंने 1938 में हिंदपीढ़ी मैदान में सभा का नेतृत्व किया था. जयपाल सिंह मुंडा एक खिलाड़ी ही नहीं,  बल्कि  देश के अग्रिम नेता भी थे.


वक्ताओं ने कहा कि अलग राज्य की मांग करने वाले झारखंड आंदोलनकारियों का सबकुछ खत्म हो गया है. आज वे रोड पर आ गये हैं. आंदोलन के समय जेल जाते जाते जल, जंगल,जमीन औऱ पैसा खत्म हो चुका है.


इस वजह से आंदोलनकारी का जीवन कठिनाई में पड़ गया है. उनके बच्चो की पढ़ाई नही हो पा रही है. सरकारी नौकरी में लाभ नही मिल रहा है.    


समृद्ध झारखंड का सपना अधूरा रहा गया :  भुनेश्वर मेहता


झारखंड आंदोलनकारी भुनेश्वर मेहता ने कहा, आंदोलन करते करते उम्र खत्म हो गयी है. सैकड़ों लोग शहीद हो गये, कई तो जेल में मर गये. कोई बीमारी से मर गया. आज झारखंड बने हुए 25 साल हो गये हैं.


असली आंदोलनकारियों का पहचान अब भी नहीं हो पायी है. समृद्ध झारखंड का सपना देखा गया था, लेकिन आज भी सपना अधूरा का अधूरा रह गया है. यहां तेजी से जमीन लूटी जा रही है. यहा औने पौने दाम पर गरीबों की जमीन खरीद बिक्री हो रही है.  

 

आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा के केद्रीय अध्यक्ष विदेशी महतो ने कहा, झारखंड में लूट की नीति चल रही है. आदिवासी मूलवासी के राज्य में लूट की नीति खत्म नही हो रही है. सरकारी दफ्तर में घूस ली जा रही है. .बिना पैसा  कोई काम नहीं हो रहा है.  


राज्य में रहने वाले लोगों के लिए कोई नीति नहीं बनी है. यहां केवल पत्थर,बालू और जमीन लूट की नीति चल रही है. राज्य के लोगो के लिए सरकारी नौकरी सुरक्षित नहीं है. क्योंकि यहां पर स्थानीय नीति, नियोजन,रोजगार औऱ विस्थापन नीति नहीं बन पायी है.

 

Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें.

Comments
Leave a Comment
Follow us on WhatsApp

Lagatar Media

Lagatar Media App
बेहतर न्यूज़ अनुभव
Lagatar Media App
ब्राउज़र में ही