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घोषणा के दो साल बाद भी ”मरांग गोमके” का गांव टकरा नहीं बन सका ‘आदर्श ग्राम’, जिम्मेवार कौन ?

Kaushal Anand Ranchi: घोषणा के दो साल बाद भी ``मरांग गोमके`` जयपाल सिंह मुंडा का गांव टकरा ‘आदर्श ग्राम’ के रूप में विकसित नहीं हो सका. 3 जनवरी 2020 को केंद्रीय जनजातीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने अपने संसदीय क्षेत्र में स्थित जयपाल सिंह मुंडा के टकरा गांव को ‘आदर्श ग्राम’ के रूप में विकसित करने की घोषणा की थी. इस आदर्श ग्राम में खेती के लिए पानी-सिंचाई की व्यवस्था, मॉडल स्कूल, अच्छी सड़कें, नाली, खेलने के लिए प्ले ग्राउंड, नया पंचायत भवन, फूड प्रोसेसिंग प्लांट सहित कई सुविधाएं प्रदान की जानी थी. अब घोषणा के तीन साल बाद भी इस पर कोई काम अब तक शुरू नहीं हो पाया है. अब इसके लिए जिम्मेवार कौन है? यह अहम सवाल है. टकरा आदर्श ग्राम बनने से इससे सटे तीन अन्य पंचायतें शुकरू, कुरकुतिया, हाथुदाग भी विकसित हो जातीं.

राज्य को फंड आवंटित, मगर सरकार ने अब तक राशि रिलीज नहीं की

जिले के एक वरीय अधिकारी ने बताया कि केंद्रीय जनजातीय मंत्रालय ने न केवल टकरा के लिए बल्कि राज्य में कई आदर्श ग्रामों को विकसित करने के लिए अनुच्छेद 275 (ए) के तहत अनुसूचित जनजातियों के विकास के लिए विशेष केंद्रीय सहायता के तहत 300 करोड़ रुपये राज्य सरकार को आवंटित कर चुके हैं, मगर अब तक यह राशि राज्य सरकार ने रिलीज ही नहीं की है.

क्या है जनजातीय उपयोजना के लिए विशेष केंद्रीय सहायता

जनजातीय उप योजना के लिए विशेष केंद्रीय सहायता (टीएसएस को एससीए) अनुसूचित जनजातियों के विकास के लिए अंब्रेला योजना का एक भाग है, जो अब मुख्य योजना का एक प्रमुख भाग है. इस योजना के तहत राज्य जनजातीय उप-योजना (टीएसपी) के लिए विशेष केंद्रीय सहायता प्रदान की जाती है. इससे जनजातीय लोगों के विकास और कल्याण के लिए राज्य सरकारों के प्रयासों को पूरा किया जाता है. जनजातीय उप-योजना (टीएसएस को एससीए) के लिए विशेष केंद्रीय सहायता के विशेष क्षेत्र कार्यक्रम के तहत जो राज्य के मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली राज्य स्तरीय कार्यकारी समिति की मंजूरी के बाद, और परियोजना मूल्यांकन समिति (पीएसी) में शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, कौशल विकास, रोजगार-सह-आय सृजन आदि जैसे विचारित क्षेत्रों में अंतरों को पाटने के लिए अधिसूचित जनजातीय लोगों के विकास और कल्याण के लिए 27 राज्यों को अनुदान जारी किए जाते हैं. अनुसूचित जनजातियों वाले राज्यों को राज्य सरकार से प्राप्त प्रस्तावों के आधार पर निधि जारी की जाती है. राज्यों को 100 प्रतिशत अनुदान प्रदान किया जाता है. [wpse_comments_template]

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