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सदन में बोले जयराम महतो – मनरेगा व अबुआ आवास योजना में बिचौलियों का दखल बढ़ा

Ranchi: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र में ग्रामीण विकास, ग्रामीण कार्य और पंचायती राज विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान विधायक जयराम महतो ने सरकार को कई मुद्दों पर घेरा. उन्होंने ग्रामीण अर्थव्यवस्था, भ्रष्टाचार और जवाबदेही पर अपनी बात रखी. जयराम महतो ने कहा कि राज्य की लगभग 75 प्रतिशत आबादी गांवों में रहती है.
 

Ranchi: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र में ग्रामीण विकास, ग्रामीण कार्य और पंचायती राज विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान विधायक जयराम महतो ने सरकार को कई मुद्दों पर घेरा. उन्होंने ग्रामीण अर्थव्यवस्था, भ्रष्टाचार और जवाबदेही पर अपनी बात रखी.

जयराम महतो ने कहा कि राज्य की लगभग 75 प्रतिशत आबादी गांवों में रहती है. उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में प्रति व्यक्ति मासिक खर्च करीब 2946 रुपये है, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 5393 रुपये है. उन्होंने सरकार से गांव और शहर के बीच इस अंतर को कम करने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की.

विधायक ने कहा कि मनरेगा और अबुआ आवास जैसी योजनाओं में बिचौलियों का दखल बढ़ गया है. लाभुकों को योजना का लाभ पाने के लिए रिश्वत देनी पड़ रही है. उन्होंने कहा कि कुछ अधिकारियों ने अन्याय को अन्य और आय में बदल दिया है, यानी ऊपरी कमाई का जरिया बना लिया है.

 

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उन्होंने विभाग के पिछले इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि इस विभाग पर पूरे राज्य की नजर रहती है. उन्होंने कहा कि पहले भी इस विभाग से जुड़े मंत्री विवादों में रहे हैं, इसलिए वर्तमान मंत्री को सावधान रहकर काम करना चाहिए.

जयराम महतो ने महिला समूहों और स्थानीय रोजगार को मजबूत करने की बात कही. उन्होंने कहा कि रेशम उत्पादन, तसर और वनोपज आधारित उद्योगों को बढ़ावा देकर गांवों में रोजगार बढ़ाया जा सकता है. उन्होंने अन्य छोटे राज्यों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां महिलाओं की भागीदारी से आय में बढ़ोतरी हुई है.

उन्होंने कहा कि गांव के लोग सरकार को सचिवालय से नहीं, बल्कि ब्लॉक, अंचल और थाना स्तर के काम से आंकते हैं. उन्होंने एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि रिश्वतखोरी के कारण जनता में नाराजगी बढ़ रही है.

विधायक ने पारदर्शिता के लिए हर योजना के शिलापट पर QR कोड लगाने का सुझाव दिया. इसे स्कैन करने पर योजना की राशि, समय सीमा और जिम्मेदार लोगों की जानकारी मिल सके. उन्होंने कहा कि अगर 70 से 80 प्रतिशत जनता काम से संतुष्ट हो तो संबंधित लोगों को प्रोत्साहन मिले, नहीं तो जांच कर कार्रवाई की जाए.

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