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सूकर पालकों के लिए निर्देश
यह एक विषाणुजनित छूआछूत का रोग है. जिसमें बीमार सूकर के सम्पर्क से स्वस्थ्य सूकर के आने से उसमें रोग फैलता है. साथ ही बीमार सूकर के मलमूत्र एवं दूषित दाना पानी भी उक्त बीमारी के फैसाव का कारण है. सूकर पालकों के द्वारा सूकरों ती देख भाल करने वालों के माध्यम से भी यह रोग फैलता है.हालांकि यह रोग केवल सूकरों को ही संक्रमित करता है. अन्य पशू इससे अछूते हैं. इसे भी पढ़ें : जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-vaccination-camp-organized-in-nttf/">जमशेदपुर: एनटीटीएफ में टीकाकरण शिविर आयोजित
रोग के प्रमुख लक्षण
तीव्र ज्वर, भूख न लगना या खाना छोड़ देना, उल्टी एवं दस्त (कभी- कभी खूनी दस्त), कान, छाती, पेट एवं पैरों में लाल चकत्तेदार धब्बा, बीमारी होने पर सूकर लड़खड़ाते हुए चलते हैं, एक से 14 दिनों में मृत्यु, किसी-किसी में मृत्यु के उपरान्त मुख एवं नाक से रक्त का स्राव होना भी पाया गया है. इसे भी पढ़ें : जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-ajit-amans-jai-jai-ganesha-ganpati-deva-is-making-a-splash-in-the-city/">जमशेदपुर: शहर में धूम मचा रही है अजीत अमन की ‘जय जय गणेशा, गणपति देवा’
ऐसे करें रोग से बचाव एवं रोकथाम
इस रोग का कोई ईलाज या टीका नहीं है, सतर्कता ही इस रोग से बचाव है, संक्रमित क्षेत्र में सूकरों की खरीद-बिक्री ना करें, सूकर फार्म में अनावश्यक आवाजाही पर रोक लगायें, संक्रमित क्षेत्र में सूकर मांस की बिक्री पर रोक लगावें, सूकर के बाड़े में अन्य जाति के पशुओं के आवाजाही पर रोक लगावें, सुकरों को होटल का जूठन अवशेष भोजन के रूप में देते हैं, तो वैसी स्थिति में भोजन को 20 मिनट उबालकर दें, मृत सूकर के संक्रमित भोजन एवं मल को गहरा गड्ढा खोदकर चूने के साथ दफना दें, सूकर बाड़े की सफाई प्रतिदिन कीटाणुनाशक घोल से करें. सात ही ज्यादा संख्या में सूकरों की मृत्यू होने पर स्थानीय पशूपालन पदाधिकारी को सूचित करें. इसे भी पढ़ें : जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-the-batch-of-rangreta-mahasabha-reached-amritsar-bjp-sc-morcha-welcomed-the-sangat/">जमशेदपुर: रंगरेटा महासभा का जत्था अमृतसर पहुंचा, भाजपा एससी मोर्चा ने संगत का किया स्वागत [wpse_comments_template]

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