Jamshedpur (Dharmendra Kumar) : अग्रसेन भवन साकची में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन मंगलवार को व्यासपीठ से कथावाचक पंडित मनीष शंकर महाराज ने परीक्षित जन्म एवं श्राप, श्री शुकदव जी का आगमन, विदुर मैत्रेय संवाद, कपिल देवहुति संवाद, धु्रव चरित्र की प्रसंग का विस्तार से व्याख्यान किया. महाराज श्री ने कहा कि शुकदेव इस संसार में भागवत का ज्ञान देने के लिए ही प्रकट हुए है. शुकदेव का जन्म विचित्र तरीके से हुआ. कहते हैं बारह वर्ष तक मां के गर्भ में शुकदेव जी रहे. वहीं श्रीमद्भागवत कथा के प्रभाव से राजा परीक्षित को मोक्ष प्राप्त हुआ था. दक्षयज्ञ प्रसंग सुनाते हुए महाराज जी ने कहा कि यज्ञ का उद्देश्य पवित्र होना चाहिए. दक्ष कर्मयोगी था, कर्मठ था, किंतु कर्म का उद्देश्य उसने अपवित्र रखा, शिव के अपमान का लक्ष्य रखा, जिसका परिणाम यह निकला कि उसका यज्ञ भंग हो गया और स्वयं का शिरोच्छेदन हुआ. कर्म का उद्देश्य यदि पवित्र हैं तो वह कर्म यज्ञ कहलाता हैं. इसे भी पढ़ें : जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-anti-social-elements-pelted-stones-at-jugsalai-hotel/">जमशेदपुर
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